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हिमा दास: धान के खेतों से निकली भारत की नई 'उड़नपरी'
- Author, नवीन नेगी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''वह भले ही शुरुआत में पीछे चल रही थी, लेकिन मुझे तो पता चल गया था कि आज वह गोल्ड जीतने वाली है.''
गर्व, खुशी और उससे भी ज़्यादा जीत के विश्वास को समेटे ये शब्द हिमा दास के कोच निपुण दास के हैं, जो उनसे हज़ारों मील दूर गुवाहाटी में हिमा की जीत का जश्न मना रहे हैं.
किसी अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स ट्रैक पर भारतीय एथलीट के हाथों में तिरंगा और चेहरे पर विजयी मुस्कान, ऊपर दिख रही इस तस्वीर का इंतज़ार लंबे वक़्त से हर हिंदुस्तानी कर रहा था.
इंतज़ार की यह घड़ी गुरुवार देर रात उस समय खत्म हुई जब फ़िनलैंड के टैम्पेयर शहर में 18 साल की हिमा दास ने इतिहास रचते हुए आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में पहला स्थान प्राप्त किया.
हिमा विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं.
असम की रहने वाली हिमा की इस अंतरराष्ट्रीय कामयाबी के बाद फ़िनलैंड से लेकर पूरे हिंदुस्तान तक चर्चा है.
गुवाहाटी में मौजूद हिमा के कोच निपुण दास की आवाज़ में गर्व और खुशी के एहसास एक साथ महसूस किए जा सकते हैं.
वे हंसते हुए कहते हैं कि मुझे यक़ीन था कि हिमा फ़िनलैंड में कुछ बड़ा करके आएगी, लेकिन वह गोल्ड जीत लेगी इसका अंदाज़ा रेस शुरू होने से पहले तक नहीं था.
हिमा ने 400 मीटर की दौड़ स्पर्धा में 51.46 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता, उनके पीछे रोमानिया की एंड्रिया मिक्लोस 52.07 सेकेंड के साथ दूसरे और अमरीका की टेलर मैनसन 52.28 सेकेंड के साथ तीसरे स्थान पर रहीं.
अंत में रफ़्तार पकड़ने की तकनीक
शुरुआती 35 सेकेंड तक हिमा शीर्ष तीन में भी नहीं थीं, हिंदुस्तान में आज तमाम लोग हिमा की चर्चा कर रहे हैं लेकिन शायद ही किसी ने उन्हें फ़िनलैंड के ट्रैक पर लाइव दौड़ते हुए देखा होगा.
लेकिन एक शख्स थे जिन्हें हिमा की इस रेस का बेसब्री से इंतज़ार था. वे थे उनके कोच निपुण दास. हिमा के यूं अंतिम वक़्त में रफ़्तार पकड़ने पर निपुण दास कहते हैं, ''रेस में जब आखिरी 100 मीटर तक हिमा चौथे स्थान पर थी तो मुझे यक़ीन हो गया था कि वह इस बार गोल्ड ले आएगी, मैं उसकी तकनीक को जानता हूं वह शुरुआत में थोड़ी धीमी रहती है और अपनी पूरी ऊर्जा अंतिम 100 मीटर में लगा देती है, यही उसकी खासियत है.''
निपुण कहते हैं, ''हिमा को ट्रैक के कर्व (मोड़) पर थोड़ी समस्या होती है, यह बहुत हल्की सी दिक्कत है, यही वजह है कि शुरुआत में वह हमेशा पीछे ही रहती है. लेकिन जब ट्रैक सीधा हो जाता है तो वह तेज़ी से रिकवर करते हुए सबसे आगे निकल जाती है.''
पहले फ़ुटबॉल की शौकीन थीं हिमा
निपुण दास के पास हिमा साल 2017 के जनवरी महीने में आईं, असम के नौगांव ज़िले की रहने वाली हिमा राजधानी गुवाहाटी में एक कैम्प में हिस्सा लेने आई थीं. जब निपुण की नज़र उन पर पड़ी.
निपुण इस मुलाक़ात के बारे में बताते हैं, ''वह जनवरी का महीना था हिमा एक स्थानीय कैम्प में हिस्सा लेने राजधानी गुवाहाटी आई थी, वह जिस तरह से ट्रैक पर दौड़ रही थी, मुझे लगा कि इस लड़की में आगे तक जाने की काबिलियत है.''
इसके बाद निपुण हिमा के गांव में उनके माता पिता से मिलने गए और उनसे कहा कि वे हिमा को बेहतर कोचिंग के लिए गुवाहाटी भेज दें.
हिमा के माता-पिता गुवाहाटी में उनके रहने का खर्च नहीं उठा सकते थे. लेकिन बेटी को आगे बढ़ते हुए भी देखना चाहते थे. इस मुश्किल स्थिति में निपुण ने ही एक रास्ता निकाला.
वे बताते हैं, ''मैंने हिमा के माता-पिता से बातचीत की और उन्हें कहा कि हिमा के गुवाहाटी में रहने का खर्च मैं खुद उठाऊंगा, बस आप उसे बाहर आने की मंजूरी दें. इसके बाद वे हिमा को बाहर भेजने के लिए तैयार हो गए.''
शुरुआत में हिमा को फ़ुटबॉल खेलने का शौक था, वे अपने गांव या ज़िले के आस पास छोटे-मोटे फ़ुटबॉल मैच खेलकर 100-200 रुपये जीत लेती थी.
फ़ुटबॉल में खूब दौड़ना पड़ता था, इसी वजह से हिमा का स्टैमिना अच्छा बनता रहा, जिस वजह से वह ट्रैक पर भी बेहतर करने में कामयाब रहीं.
निपुण कहते हैं कि जब उन्होंने हिमा को फ़ुटबॉल से एथलेटिक्स में आने के लिए तैयार किया तो शुरुआत में 200 मीटर की तैयारी करवाई, लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वे 400 मीटर में अधिक कामयाब रहेंगी.
खेत में काम करते हैं पिता
हिमा एक संयुक्त परिवार से हैं. उनके घर में कुल 16 सदस्य हैं. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि बस अपने खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती है.
निपुण इस बारे में बताते हैं, ''हिमा के घर की आर्थिक स्थिति बहुत ज़्यादा अच्छी भी नहीं है, उनके पिता किसान हैं, खेती-बाड़ी करते हैं, जबकि मां घर संभालती हैं.''
हिमा जिस जगह से आती हैं, वहां अक्सर बाढ़ भी आती रहती है, इस वजह से भी परिवार को कई बार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
निपुण बताते हैं,''नौगांव में अक्सर बाढ़ के हालात बन जाते हैं, वह जगह बहुत अधिक विकसित नहीं है, जब हिमा गांव में रहती थी तो बाढ़ की वजह से कई-कई दिन तक प्रैक्टिस नहीं कर पाती थी, क्योंकि जिस खेत या मैदान में वह दौड़ की तैयारी करती, बाढ़ में वह पानी से लबालब हो जाता. यही वजह थी कि मैं उसे गुवाहाटी ले आया.''
प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति की बधाई
हिमा को मिली इस कामयाबी के बाद पूरा देश उन्हें बधाइयां दे रहा है. प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक ने उन्हें इस ऐतिहासिक कामयाबी के लिए ट्वीट कर बधाई दी है.
हिमा ने भी सभी का धन्यवाद दिया है कि और कहा है कि वे देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर बेहद खुश हैं, वे आगे भी और अधिक मेडल जीतने की कोशिश करेंगी.
अप्रैल में गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास छठे स्थान पर रही थीं. इस स्पर्धा में उन्होंने 51.32 सेकेंड में दौड़ पूरी की थी.
इसी राष्ट्रमंडल खेलों की 4X400 मीटर स्पर्धा में भी वे शामिल थीं, तब भारतीय टीम सातवें स्थान पर रही थी.
इसके अलावा हाल ही में गुवाहाटी में हुई अंतरराज्यीय चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.
हिमा की इस कामयाबी के बाद उनके कोच निपुण दास कहते हैं, ''अभी तक सिर्फ कुछ लोगों की नज़रें ही हिमा पर रहती थीं अब तो पूरा देश उन्हें देख रहा है, मैं उनके गुवाहाटी आने का इंतज़ार कर रहा हूं, उन्हें पोर्क बहुत पसंद है, वह भी उनके लिए रखा है.''
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