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महाराष्ट्र में बच्चा चोरी के शक़ में पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या
- Author, प्रवीण ठाकरे, संजय तिवारी
- पदनाम, टीम बीबीसी
महाराष्ट्र पुलिस के मुताबिक़ धुले ज़िले के आदिवासी इलाक़े के एक गांव में बच्चा चोरी करने के शक़ में पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है.
पुलिस का कहना है कि मारे गए सभी लोग सोलापुर ज़िले के मंगलवेढ़े इलाक़े के रहने वाले थे.
पुलिस के मुताबिक ये घटना धुले से 80 किलोमीटर दूर साकरी तहसील के राईनपाड़ा गांव में हुई है.
धुले के पुलिस अधीक्षक रामकुमार ने बीबीसी को बताया, "दोपहर क़रीब एक बजे ये लोग एक बस से गांव में उतरे थे. उन्हें संदिग्ध मानकर लोगों ने कुछ सवाल-जबाव किए जिसके बाद उन्हें एक कमरे में बंद करके पीटा गया. इस हमले में उनकी मौत हो गई."
अफ़वाहों का ज़ोर
महाराष्ट्र के कई इलाक़ों में इन दिनों सोशल मीडिया के ज़रिए बच्चा चोर गिरोहों के सक्रिय होने की अफ़वाहें फैल रही हैं.
ख़ासकर धुले और नंदुरबार ज़िलों में अफ़वाह फैली है कि बच्चा उठाने वाली टोलियां घूम रही हैं.
पुलिस ने अफ़वाहें रोकने के लिए पर्चे भी बंटवाएं हैं लेकिन अफ़वाहों का दौर जारी है.
इन अफ़वाहों के प्रभाव आकर लोग अनजान लोगों पर हमले कर रहे हैं. धुले ज़िले में हुई ये घटना इस तरह की पहली घटना नहीं है.
बीते सप्ताह ही नंदुरबार ज़िले के शहादा इलाक़े में भी भीड़ ने तीन लोगों पर बच्चा चोर गिरोह होने के शक़ में हमला किया था. ये तीनों लोग बुरी तरह घायल हुए हैं और इनकी कार को भी आग लगा दी गई थी.
ऐसी ही घटनाओं में नासिक ज़िले के सटाना और धुले ज़िले के सिरपुर इलाक़ों में भी भीड़ ने अनजान लोगों पर हमले किए.
पुलिस के मुताबिक रविवार को हुई घटना में मारे गए पांचों लोग सोलापुर के रहने वाले थे. इनकी पहचान भारत शंकर भोसले (45), दादाराव शंकर भोसले (36), राजू भोसले (47), अगणू श्रीमंत हिंगोले (20) और भारत मावले (45) के रूप में हुई है.
हालांकि पुलिस ने अभी ये नहीं बताया है कि ये लोग धुले ज़िले के राईनपाड़ा गांव क्या करने आए थे.
गांववालों का विरोध
पुलिस अधीक्षक रामकुमार के मुताबिक घटना की जानकारी मिलने के बाद गांव पहुंचे पुलिस बल को ग्रामीणों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा जिसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल गांव भेजे गए.
पुलिस ने अभी तक इस मामले में 20 संदिग्धों को हिरासत में लिया है और घटना में शामिल बाक़ी लोगों की पहचान की जा रही है.
जिस गांव में ये घटना हुई है वहां रविवार का साप्ताहिक बाज़ार लगा था. इस वजह से भी भीड़ बहुत ज़्यादा थी. आसपास के गांवों के लोग भी वहां मौजूद थे.
धुले ज़िले के गांधीवादी कार्यकर्ता जसपाल सिसोदिया ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बीबीसी से कहा, "जिस बर्बरता से इन लोगों को मारा गया वो हैरान करने वाली है. सामान्य आदिवासी या ग्रामीण इतने क्रूर कैसे हो सकते हैं? यह भीड़ का पागलपन था. लोगों को लगता है कि वो भीड़ में शामिल होकर वहशियाना हरकत करेंगे तो पहचाने नहीं जाएंगे."
धुले ज़िले के प्रभारी मंत्री दादा भूसे ने बीबीसी मराठी सेवा से कहा, "ये बहुत ही गंभीर और दुखद घटना है. अफ़वाहों की वजह से पांच लोगों की जान चली गई. जो लोग अफ़वाहों फैला रहे हैं और इस तरह के अपराध कर रहे हैं उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी."