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ब्लॉग: ‘सेक्रेड गेम्स’ में वो पति-पत्नी का लव सीन था, ‘मैं शर्मिंदा नहीं हूं’
- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
एक औरत ने अपने ब्लाउज़ के बटन खोले और उसकी पूरी छाती दिख गई. फिर उसने एक मर्द के साथ सेक्स किया और खुली छाती के साथ उसके बगल में लेट गई.
कुल 30-40 सेकेंड का ये वीडियो व्हाट्सऐप के ज़रिए वायरल हो गया और उस औरत को पॉर्न स्टार बताया जाने लगा.
यूट्यूब पर उस सीन के अलावा उसके 10 सेकेंड के छोटे-छोटे क्लिप अपलोड हुए जो हज़ारों बार देखे जा चुके हैं.
यहां तक कि ये वीडियो घूमकर उस अदाकारा के जाननेवाले ने उन्हीं को भेज दिया! ये बताने के लिए कि ये सरेआम बांटा जा रहा है.
ये पॉर्न वीडियो नहीं है. ये सीन, 'नेटफ़्लिक्स' पर रिलीज़ हुई सिरीज़ 'सेक्रेड गेम्स' में एक बहुत ख़ास मोड़ पर आता है.
पति की भूमिका में नवाज़ुद्दीन सिद्दिक़ी और पत्नी की भूमिका में राजश्री देशपांडे के बीच अब तक रिश्ते असहज से रहे हैं. नवाज़ुद्दीन का किरदार बिस्तर में लगभग 'हिंसक' रूप लेता रहा है.
पर हालात बदलते हैं और दोनों में प्रेम पनपता है. ये सीन वही बदलाव दिखाता है. इसमें उनका एक दूसरे के क़रीब आना एक अलग क़शिश और ख़िंचाव के साथ है.
पर सीन में से कहानी निकाल लीजिए तो बस वही रह जाएगा. खुली हुई छाती और सेक्स.
'मुझे शर्म नहीं आई'
राजश्री के फ़ोन में, कहानी के संदर्भ के बिना, उन्हीं का ये कुछ सेकेंड का वीडियो जब उन्हीं के जाननेवाले ने भेजा तो बहुत बुरा लगा.
राजश्री कहती हैं, "मुझे बुरा लगा. मुझे शर्म नहीं आई. बुरा लगा. मैं क्यों शर्मिंदा होऊं?"
उन्हें अपने किरदार पर और कहानी में उस किरदार के इस सीन की ज़रूरत पर पूरा यक़ीन था.
यक़ीन था कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया. औरत को चीज़ की तरह नहीं दिखाया.
उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर कैमरा 'ज़ूम' नहीं हुआ.
दोहरे मतलब वाले भद्दे शब्दों के गाने का इस्तेमाल नहीं किया.
महज़ सिहरन पैदा करने के लिए औरत का असभ्य चित्रण नहीं किया.
बस सीधे-सादे तरीके से पति-पत्नी के प्रेम प्रसंग को दिखाया.
राजश्री का कहना है, "मैं जानती हूं की शरीर दिखाने की आज़ादी को ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए. मेरी नीयत ठीक थी, मैंने कुछ ग़लत नहीं किया."
पर राजश्री को बुरा लगा. सिर्फ़ इसलिए नहीं कि ये वीडियो पॉर्न की तरह देखा जा रहा है, उसके लिए तो वो कुछ हद तक तैयार थीं पर इसलिए भी कि उसे बांटा जा रहा है.
वायरल तो बहुत कुछ हो जाता है. किसी का आंख मारना भी वायरल हो सकता है.
पर ये वीडियो अलग है. 30-40 सेकेंड के सीन के एक हिस्से को 'पॉज़' कर उसके छोटे वीडियो और तस्वीर बनाकर बांटी जा रही है.
देखनेवाले का क्या
राजश्री कहती हैं, "अगर ऐसा कुछ आपके पास आए तो उसके साथ क्या करना है, ये सोचना ज़रूरी है. तकनीक एक हथियार है, उसका इस्तेमाल मारने के लिए भी किया जा सकता है और बचाने के लिए भी. "
मसला दरअसल यही है. ये बांटना.
फ़िल्मों और टेलीविज़न सीरियल में औरत के शरीर को ख़ुले तरीके से दिखाया जाता रहा है.
कभी ये कहानी के लिए ज़रूरी होता है और कई बार नहीं भी. पर हमेशा, ये देखा बहुत जाता है.
पॉर्न की तरह. संदर्भ के बिना. इंटरनेट पर छोटे-छोटे क्लिप में काटकर.
विडम्बना ये है कि सवाल देखनेवाले से नहीं होते हैं.
पर ये देखनेवाले, रस लेनेवाले, आनंद महसूस करनेवाले उस औरत को पॉर्न स्टार मानने और कहने में हिचकते नहीं हैं.
'ऐंग्री इंडियन गॉडेसिस' और 'एस दुर्गा' में अभिनय कर चुकीं राजश्री देशपांडे, बड़े पर्दे के अपने इन किरदारों की ही तरह, असल ज़िंदगी में भी चुप रहनेवालों में से नहीं हैं.
राजश्री ने कहा, "बोलना ज़रूरी है, तभी बदलाव की उम्मीद रहती है, पांच लोग भी अपनी सोच बदलें तो ये बड़ी उप्लब्धि होगी."
वो बोलीं, तो मैं भी लिख रही हूं. आप पढ़ रहे हैं. और शायद व्हॉट्सऐप पर इन कटे वीडियो के साथ औरतों को शर्मिंदा करनेवाले थोड़ा ठहर कर सोच भी लें.
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