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आज की पाँच बड़ी ख़बरें: दिल्ली में तीन बच्चियों की भूख से मौत हुई थी या हत्या?
पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाक़े में हुई तीन बच्चियों की मौत पर अब ये सवाल उठ रहा है कि क्या भूख से उनकी मौत हुई या उनकी हत्या की गई थी?
ये शक़ इस मामले की प्रारंभिक मजिस्ट्रेट जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद खड़ा हुआ है और इस रिपोर्ट ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है.
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चियों के पिता ने उन्हें कुछ 'अज्ञात दवाई' दी थी.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि पिता का आचरण संदेह पैदा करता है और इस संबंध में और गहराई से जाँच करने की ज़रूरत है.
तीनों बहनें मंगलवार को मृत मिली थीं और उस समय से उनके पिता गायब हैं. रिपोर्ट में लिखा गया है कि लड़कियां दस्त और उल्टी से पीड़ित थीं.
ये रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गयी है. इसमें ये भी कहा गया है कि सबसे बड़ी बहन के बैंक खाते में 1805 रुपए थे.
मोदी सरकार को अल्टीमेटम
केंद्र सरकार के एक और सहयोगी दल, लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने मोदी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है.
एलजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए के गोयल को एनजीटी का अध्यक्ष बनाये जाने पर सवाल उठाए हैं.
एलजेपी अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे और सांसद चिराग पासवान ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 9 अगस्त से पहले हमारी बातें नहीं सुनी गईं तो दलित सेना भी दलितों के मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर जाएगी.
उन्होंने कहा कि दलितों के सब्र का बाँध टूट रहा है.
तेलुगू देशम पार्टी यानी टीडीपी पहले ही आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की माँग को लेकर सरकार से अलग हो चुकी है.
इसके अलावा शिवसेना के सुर भी कई बार मोदी सरकार के विरोध में सुनाई देते रहे हैं. हाल ही में उसने अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का साथ भी छोड़ दिया था.
पासवान ने कहा कि 9 अगस्त से पहले सरकार एससी-एसटी कानून को लेकर अध्यादेश लाये या संसद के इसी सत्र में एससी-एसटी बिल पर संशोधन लाए.
पासवान ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ए के गोयल दलित विरोधी हैं. जस्टिस ए के गोयल ने ही एससी-एसटी कानून पर फैसला दिया था.
पासवान ने कहा कि सरकार ने रिटायर्ड होने के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का चेयरमैन बनाकर उन्हें पुरस्कृत किया है. हमारी माँग है कि गोयल को तुरंत हटाया जाए.
पासवान ने कहा कि मुझे उम्मीद है सरकार इस पर जल्दी ही कोई फ़ैसला लेगी.
सरकार ने एससी-एसटी एक्ट को लेकर जो मंत्रियों का समूह बनाया है उसमें रामविलास पासवान भी हैं. रामविलास पासवान ने भी कहा है कि एससी-एसटी अध्यादेश लाया जाना चाहिए.
मराठा आरक्षण विवाद: एक और प्रदर्शनकारी की मौत
मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा की वजह से एक और प्रदर्शनकारी की मौत हो गई है.
महाराष्ट्र के नांदेड़ ज़िले में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शन के दौरान ये शख़्स घायल हो गया था जिसने शुक्रवार को दम तोड़ दिया.
इस मौत के बाद तनाव बढ़ता देख मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है.
नौकरी समेत विभिन्न माँगों को लेकर चल रहा मराठा समाज का प्रदर्शन शुक्रवार को भी महाराष्ट्र के कई शहरों में नज़र आया.
इस आंदोलन में अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है. इस मुद्दे पर मनसे चीफ़ राज ठाकरे ने कहा है कि आरक्षण जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए.
देश में ही रहेगा संवेदनशील डेटा
सूचनाओं की गोपनीयता के संरक्षण के संबंध में एक उच्च स्तरीय समिति ने शुक्रवार को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी.
समिति ने निजी जानकारियों की सुरक्षा, सूचनाओं के प्रसंस्करण का दायित्व, लोगों के अधिकार और उल्लंघन पर जुर्माना आदि के बारे में सुझाव दिए हैं.
जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाली समिति ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री रविशंकर प्रसाद को रिपोर्ट सौंपी.
प्रसाद ने कहा कि निजी जानकारी के संरक्षण से संबंधित कानून के विधेयक के मुताबिक़ आपका संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा देश में ही रहेगा.
जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण समिति ने सिफ़ारिश की है कि जैविक पहचान, यौन रुझान और वित्तीय जैसे संवेदनशील डेटा को देश में ही मौजूद सर्वर में प्रोसेस किया जाना चाहिए और उनका देश में ही भंडारण होना चाहिए.
समिति ने कहा है कि निजी जानकारी के लिए जो भी क़ानून बने, उसमें इसका साफ प्रावधान होना चाहिए.
हालांकि समिति के अनुसार जो डेटा संवेदनशील नहीं हैं, उसे कुछ शर्तों के साथ देश के बाहर ले जाने की अनुमति दी जा सकती है.
केंद्र सरकार पर्याप्त संरक्षण के साथ कुछ सीमा तक इस तरह की जानकारी बाहर ले जाने की इजाज़त दे सकती है.
अमरीकी कंपनी के चीफ़ के ख़िलाफ़ यौन दुर्व्यवहार का मामला
अमरीकी के एक बड़ें टीवी नेटवर्क ने अपने ही चीफ़ के ख़िलाफ़ यौन दुर्व्यवहार के मामलों में जाँच शुरू कर दी है.
ये मामला अमरीकी ब्रॉडकास्टर सीबीएस के चेयरमैन और चीफ़ एग्जिक्यूटिव लेज़ली मूनवस के ख़िलाफ़ है. कंपनी के अनुसार, ये दशकों पुराना मामला है.
सीबीएस के निदेशकों ने इस बात की जानकारी दी कि वो लेज़ली मूनवस के ख़िलाफ़ लगे आरोपों की जाँच के बाद उचित कार्रवाई करेंगे.
लेज़ली मूनवस पर ये आरोप 6 महिलाओं ने लगाए थे जो 'द न्यूयॉर्क मैगज़ीन' में छपे एक लेख के ज़रिए सामने आए थे.
इस मामले की जाँच शुरू होने के बाद कंपनी के शेयर 6 फ़ीसदी गिर गये.
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