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बिहार शेल्टर होम कांड: मुज़फ़्फ़रपुर से मनीषा दयाल तक
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार की राजधानी पटना के राजीव नगर मोहल्ले में चल रहे एक आसरा गृह (शेल्टर होम) से दो लड़कियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस दो सवालों के जवाब ढूंढ रही है.
पहला तो ये कि दोनों लड़कियां पूनम और बबली की मौत की सूचना पहले स्थानीय पुलिस को नहीं देकर आसरा गृह के संचालक और स्टाफ़ आख़िर क्या छुपाना चाहते थे?
और दूसरा ये कि आसरा गृह के कर्मचारियों ने आनन-फ़ानन में पूनम के शव का पोस्टमॉर्टम करा कर दाह संस्कार क्यों कर दिया?
मामले की पड़ताल में लगी पुलिस ने इस कांड के दोनों मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है.
सोमवार की रात को अदालत की मंज़ूरी के बाद अनुमाया ह्यूमन फ़ाउंडेशन जिसके बैनर तले आसरा गृह का संचालन किया जाता था, उसकी कोषाध्यक्ष मनीषा दयाल और सेक्रेटरी चिरंतन कुमार को रिमांड पर लेकर पटना के सिटी एसपी अमरकेश डी के नेतृत्व में विशेष जांच दल पूछताछ करेगा.
वैसे तो आसरा गृह कांड सिर्फ़ 'शेल्टर होम में दो लड़कियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत' का मामला लगता है, लेकिन इसके तार अब समाज कल्याण विभाग और स्थानीय नेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक जुड़ गए हैं और इसकी केवल एक वजह है. वो है मनीषा दयाल.
कौन है मनीषा दयाल
पटना के एसएससपी मनु महाराज जिन्होंने मामला प्रकाश में आने के बाद डीएम कुमार रवि के साथ मिलकर आसरा गृह और मनीषा दयाल के दूसरे अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी, उन्होंने ये पूछने पर कि मनीषा दयाल कौन हैं, कहा कि, "ये तो पूरे पटना को पता है. आपको नहीं है! फ़िलहाल हम लोग मनीषा दयाल के बारे में और भी जानकारियां जुटा रहे हैं. सब कुछ बताएंगे."
नाम नहीं छापने की शर्त पर मनीषा के क़रीबी दोस्त ने बताया कि गया में पली-बढ़ी और वहीं से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने वाली लड़की को आज पूरा पटना जानता है. पर यह एक दिन में नहीं हुआ है. इसको समझने के लिए इन तस्वीरों को देखिए जो आज से पांच-छह साल पुरानी हैं जब मनीषा दयाल ने एनजीओ के क्षेत्र में प्रवेश किया था.
नव अस्तित्व फ़ाउंडेशन में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर काम कर रही मनीषा दयाल की इन तस्वीरों को देखकर आपको यक़ीन नहीं होगा कि ये वही मनीषा दयाल हैं जिनकी तस्वीरें पटना आसरा गृह कांड के सामने आने के बाद वायरल हुई हैं.
'दैनिक भास्कर' अख़बार के गया संस्करण की एक पुरानी रिपोर्ट में मनीषा के अच्छे कामों के बारे में लिखा गया था. उसमें लिखा है कि मूल रूप से गया के एपी कॉलोनी की रहने वाली मनीषा के पिता विजय दयाल पेट्रोल पंप चलाते हैं. बचपन में डॉक्टर बनना चाहती थीं. इसलिए इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल की तैयारी के लिए पटना का रुख किया.
ये बात 1995-96 की है. हालांकि, बाद में मेडिकल की कोचिंग में मन नहीं लगा और उन्होंने स्थानीय मॉडलिंग प्रतियोगिता में भाग लेना शुरू कर दिया. फ़िलहाल मनीषा के पास फ़ाइनेंस की एमबीए डिग्री है.
एनजीओ की नौकरी से शुरुआत
पटना में मनीषा ने एनजीओ में बतौर कर्मचारी करियर की शुरुआत की. वायरल हो रही तस्वीरें उसी दौरान की हैं जब मनीषा ने एक स्थानीय एनजीओ में नौकरी करना शुरू किया था.
बाद में आत्मा फ़ाउंडेशन की बोर्ड मेंबर, भामाशाह फ़ाउंडेशन ट्रस्ट की सदस्य, स्पर्श डी-एडिक्शन एंड रिसर्च कमेटी की सदस्य और पिंकशी फ़ाउंडेशन की प्रदेश अध्यक्ष बन गईं.
पटना आसरा गृह कांड में मनीषा के साथ जिस दूसरे शख़्स की गिरफ्तारी हुई है, वह हैं एनजीओ एएचआरएफ़ के सेक्रेटरी चिरंतन कुमार.
मनीषा की शादी एक कपड़ा कारोबारी जीवन वर्मा के साथ हुई थी. दोनों के दो बच्चे भी हैं. मगर अब मनीषा जीवन वर्मा के साथ नहीं रहती हैं. शादी के कुछ सालों बाद मनीषा ने एक एनजीओ में नौकरी करनी शुरू की.
पटना के एक सीनियर क्राइम रिपोर्टर बताते हैं, "एनजीओ में काम करने के दौरान ही उसकी पहुंच राजनीतिक गलियारों से लेकर पत्रकारों तक हो गई. धीरे-धीरे उन्होंने अपने राजनीतिक और सोशल कनेक्शन इतने मज़बूत बना लिए कि एनजीओ की नौकरी छोड़कर 2016 में अपना ख़ुद का अनुमाया ह्यूमन रिसोर्स फ़ाउंडेशन शुरू किया."
मनीषा दयाल अभी जो भी हैं उसकी शुरुआत 2016 से ही हुई थी. तब से ही उन्होंने पटना में कई बड़े आयोजनों और कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी बढ़ाई.
अनुमाया ह्यूमन रिसोर्स फ़ाउंडेशन ने ही पिछले साल 2017 में पटना में एक कॉरपोरेट क्रिकेट लीग का आयोजन कराया था जिसे बिहार का अब तक सबसे बड़ा इवेंट कहा गया था.
राजनीतिक गलियारों में शोहरत
सीसीएल यानी कॉरपोरेट क्रिकेट लीग की अपार सफलता के बाद मनीषा दयाल ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और उसके बाद सॉकर (फ़ुटबॉल) प्रीमियर लीग का अयोजन किया.
जिन नेताओं के साथ मनीषा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं उनमें से ज़्यादातर तभी की हैं जब उन्होंने कॉरपोरेट क्रिकेट लीग का आयोजन कराया था.
एक स्थानीय अखबार के एक क्राइम रिपोर्टर कहते हैं, "मनीषा का एनजीओ चल निकला और इसके ज़रिए वह पटना की पेज थ्री सोसायटी में सेलिब्रिटी बन गईं. राज्य के बड़े अधिकारियों की पत्नियों के साथ पार्टियों में शामिल होने लगीं."
लड़कियों की मौत के आरोप लगने बाद जैसे ही पुलिस ने मनीषा दयाल को गिरफ्तार किया, पटना के राजनीतिक गलियारों में उनकी चर्चा शुरू हो गई.
कारण ये है कि मनीषा की तस्वीरें कई स्थानीय नेताओं के साथ सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं.
मनीषा के राजनीतिक कनेक्शन के बारे में भी काफ़ी कुछ कहा जा रहा है. मनीषा दयाल राजद विधायक अब्दुल बारी सिद्दिक़ी की पत्नी नूतन सिन्हा की मौसेरी बहन भी हैं.
हालांकि, पूर्व मंत्री और राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दिक़ी ने मनीषा के साथ किसी भी तरह के नज़दीकी संबंध से इनकार किया है.
मीडिया के ये पूछे जाने पर कि मनीषा दयाल उनकी रिश्तेदार हैं, सिद्दिक़ी ने कहा कि ''विवाह के बाद से ही उनकी ससुराल पक्ष से निकटता नहीं है. आसरा होम की घटना शर्मनाक है और उसकी संचालिका पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.''
कनेक्शन
पटना पुलिस के एसएसपी मनु महाराज के अनुसार पुलिस की जांच में मनीषा दयाल का संबंध मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड के मुख्य अभियुक्त ब्रजेश ठाकुर से भी जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि समाज कल्याण विभाग में ब्रजेश की गहरी पैठ थी.
पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपने पति चंद्रशेखर वर्मा के साथ ब्रजेश के संबंध के सामने आने पर इस्तीफ़ा देना पड़ा था.
पटना पुलिस के एसएससपी मनु महाराज ने बताया कि पुलिस मनीषा दयाल के कनेक्शन को भी खंगाल रही है.
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