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केरल बाढ़: मध्यप्रदेश के विष्णु ने कायम की मिसाल
- Author, अनंत प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केरल में लगभग 100 साल बाद आई बाढ़ से तकरीबन 324 लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोगों की ज़िंदगी पर अब भी संकट बना हुआ है.
सेना और एनडीआरएफ की टीमें इस आपदा से निपटने की कोशिश में लगी हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी केंद्र की ओर से 500 करोड़ रुपए का राहत पैकेज़ देने का ऐलान कर दिया है.
संकट की इस घड़ी में मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति के समर्पण भाव ने बाढ़ पीड़ितों का दिल जीत लिया है.
कैसे की बाढ़ पीड़ितों की मदद
मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले से आने वाले विष्णु कुमार गली-गली कंबल और चादर बेचने का काम करते हैं.
अपनी जीविका चलाने के लिए वे हरियाणा के पानीपत से चादर और कंबल ख़रीदते हैं और उन्हें दक्षिण भारतीय राज्यों के गांवों में हल्की सर्दी वाले मौसम में बेचते हैं.
बीते 12 साल से विष्णु यही कर रहे थे. वे हर साल बारिश ख़त्म होते-होते केरल पहुंच जाते हैं.
मॉनसून के बाद केरल का तापमान तकरीबन 24 से 27 सेल्सियस तक रहता है जिस वजह से ग्रामीणों को चादरनुमा हल्के कंबलों की ज़रूरत पड़ती है.
विष्णु बीबीसी को बताते हैं, "मैं हर साल यहां (कुन्नूर) कंबल बेचने आता हूं. लेकिन इस बार जब मैं यहां आया तो मुझसे उनकी हालत देखी नहीं गई. मैं इन लोगों को कई सालों से जानता हूं. मैंने पहली बार ऐसी भयावह बाढ़ देखी है."
"मैंने यहां देखा कि किसी का घर डूब गया, परिवार में कोई मर गया, किसी के पास खाने को कुछ नहीं है, किसी के पास ओढ़ने के लिए कुछ नहीं है. हर आदमी मुसीबत में है. ये सब देखकर मैंने सोचा कि 11 साल तक मैंने यहां से कमाया है और इस साल कमाता नहीं हूं और इनकी मदद कर देता हूं. बस यही सोचकर कर दिया."
अपनी आर्थिक स्थिति के बारे में बात करते हुए विष्णु कहते हैं, "मैं कोई बड़ा आदमी नहीं हूं, एक कंबल बेचकर बस 25 रुपए कमाता हूं. हर तीन महीने में केरल, तमिलनाडु और पास के दक्षिण राज्यों में कंबल बेचता हूं जिससे मेरा घर चल सके. लेकिन मैं पानी में भीगने के बाद ठंठ से ठिठुरते बच्चों को देखकर परेशान हो गया, मेरी आंखों में आंसू आ गए, मुंह से आवाज़ नहीं निकली और अपने सारे कंबल इन लोगों को एक-एक करके दे दिए."
शुरुआत में अपने स्तर पर कंबल बांटने के बाद उन्होंने क़रीब 50 कंबल स्थानीय ज़िलाधिकारी मोहम्मद अली को भी सौंपे ताकि वे बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचा सकें.
'अब तक दे चुका हूं 200 कंबल'
विष्णु दावा करते हैं कि वह अब तक 200 कंबलों को बाढ़ पीड़ितों में दान कर चुके हैं.
वो बताते हैं, "देखा जाए तो मुझे इन कंबलों के पैसे ख़ुद से भरने पड़ेंगे, लेकिन ये वक़्त अपने बारे में सोचने का नहीं है. मेरे पास कुछ पैसा होता तो मैं वो भी इन लोगों पर न्योछावर कर देता. लेकिन मेरे पास जो था मैंने दे दिया."
दिलचस्प बात ये है कि कुन्नूर ज़िले में विष्णु कुमार की इस पहल के बाद कई संस्थाओं ने आगे आकर इन लोगों की मदद की.
कुन्नूर के ज़िलाधिकारी मोहम्मद अली बीबीसी से बताते हैं, "ये अपने आप में ख़ास था. जब मुझे मेरे सहयोगियों ने इस व्यक्ति के बारे में बताया तो मुझे आश्चर्य हुआ कि इस सूदूर गांव में कोई मध्य प्रदेश का आदमी कैसे हो सकता है.''
''लेकिन बाद में मुझे पता चला कि ये इस इलाक़े से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं और अपने दिल से ये सहयोग करना चाहते हैं. मैं पूरे देश से अपील करना चाहता हूं कि ये एक बहुत बड़ी आपदा है जिसमें हमें विष्णु कुमार की तरह पूरे देश का सहयोग चाहिए."
'हमारा गुडलक है विष्णु'
कुन्नूर की इरिति तहसील के अदिचुकूती सरकारी स्कूल में चल रहे बाढ़ राहत शिविर में लोगों तक ये मदद पहुंचाने में विष्णु ने स्थानीय प्रशासन की मदद ली.
इरिति तहसील के नायब तहसीलदार लक्ष्मण बताते हैं कि जब विष्णु उनके पास आए तो उन्होंने पूछा कि क्या वो सच में ये करना चाहते हैं जिसके जवाब में विष्णु ने हां में सिर हिला दिया.
लक्ष्मण बताते हैं, "विष्णु हमारे लिए गुडलक चार्म की तरह आया. जबसे इसने ऐसा किया है तब से कई लोगों ने गरीब लोगों की मदद की है. कई संस्थाएं मदद के लिए आगे आई हैं. ये बहुत अच्छा रहा कि विष्णु ने मदद की और अब दूसरे लोग कर रहे हैं."
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