मोदी राज में 'जीने का अधिकार' गायों के लिए, इंसानों के लिए नहीं: ओवैसी

    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (आईएमआईएम) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जो 'जीवन का अधिकार' दिया गया है वो किसी जानवर के लिए नहीं है. लेकिन नरेंद्र मोदी की सरकार में ऐसा लगता है कि ये अधिकार गायों के लिए इंसानों के लिए नहीं.

ओवैसी ने बीबीसी हिन्दी के फ़ेसबुक लाइव में मॉब लिंचिंग की घटनाओं, राजनीति और तीन तलाक़ जैसे मुद्दों पर बात की.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मॉब लिंचिंग की मामलों में सज़ा देने से संबंधित क़ानून बनाए. क्या मौजूदा क़ानून के तहत देश में ऐसे मामलों में सज़ा नहीं दी जा सकती?

इस मुद्दे पर ओवैसी ने कहा कि कोर्ट ने जो कहा है वो ज़रूरी है क्योंकि भारतीय दंड संहिता में मॉब लिचिंग की परिभाषा नहीं दी गई है. लेकिन इसके बावजूद क़ानून में धारा 302, 304 और 153 है जिसके तहत ऐसे मामलों से निपटा जा सकता है.

उन्होंने कहा, "एक नज़र देखें तो पता चलता है कि उन्हीं राज्यों में अधिक मामले सामने आ रहे हैं जहां भाजपा की सरकारें हैं. और सरकार अगर इसके विरोध में कदम उठाना चाहती है तो ये संभव है लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है."

इसी सप्ताह राजस्थान के अलवर में भीड़ ने रकबर की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. कई और राज्यों से भी इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं.

असदुद्दीन ओवैसी ने और क्या क्या कहा पढ़िए-

ओवैसी ने कहा कि मॉब लिंचिंग के मामलों में जिनको सज़ा मिली है उनका भाजपा नेता समर्थन दे रहे हैं, उनका सम्मान कर रहे हैं. उनकी मदद की जा रही है और उन्हें कहा जा रहा है मारिए. ऐसे में उनके ख़िलाफ़ काम किया जाएगा ऐसा नहीं लगता.

दलितों, मुसलमानों के प्रति नफरत

उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग दलितों, मुसलमानों के प्रति नफ़रत ही दिखाती है. सत्ताधारी वर्ग दिखाना चाहता है कि पुलिस, सरकार और ताकत उनके साथ है और वो जो चाहे कर सकते हैं. ना सिर्फ लोगों को मारा जा रहा है बल्कि इसके वीडियो भी निकाले जा रहे हैं.

ओवैसी ने कहा कि जुनैद को ट्रेन के डिब्बे में मारा गया, लेकिन पुलिस एक प्रत्यक्षदर्शी तक सामने नहीं ला सकी. पहलू ख़ान के मामले में छह लोगों के सामने आए, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ.

उनके मुताबिक़ मॉब लिंचिंग के 86 फीसदी 2014 के बाद से सामने आए हैं, यानी मोदी के प्रधानमंत्री के सत्ता में आने के बाद हुए हैं और इनमें से 96 मामलों में मुसलमान व्यक्तियों की हत्या हुई है.

भाजपा मंदिर और हिंदू की राजनीति करती है और आप मुसलमानों की करते हैं, तो फिर आप दोनों में क्या फर्क़ है?

इस मुद्दे पर ओवैसी कहते हैं, "ऐसा कतई नहीं है. मेरी कोशिश है कि संविधान में मुसलमानों को जो मौलिक अधिकार दिए गए हैं उन्हें हासिल करना ही हमारी कोशिश है. निदा ख़ान के मामले में फतवे की कानूनी अहमियत कुछ नहीं है, और जब संविधान सामने है और कोर्ट ने कह दिया है कि तीन तलाक रद्द कर दिया गया है तो फिर फतवा देने वाले होते कौन हैं."

तीन तलाक के मामले में कोर्ट तक जाने वाली निदा ख़ान को इस्लाम से निकाल दिया गया था.

आईएमआईएम का दलितों के लिए क्या एजेंडा है?

इस पर ओवैसी कहते हैं, "पार्टी किसी में कोई भेदभाव नहीं करती. औरंगाबाद, हैदराबाद और महाराष्ट्र में पार्टी के कॉर्पोरेटर हैं. एससीएसटी एक्ट को खोखला कर दिया गया लेकिन सरकार चुपचाप देखती रही. दलितों से सरकार को मोहब्बत है तो वो ऑर्डिनेंस जारी नहीं करताी. मुसलमानों की स्थिति तो दलितों से भी नीचे है."

उन्होंने कहा कि मुसलमानों का मसला इफ्तार पार्टी या तीन तलाक का नहीं है. उनके सामने समस्याएं नौकरी, रोज़गार और पहचान का मुद्दा है. सबसे बड़ा तो ये कि जो संवैधानिक अधिकार हमें नागरिक के रूप में मिले हैं उनके लिए भी हमारी लड़ाई है.

ओवैसी ने कहा कि ना तो कांग्रेस मुसलमानों की बात करती है ना ही भाजपा करती है. दोनों ही जनसंख्या के इस 13 फीसदी हिस्से को इस्तेमाल करना चाहती है.

अविश्वास प्रस्ताव पर हुई बहस में कौन बेहतर बोला- नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी?

इस पर ओवैसी ने कहा, "दोनों ने अपना-अपना भाषण दिया लेकिन दोनों ने ही बोरिंग बोला. ये वही पुराना स्क्रिप्ट था जबकि दोनों उस वक्त के दौरान कई और बातें कर सकते थे. अविश्वास प्रस्ताव के दोरान राहुल गांधी ने भाजपा से कहा कि आपने मुझे हिंदूवाद सिखाया, आपने मुझे शिवभक्त बनाया. मुझे ये बात अजीब लगी. आप कैसा हिंदूवाद सीख रहे हैं. भाजपा हिंदुत्व की पार्टी है और आप खुद को हिंदूवादी कहते हैं. हिंदुत्व और हिंदूवाद अलग-अलग है. अगर आप उनसे हिंदूवाद सीखने की बात करते हैं तो मेरे कान खड़े हो जाते हैं."

चुनावों में मोदी को चुनौती देंगे?

ओवैसी ने कांग्रेस की ओलोचना करते हुए कहा कि आज कांग्रेस कमज़ोर है, ना उनके पास सोच है ना ही नेतृत्व है. ऐसे में ये नहीं कहा जा सकता है वो आने वाले वक्त में नेतृत्व लेगी.

लेकिन राज्य स्तर की पार्टियां ही मोदी के सामने बड़ी चुनौती पेश करने वाले हैं क्योंकि इन पार्टियों के पास नेतृत्व भी है और वो ताक़तवर भी हैं.

आईएमआईएम किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी. लेकिन आगे क्या होगा अभी ये कहना मुश्किल है.

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