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करुणानिधि का 94 साल की उम्र में निधन
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के अध्यक्ष एम करुणानिधि का मंगलवार शाम चेन्नई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. वो 94 बरस के थे.
करुणानिधि ने आख़िरी सांस मंगलवार शाम 6.10 बजे ली. 28 जुलाई की रात तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें द कावेरी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. अस्पताल में भर्ती किए जाने से पहले करुणानिधि बुखार और इंफेक्शन से जूझ रहे थे.
करुणानिधि अक्टूबर 2016 से ही अपनी सेहत की समस्या से जूझ रहे थे. उन्हें 2016 के दिसबंर महीने में भी अस्पताल में भर्ती किया गया था. तब उन्हें गले और फेफड़े में इंफेक्शन हुआ था.
इस दुखद ख़बर से पूरे तमिलनाडु में शोक की लहर फैल गई है. अस्पताल के बाहर लोग अपने प्रिय नेता के ग़म में रो भी रहे हैं.
करुणानिधि करीब आठ दशकों तक राजनीति में सक्रिय रहे. वो पांच बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 13 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और हर बार जीत हासिल की.
करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को तमिलनाडु के नागापट्टिनम ज़िले में हुआ था. उनके पिता का नाम मुथुवेल और मां का नाम अंजुकम था.
करुणानिधि के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया है. पीएम ने कहा कि करुणानिधि भारत के सबसे सीनियर नेता थे. मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ''हमने ज़मीन से जुड़े एक नेता को खो दिया है. वो एक बेहतरीन लेखक थे और उनका पूरा जीवन ग़रीबों के कल्याण में समर्पित रहा.''
करुणानिधि बीते कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे और उनका चेन्नई स्थित आवास में ही इलाज किया जा रहा था.
शुक्रवार तड़के उन्हें चेन्नई के कावेरी अस्पताल में दाखिल कराया गया. उन्हें अस्पताल के आईसीयू में रखा गया था.
करुणानिधि बीते दो सालों से राजनीति में सक्रिय नहीं थे. उनके बेटे और राजनीतिक वारिस एमके स्टालिन ने साल 2017 में डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम संभाला था.
साल 1969 में डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुरै के निधन के बाद करुणानिधि पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे.
उन्होंने क़रीब 50 तमिल फ़िल्मों में पटकथा और संवाद लेखक के तौर पर काम किया था.
करुणानिधि ने 27 जुलाई 1969 को डीएमके अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी संभाली थी. बीते शुक्रवार को उन्होंने इस पद पर 49 साल पूरे किए और बतौर अध्यक्ष 50वें साल के कार्यकाल की शुरुआत की.
करुणानिधि ने तीन शादियां कीं. उनकी पहली पत्नी पद्मावती का कम उम्र में निधन हो गया. इस शादी से उनके एक बेटे एमके मुथु हैं.
इसके बाद करुणानिधि ने दयालु अम्माल और रजति अम्माल से शादी की.
दयालु और करुणानिधि के बच्चे एमके अलागिरि, एमके स्टालिन, एमके तमिलारासू और बेटी सेल्वी हैं.
तीसरी शादी से उनकी इकलौती बेटी कनिमोझी हैं जो राज्यसभा सांसद भी हैं.
करुणानिधि ने कई किताबें भी लिखीं. इनमें उनकी आत्मकथा नेन्जुक्कू नीति (दिल के लिए इंसाफ) भी शामिल है. वो कुछ वक़्त के लिए पार्टी के मुखपत्र के संपादक भी रहे.
करुणानिधि ने आख़िरी विधानसभा चुनाव थिरुवरूर विधानसभा सीट से जीता था. साल 2016 के चुनाव में उन्होंने पूरे राज्य में सबसे ज़्यादा अंतर से जीत दर्ज़ की थी.
सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद करुणानिधि का घर से बाहर आना लगभग बंद ही हो गया था. तीन जून, 2018 को जब को 94 साल के हुए तो वो आख़िरी बार लोगों के सामने आए थे
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