You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
क्या नरेंद्र मोदी करन थापर से पुराना 'बदला' ले रहे हैं?
जाने-माने पत्रकार करन थापर को 2007 में दिया गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू ख़ासा लोकप्रिय है. मोदी उस इंटरव्यू को बीच में ही छोड़कर चले गए थे.
बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल ने करन थापर से ख़ास बातचीत की और उस दिन की पूरी कहानी जानी.
करन थापर ने बताया कि कैसे उस समय नरेंद्र मोदी उनके एक सवाल से परेशान होकर इंटरव्यू बीच में छोड़कर चले गए थे और अब वो अपने मंत्रियों और पार्टी नेताओं को भी उन्हें इंटरव्यू न देने के लिए कहते हैं.
हालांकि करन थापर कहते हैं कि नरेंद्र मोदी उनके सवालों से कभी नाराज़ नहीं हुए, बल्कि उन्होंने संयम खो दिया था.
उन्होंने बताया कि तीन मिनट का इंटरव्यू हुआ था जिसके बाद वो बीच में ही छोड़कर चले गए थे.
मोदी को बताया 'नीरो'
करन थापर ने कहा, "अगर मुझे ठीक से याद है तो मेरा पहला सवाल था कि आप मुख्यमंत्री के रूप में दूसरे चुनाव से छह हफ़्ते दूर खड़े हैं. इंडिया टुडे और राजीव गांधी फ़ाउंडेशन ने आपको सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री बताया है और दूसरी तरफ़ हज़ारों मुसलमान आपको हत्यारे की तरह देखते हैं. क्या आपके सामने इमेज प्रॉब्लम है?"
इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उसके बारे में ऐसी सोच कम ही लोगों की है और ज़्यादातर लोग ऐसा नहीं सोचते.
लेकिन इस पर करन थापर ने कहा था कि ऐसा मानने वाले कम तो नहीं हैं.
उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ने आपको आधुनिक दौर का ऐसा नीरो बताया है जिसने मासूम बच्चों और बेगुनाह औरतों के क़त्ल के वक़्त मुंह दूसरी ओर मोड़ लिया था."
करन थापर ने इस बात की ओर भी नरेंद्र मोदी का ध्यान दिलाया था कि कुल 4500 मामलों में से क़रीब 2600 गुजरात से बाहर भेज दिए गए.
"सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की और भी कई टिप्पणी की थी. ये सभी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि ऐसे कम लोग नहीं हैं बल्कि कई हैं."
दोबारा इंटरव्यू के लिए राज़ी नहीं हुए मोदी
तब नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो लोग ऐसा कहते हैं, वो खुश रहें. इसके बाद उन्होंने करन थापर से पानी मांगा था.
"लेकिन पानी तो उनके बगल में ही रखा था. तब मुझे एहसास हुआ कि पानी तो बहाना है और वो इंटरव्यू ख़त्म करना चाहते हैं. उन्होंने माइक बाहर निकाल दिया और इंटरव्यू ख़त्म हो गया."
करन थापर का कहना है कि उन्होंने इंटरव्यू दोबारा शुरू कराने के लिए नरेंद्र मोदी को खूब मनाया, लेकिन वो इंटरव्यू के लिए राज़ी नहीं हुए.
वो कहते हैं, "नरेंद्र मोदी की मेज़बानी काफ़ी अच्छी थी. वो मुझे चाय, मिठाई और ढोकले की पेशकश करते रहे, लेकिन इंटव्यू के लिए नहीं माने."
एक घंटे की कोशिश के बाद करन थापर वहां से रवाना हो गए.
30 बार मोदी को दिखाया गया वीडियो?
करन थापर ने राजनयिक, लेखक और अब राजनेता पवन वर्मा का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने उन्हें बताया है कि 2014 चुनावों के लिए तैयार करने के लिए उन्होंने नरेंद्र मोदी को वो सीन कम से कम 30 बार दिखाया था.
लेकिन पवन वर्मा ने इस बात से इनकार किया है. तो क्या सच है?
इसपर करन थापर ने दावा किया कि पवन वर्मा ने उन्हें ये बात कही थी.
उन्होंने कहा, "मैं अभी याद करके कह रहा हूं. उनकी निगाह उस तस्वीर पर पड़ी जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी माइक निकालकर इंटरव्यू बीच में छोड़कर जा रहे हैं. पवन ने पूछा कि ये वही पल है, जब वो उठकर चले गए थे. मैंने कहा, हां."
"इसके बाद पवन ने मुझे कहा कि प्रशांत किशोर ने मुझे बताया है कि उन्होंने तीन मिनट की ये क्लिप नरेंद्र मोदी को 20-30 बार दिखाई है ताकि उन्हें ये सिखाया जा सके कि अजीब-मुश्किल सवालों और हालात का सामना कैसे किया जाए. उन्होंने इसे सबक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन नरेंद्र मोदी ने प्रशांत से कहा कि वो इसे कभी नहीं भूल सकते और वो बदला ज़रूर लेंगे."
तो क्या वो बदला ये था कि साल 2016 के बाद भाजपा के किसी नेता ने करन थापर से बातचीत नहीं की है?
इसपर करन थापर ने कहा कि उनके बहिष्कार की शुरुआत 2016 के आठवें-नौवें महीने में शुरू हुई.
उन्होंने कहा, "मैंने आखिरी बार जनवरी 2017 में भाजपा नेता राम माधव का इंरव्यू लिया था. भाजपा के कई मंत्रियों और प्रवक्ता ने मुझे बताया. इस बात का ज़िक्र मेरी किताब में भी है कि उन्हें ये कहा गया था कि मुझे कोई इंटरव्यू नहीं देना है."
"अमित शाह, नृपेंद्र मिश्र, अजीत डोभाल समेत मेरी भाजपा के कई दिग्गजों से मुलाक़ात हुई, लेकिन उन सभी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि मैं पूर्वाग्रह से ग्रस्त हूं और मुझसे मिलने का कोई फ़ायदा नहीं है."
पूर्वाग्रह के आरोपों पर क्या सोचते हैं करन थापर?
करन थापर इन आरोपों से इनकार करते हैं. उनका कहना है कि वो किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री के लिए किसी पत्रकार का बहिष्कार करना सही नहीं है.
करन थापर की किताब 'डेविल्स एडवोकेट: द अनटोल्ड स्टोरी' हाल ही में प्रकाशित हुई है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)