You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
छत्तीसगढ़: राजद्रोह के आरोप का सामना कर रहे पत्रकार को गिरफ्तारी से मिली राहत
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जस्टिस लोया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक पर कथित रूप से आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने के आरोप में कांकेर के पत्रकार कमल शुक्ला को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अग्रिम ज़मानत दे दी है.
अदालत ने कमल शुक्ला को आवश्यक पूछताछ के दौरान संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश होने के निर्देश भी दिए हैं.
कमल शुक्ला पर इसी साल 28 अप्रैल को माओवाद प्रभावित कांकेर ज़िले में इस आपत्तिजनक कार्टून को लेकर 'राजद्रोह' का मामला दर्ज किया गया था.
कांकेर के थाना प्रभारी द्वारिका श्रीवास ने बीबीसी को बताया, "अदालत से अग्रिम ज़मानत मिलने के बाद भी उन्हें थाने से औपचारिक ज़मानत लेनी होगी. इस मामले में अभी जांच चल रही है और हम इस मामले में गवाहों के बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं."
दूसरी ओर कमल शुक्ला के वकील किशोर नारायण ने कहा, "कमल शुक्ला के ख़िलाफ़ पुलिस ने दुर्भावनावश मामला दर्ज़ किया था और जिस तरीक़े से राजद्रोह का मामला दर्ज़ किया गया था, वह अपने आप में हैरान करने वाला था."
किशोर नारायण ने कहा कि मामले में राष्ट्रपति को शिकायत की गई थी और राष्ट्रपति भवन ने इस मामले में एक पत्र भेज कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने बिना विवेचना किए मामले में एफ़आईआर दर्ज कर लिया.
विवादास्पद कार्टून
जस्टिस लोया मामले में जांच की ज़रूरत नहीं बताए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को लेकर फ़ेसबुक पर एक कार्टून पोस्ट किया गया था.
पुलिस के अनुसार इस कार्टून में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया था.
कमल शुक्ला पर आरोप है कि उन्होंने इसी कार्टून को अपनी टिप्पणी के साथ 21 अप्रैल को 'रि-पोस्ट' किया था.
इस कार्टून से आहत होकर राजस्थान के एक व्यक्ति पुनित जांगिड़ ने राष्ट्रपति समेत देश के कई लोगों को पत्र लिख कर मामले में कार्रवाई का अनुरोध किया जिसके बाद मामला कांकेर पुलिस तक पहुंचा.
कौन हैं कमल शुक्ला
फिर कांकेर थाने में कमल शुक्ला के ख़िलाफ़ 'राजद्रोह' का मामला दर्ज़ किया गया.
इस कार्टून पर विवाद होने के बाद फ़ेसबुक ने वह कार्टून हटा लिया था.
कई पत्र-पत्रिकाओं से जुड़े रहे कांकेर के पत्रकार कमल शुक्ला बस्तर में पत्रकारों पर हुए माओवादी हमलों के बाद जंगल के इलाकों में माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चला चुके हैं.
इसके अलावा बस्तर समेत छत्तीसगढ़ में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए क़ानून बनाए जाने की मांग को लेकर उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया है.
कमल शुक्ला के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलनों के बाद ही छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्रकारों से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी भी बनाई थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)