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फ़ैज़ की नज़्म 'हम देखेंगे' पर फ़िल्म इंस्टीट्यूट में तनाव
- Author, मिर्ज़ा एबी बेग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म 'हम देखेंगे' पुणे के राष्ट्रीय फ़िल्म और टेलीविज़न इंस्टीट्यूट (एफ़टीआईआई) में विवाद की वजह बन गई है.
ख़बरों के मुताबिक अधिकारियों ने एफ़टीआईआई कैंपस के होस्टल से दो छात्रों को बाहर निकालने का नोटिस जारी किया था.
इन छात्रों ने दीवार पर 'हम देखेंगे' लिखा था जिसे संस्थान के प्रशासन ने धमकी समझ लिया.
प्रशासन ने इसे 'तोड़फोड़' और 'दीवार को ख़राब करना' क़रार दिया है.
एफ़टीआईआई स्टूडेंट यूनियन के महासचिव रोहित कुमार ने बीबीसी को बताया, "कल पूरे दिन के धरने और बातचीत के बाद प्रशासन ने नोटिस वापस लेते हुए कहा है कि दोबारा ऐसा हुआ तो बख़्शा नहीं जाएगा."
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने पहले कहा कि माफ़ीनामा लिखने और दीवार पर बनाई गई ग्रैफ़िटी पर सफ़ेदी पोतने के बाद ही नोटिस वापस लिया जाएगा.
छात्रों का कहना है कि उन्होंने कोई ग़लत काम नहीं किया है और इस तरह का नोटिस उनकी अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाने की कोशिश है.
छात्रों का पक्ष
स्थानीय अख़बार 'पुणे मिरर' की रिपोर्ट के मुताबिक जिन दो छात्रों को होस्टल खाली करने का नोटिस दिया गया है उनमें से एक केरल से हैं जबकि दूसरे पश्चिम बंगाल से हैं.
इन छात्रों में से एक ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने फ़ैज़ की नज़्म की एक लाइन लिखी थी. उस छात्र ने कहा, "इस नज़्म ने मुझे कई स्तर पर प्रभावित किया है और इसे लिखने का मक़सद किसी तरह का विरोध नहीं है, लेकिन प्रशासन ने इसका ग़लत मतलब निकाला और समझा कि हम लोगों ने कैंटीन के नवीकरण के ख़िलाफ़ काम किया है."
एफ़टीआईआई के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "दो छात्रों ने धमकी भरे नारों के साथ एफ़टीआईआई की नई-नई बनी कैंटीन की दीवार और दरवाज़े पर ग्रैफ़िटी बनाई है. ये काम रात के वक़्त चोरी-छिपे किया गया है. जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोका तो वो रुके नहीं. ये बात स्वीकार्य नहीं है."
अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल?
रोहित कुमार ने कहा कि ये सिर्फ़ एफ़टीआईआई की बात नहीं है बल्कि देशभर के शिक्षण संस्थानों में जहां कहीं भी अभिव्यक्ति की आज़ादी का माहौल है, उसे कम किया जा रहा है और इसे नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है.
रोहित सवाल करते हैं, "एक नज़्म की एक लाइन एक आंख और एक मछली से किसी को क्या समस्या हो सकती है. कोई ग़लत बात नहीं लिखी गई है, किसी को गाली नहीं दी गई है फिर भी इस तरह के नोटिस का आना ये साबित करता है कि छात्रों को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है."
रोहित कुमार का कहना है कि जब से एफ़टीआईआई में उनका दाख़िला हुआ है तब से छात्रों की सक्रियता को रोकने की कोशिशें बढ़ती जा रही हैं.
उनके मुताबिक बीते तीन-चार सालों में देश का माहौल बदला है और इस तरह की चीज़ें दूसरे कैंपसों में भी देखने में आ रही हैं.
इससे पहले फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की बेटी को भी भारत में हुए एक कार्यक्रम में बोलने नहीं दिया गया था.
इसी गुरुवार को दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने 9 फ़रवरी 2016 को हुई एक घटना में शामिल रहने के आरोप में तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और शोधछात्र उमर ख़ालिद को यूनीवर्सिटी प्रशासन की ओर से दी गई सज़ा को बरक़रार रखा है.
यूनीवर्सिटी की एक जांच समिति ने उमर ख़ालिद को यूनिवर्सिटी से निकालने और कन्हैया कुमार पर लगाए गए दस हज़ार रुपए के जुर्माने को बरक़रार रखा है.
उमर ख़ालिद के अलावा अनिर्बान भट्टाचार्य और मुजीब गट्टो को निष्कासित कर दिया गया है.
हाल ही में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर काफ़ी विवाद हुआ था और पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्च तक किया था.
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