You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मुज़फ़्फ़रनगर दंगों से जुड़े मामले वापस लेने से डीएम का इनकार
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
पांच साल पहले उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर और शामली ज़िलों में सांप्रदायिक दंगे हुए थे. इन दंगों से जुड़े मुक़दमों को वापस लेने की राज्य सरकार की कोशिशों को तब धक्का लगा जब मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िलाधिकारी ने प्रशासनिक स्तर पर ऐसा करने में असमर्थता जता दी.
हालांकि इससे ये प्रक्रिया असंभव हो गई हो, ऐसा भी नहीं बल्कि डीएम ने अपनी रिपोर्ट देकर गेंद अब सरकार के पाले में डाल दी है.
बीजेपी सांसद संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक के आग्रह पर दंगों के मुक़दमे वापसी की तैयारी हो रही थी. पिछले दिनों बीजेपी के कुछ नेताओं ने खाप पंचायतों के कुछ प्रतिनिधियों के साथ संजीव बालियान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी.
इन नेताओं ने मुख्यमंत्री को उन मुक़दमों की सूची सौंपी थी और कहा था कि ये मामले रंजिश और साज़िश के तहत तत्कालीन सरकार ने दर्ज कराए थे.
राज्य सरकार ने इसी साल मार्च में मुज़फ़्फ़रनगर के डीएम से मुक़दमों की वापसी को लेकर 13 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी. डीएम ने रिपोर्ट सरकार को भेज दी है.
ज़िलाधिकारी राजीव शर्मा का कहना है, "शासन ने जो रिपोर्ट मांगी थी, वो भेज दी गई है. एसएसपी और संयुक्त निदेशक अभियोजन के साथ-साथ ज़िला शासकीय अधिवक्ता से भी रिपोर्ट ली गई थी. इन मामलों को प्रशासनिक स्तर पर वापस लिया जाना संभव नहीं है. ये जानकारी सरकार के पास भेज दी गई है."
'मुक़दमा वापस होकर रहेगा'
जानकारों के मुताबिक़ डीएम ने इस मामले को अब सीधे सरकार पर डाल दिया है और सरकार चाहे तो ऐसा कर सकती है. बताया जा रहा है कि इसी वजह से बीजेपी नेताओं को डीएम के इस फ़ैसले से कोई हैरानी नहीं है.
मामले में अभियुक्त और बीजेपी विधायक संगीत सोम का कहना था, "मुजफ्फरनगर दंगे में दर्ज फ़र्जी मुक़दमे वापस लेने की बात कही गई है. तत्कालीन सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के चलते बड़ी संख्या में बीजेपी नेताओं के ख़िलाफ़ फ़र्जी केस दर्ज कराए थे. हमने चुनाव में भी ये वादा किया था. डीएम की रिपोर्ट से कुछ नहीं होता, मुक़दमे वापस होकर रहेंगे."
वहीं बीजेपी सांसद और पूर्व मंत्री संजीव बालयान का भी यही कहना है कि डीएम की रिपोर्ट से कोई मतलब नहीं है, ये फ़ैसला सरकार को लेना है. वहीं जानकारों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ऐसा कर सकती है क्योंकि इसके ज़रिए वो राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करेगी.
सितंबर 2013 के इन दंगों में 62 लोग मारे गए थे और 500 से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए थे.
उन दिनों जहां सपा सरकार की आलोचना हुई थी कि उसने दंगा प्रभावित लोगों के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की, वहीं भाजपा नेता संजीब बालियान जैसे बीजेपी नेताओं पर मामले को हवा देने और सांप्रदायिक तनाव को भड़काने वाले विवादित भाषण देने के आरोप लगाए थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)