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डॉलर के मुक़ाबले रुपये में रिकॉर्ड गिरावट
- Author, पूजा अग्रवाल
- पदनाम, बीबीसी बिज़नेस संवाददाता, मुंबई
भारतीय रुपया डॉलर के मुक़ाबले लगातार गोता लगा रहा है. सोमवार को भारतीय रुपये के मुक़ाबले डॉलर का भाव 69.93 तक पहुंच गया. ये रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर है.
रुपये की गिरावट को कुछ हद तक तुर्की की मुद्रा लीरा पर आए संकट से जोड़कर देखा जा रहा है.
तुर्की की मुद्रा भी निचले स्तर का रिकॉर्ड बना चुकी है. इसकी वजह तुर्की की कंपनियों की ओर से लिए गए कर्ज़ को लेकर बनी चिंताएं, अमरीका के साथ बिगड़ते संबंध और तुर्की से आयात होने वाले स्टील और एल्युमीनियम पर अमरीका की ओर से बढ़ाया गया कर है.
इसका असर ये हुआ है कि निवेशक रुपये के मुक़ाबले अमरीकी डॉलर जैसी सुरक्षित मुद्रा को चुन रहे हैं और भारत जैसे देशों में प्रतिभूतियां बेच रहे हैं.
क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?
हालांकि यस बैंक से जुड़े वरिष्ठ अर्थशास्त्री विवेक कुमार कहते हैं कि इन हालात को लेकर ज़्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं है.
वो कहते हैं, " हमें नहीं लगता कि ये स्थिति बनी रहेगी लेकिन अगर ये दौर जारी भी रहता है तो भी भारतीय रिजर्व बैंक के पास मुद्रा की गतिशीलता को सामान्य करने के तरीके मौजूद हैं. रिजर्व बैंक ब्याज़ दर बढ़ा रहा है और जब जरुरत होगी तो अपने भंडार में भी कटौती कर सकता है."
गिरावट की वजह
रुपये में गिरावट की वजह बढ़ते व्यापारिक घाटे को भी बताया जा रहा है. इस साल जून में भारत का व्यापारिक घाटा पांच वर्षों में सबसे ज़्यादा यानी 16.6 अरब अमरीकी डॉलर हो गया.
इसका एक कारण ये भी है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था की स्थिति सुधर रही है और डॉलर मजबूत हो रहा है.
रुपये के कमजोर होने की दूसरी अहम वजह भारत का तेल आयात बिल भी है. भारत अपनी जरूरत का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा तेल आयात करता है. तेल आयात करने के मामले में भारत दुनिया में तीसरे नंबर पर है.
अमरीका की ओर से ईरान पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से भारत का तेल बिल तेज़ी के साथ बढ़ा है. ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेज़ी आई है. चिंता ये भी है कि प्रतिबंधों के बाद वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर भी असर होगा.
क्या होगा असर?
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि रुपया कमज़ोर होने से भारतीयों की ज़िंदगी पर कितना असर होगा?
विवेक कुमार कहते हैं, " रुपया कमज़ोर होने से महंगाई पर मामूली असर हो सकता है. आयात के लिए ज़्यादा रकम चुकानी पड़ सकती है. हालांकि, इसका एक सकारात्मक पहलू ये है कि हम जो निर्यात करते हैं वो ज़्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है. "
हालांकि रुपये की कीमत में गिरावट उन लोगों के लिए बुरी ख़बर है जो विदेश ख़ासकर अमरीका का दौरा करने वाले हैं.
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