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ट्विटर पर आधार चैलेंज दे फंसे ट्राई प्रमुख आरएस शर्मा
आधार और डेटा सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है. इस बीच भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष ने अपने ट्विटर हैंडल पर आधार कार्ड नंबर से जुड़ी एक चुनौती दे डाली.
इंडियन एक्सप्रेस के पहले पन्ने पर लगी ख़बर के मुताबिक ट्राई के अध्यख आरएस शर्मा ने ट्विटर पर अपना 12 अंकों का आधार नंबर डालते हुए चुनौती दी कि कोई भी उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली कोई जानकारी निकालकर दिखाए.
इस पर एक ट्विटर यूज़र 'एलियट एल्डर्सन' ने उनका पता, आधार से जुड़ा फोन नंबर, ई-मेल आईडी, जन्मतिथि और उनकी व्हाट्सऐप की तस्वीर भी सार्वजनिक कर दी. हालांकि पता और जन्मतिथि को छुपाकर दिखाया गया.
ट्विटर यूज़र 'एलियट एल्डर्सन' ने लिखा कि वो आधार के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन आधार नंबर उजागर करना कितना ख़तरनाक है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है.
किताबों में लैंगिक भेदभाव
हिंदुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक आईबीएम रिसर्च लैब के अध्ययन में पाया गया है कि किताबों में भी लैंगिक भेदभाव पाया जाता है.
इस अध्ययन के लिए 275 ऐसी किताबों को चुना गया है जिन्हें 1969 से 2017 के बीच मैन बुकर प्राइज़ के लिए नामांकित किया गया था.
अध्ययन के मुताबिक इन किताबों के किरदार में महिला और पुरुष के बीच उनके पेशे, परिचय और कामों को लेकर भेदभाव किया गया है.
जैसे पेशे की बात करें तो महिलाएं ज़्यादातर शिक्षक, सेक्रेटरी, नर्स, वैश्या या नौकरानी के किरदार में होती हैं और पुरुष डॉक्टर, प्रोफ़ेसर, वैज्ञानिक, कवि और कारोबारी के किरदार में होते हैं.
बकरी के साथ यौन संबंधों का आरोप
टाइम्स के अंदर के पन्नों पर दी गई एक ख़बर के मुताबिक आठ लोगों पर बकरी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को लेकर मामला दर्ज किया गया है.
मामला हरियाणा के पास नूह शहर के एक गांव का है. बताया जा रहा है कि जिस दौरान बकरी के साथ ज़बरदस्ती की गई वो गर्भवती थी और इसके बाद उसकी जान चली गई. अभियुक्ति पर धारा 377 और 429 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस का मानना है कि जब यह अपराध हुआ तो अभियुक्त नशे की हालत में थे.
मॉब लिंचिंग के 21 मामलों में से दो में सज़ा
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट की मुताबिक मॉब लिंचिंग के 21 मामलों में से अब तक सिर्फ़ दो में ही सज़ा हो पाई है.
अख़बार ने अपनी इस रिपोर्ट में 12 राज्यों में मॉब लिंचिंग के प्रमुख मामलों की पड़ताल की जिसमें ये आंकड़ा सामने आया है.
ये दोनों ही मामले झारखंड के हैं. बाकी बचे मामले अभी पुलिस और कोर्ट की प्रक्रिया में उलझे हैं.
ट्यूमर को बताया प्रेग्नेंसी
अमर उजाला अख़बार के अंदर के पन्ने पर छपी एक ख़बर डॉक्टरों की लापरवाही से जुड़ी है.
चेन्नई में एक सरकारी अस्पताल ने महिला के पेट के ट्यूमर को प्रेग्नेंसी बता दिया. महिला का कहना है कि मासिक धर्म में अनियमितता के कारण जब वो जांच कराने गई तो जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वो गर्भवती हैं और नवंबर में उनका प्रसव होगा.
लेकिन जब महिला को नवंबर में प्रसव पीड़ा नहीं हुई तो वो दोबारा डॉक्टर के पास गई. तब भी उन्हें इसके बारे में नहीं बताया गया और कहा कि बच्चा ठीक है.
लेकिन जब वो दर्द होने पर तीसरी बार अस्पताल गई तो हक़ीक़त सामने आई. अब महिला ने डॉक्टरों के ख़िलाफ़ मद्रास हाईकोर्ट में अपील की है और पांच लाख रुपए मुआवज़े की मांग रखी है.
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