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प्रेस रिव्यू: 'अच्छे दिन आने वाले हैं' से डर गए थे अंग्रेज़
अच्छे दिन आने वाले हैं.
यह वो नारा या है या वो पंचलाइन है जिसे बीजेपी ने साल 2014 के आम चुनाव से पहले वोटरों को रिझाने के लिए इस्तेमाल किया था.
दरअसल इसी शीर्षक की एक कविता आज़ादी से पहले लिखी गई थी.
कविता कुछ इस तरह थी-
ऐ मादरे हिंद न हो ग़मग़ीन, अच्छे दिन आने वाले हैं. आज़ादी का संदेश तुझे अब जल्द सुनाने वाले हैं. मां तुझको जिन जल्लादों ने दी है तकलीफ़ जईफी में, मायूस न हो, मगरूरों को हम अब मज़ा चखाने वाले हैं.
अंग्रेज सरकार इस कविता से इतना डर गई थी कि उसने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.
अभी यह कविता दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय की प्रतिबन्धित साहित्य प्रदर्शनी में लगी हुई और काफ़ी लोगों का ध्यान खींच रही है.
इस कविता का संकलन घासीराम शर्मा ने गीतांजलि नाम की किताब में किया था. हालांकि ये पता नहीं लग पाया है कि ये कविता लिखी किसने है.
यह ख़बरदैनिक जागरण की एंकर स्टोरी है.
सरकार बनाम न्यायपालिका
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक रिपोर्ट है जो सरकार और न्यायपालिका के बीच का मतभेद उजागर करती है.
रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने हाई कोर्ट के जजों के लिए सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम के सुझाए 50% से ज़्यादा नामों पर किसी न किसी तरह की आपत्ति जताई है.
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की तरफ़ से केंद्र सरकार को अब तक 126 जजों के नामों की सिफ़ारिश भेजी गई है, जिनमें से सरकार ने आधे से ज़्यादा नामों में कोई न कोई कमी निकाल दी.
इससे पहले सरकार ने कोलेजियम नामों की सिफ़ारिशों पर परिवारवाद का आरोप भी लगाया था.
आधार बताएगा, क्या न करें
आधार पर जारी विवादों के बीच यूनीक आइडेंटिफ़िकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) ने अब लोगों को यह बताने की योजना बनाई है कि सुरक्षित तरीके से आधार नंबर का इस्तेमाल कैसे किया जाए. यानी, कहां आधार नबंर शेयर किया जाए और कहां नहीं.
यह ख़बरनवभारत टाइम्स में है.
यूआईडीएआई के सीईओ अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि आधार के इस्तेमाल से जुड़ी शंकाओं के समाधान के लिए जल्दी ही FAQ (फ़्रीक्वेंटली आस्क्ड क्वेश्चन्स) की एक लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें क़रीब एक दर्जन सवालों के जवाब होंगे.
आधार से जुड़ा विवाद तब और तेज़ हो गया जब ट्राई के चेयरपर्सन आरएस शर्मा ने ट्विटर पर अपना आधार नंबर शेयर कर दिया और इसकी बाद उनकी निजी जानकारियां ( अकाउंट नंबर, फ़ोन नंबर और पता) सामने आ गईं.
अकेले पड़े ट्रांसजेंडर
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ही एक और रिपोर्ट है, जो बताती है कि भारत में सिर्फ 2% ट्रांसजेंडर अपने माता-पिता के साथ रहते हैं.
यह जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की ओर से कराए गए एक अध्ययन में सामने आई है.
अध्ययन से यह भी पता चला है कि तक़रीबन 57% ट्रांसजेंडर सेक्स असाइन्मेंट सर्जरी (सेक्स चेंज ऑपरेशन) कराना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से ऐसा नहीं कर सकते.
बलात्कार के नए क़ानून पर राष्ट्रपति की मुहर
अमर उजाला की ख़बर के मुताबिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल के कम उम्र की बच्चों के साथ बलात्कार पर फांसी की सज़ा वाले क़ानून पर हस्ताक्षर कर कर दिए हैं.
इसके प्रावधानों के मुताबिक दो महीने के भीतर बलात्कार मामले की जांच पूरी करना अनिवार्य होगा.
नया क़ानून 21 अप्रैल, 2018 से देश में लागू माना जाएगा.
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