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ICICI बैंक-चंदा कोचर मामले में अब तक क्या हुआ
आईसीआईसीआई बैंक ने 18 जून, दिन सोमवार को एक बयान जारी करके कहा है कि उनकी सीईओ और एमडी चंदा कोचर उनके ख़िलाफ़ जारी जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जा रही हैं.
इसके बाद बैंक ने चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर नाम का एक नया पद सृजित किया है जिस पर संदीप बख्शी अगले पांच सालों तक बने रहेंगे. वह 19 जून से अपना कार्यभार संभालेंगे.
चंदा कोचर की छुट्टी पर बैंक ने स्पष्टीकरण दिया है कि गवर्नेंस और कॉरपोरेट के ऊंचे मानकों को ध्यान में रखते हुए बैंक की सीईओ और एमडी चंदा कोचर ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने का फैसला किया है.
बैंक ने 30 मई को चंदा कोचर पर लगाए गए आरोपों की जांच करने के लिए एक समिति बनाने का फ़ैसला किया था.
लेकिन बैंक की इस घोषणा से काफी पहले ही बैंकिंग सेक्टर में चंदा कोचर के छुट्टी पर जाने की चर्चा की जा रही थी लेकिन तब बैंक ने कहा था कि वह पहले से तय की गईं वार्षिक छुट्टियों पर जा रही हैं.
कहां से शुरू हुआ मामला
दरअसल, आईसीआईसीआई बैंक ने साल 2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को एसबीआई के नेतृत्व में बनाए गए एक कंसोर्टियम में शामिल होकर 3250 करोड़ रुपये का लोन दिया था.
इस कंसोर्टियम में 20 बैंक शामिल थे जिन्होंने कुल चालीस हज़ार करोड़ रुपये का लोन वीडियोकॉन को दिया.
इसके बाद 22 अक्टूबर 2016 को आईसीआईसीआई बैंक और वीडियोकॉन के निवेशक अरविंद गुप्ता ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखा जिसमें उन्होंने 15 मार्च, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरुण जेटली समेत कई अन्य सरकारी विभागों को भेजा गया पत्र शामिल किया था.
कथित रूप से 15 मार्च, 2016 को लिखे गए इस पत्र में दावा किया गया कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर के वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन के साथ व्यापारिक रिश्ते हैं, ऐसे में वीडियोकॉन ग्रुप को दिए गए 3250 करोड़ रुपये के लोन में हितों का टकराव का मामला हो सकता है.
मार्च, 2018 में सुर्खियों में पहुंचा मामला
बीती 31 मार्च को अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने एक ख़बर छापी जिसमें ये बताया गया कि वीडियोकॉन कंपनी को मिले लोन के एनपीए होने में चंदा कोचर किस तरह शामिल हैं.
इस रिपोर्ट में ये बातें शामिल थीं -
- दिसंबर 2008 में दीपक कोचर (चंदा कोचर के पति) और वेणुगोपाल धूत (वीडियोकॉन कंपनी के चेयरमैन) ने नूपावर रिन्वेबल्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई जिसमें 50 प्रतिशत शेयर धूत और उनके परिवारवालों के नाम और बाकी शेयर दीपक कोचर, उनके पिता की कंपनी पेसेफिक कैपिटल और चंदा कोचर के भाई की पत्नी के नाम थे.
- जनवरी 2009 में धूत नूपॉवर के निदेशक पद से इस्तीफ़ा देकर अपने 24,999 शेयर ढाई लाख रुपये में कोचर के नाम कर देते हैं.
- मार्च 2010 में नूपॉवर को सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नाम की कंपनी से 64 करोड़ रुपये का लोन मिला. इस कंपनी के 99.9 फीसदी शेयर धूत के नाम थे.
- इसके बाद धूत द्वारा कोचर को शेयर ट्रांसफर करने और कोचर तथा उनके संबंधी की कंपनी पेसेफिक कैपिटल ने सुप्रीम एनर्जी को शेयर ट्रांसफर किए. इस तरह मार्च 2010 तक सुप्रीम एनर्जी नूपॉवर कंपनी में 94.99 फीसदी की मालिक बन गई. कोचर के पास इस कंपनी के सिर्फ 4.99 फीसदी शेयर बचे.
- साल 2010 के नवंबर महीने में धूत ने अपने पूरे शेयर सुप्रीम एनर्जी में अपने सहयोगी महेश चंद्र पुंगलिया को ट्रांसफर कर दिया.
- साल 2012 के सितंबर महीने से 29 अप्रैल 2013 तक पुंगलिया ने अपनी पूरी हिस्सेदारी पिनेकल एनर्जी नाम के ट्रस्ट को सौंप दी जिसमें दीपक कोचर मैनेजिंग ट्रस्टी हैं और इन पूरे शेयरों के लेनदेन की कीमत मात्र 9 लाख रुपये रही.
- इस लेनदेन से छह महीने पहले वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3250 करोड़ रुपये का लोन मिला.
- इसमें से 86 फीसदी लोन - 2810 करोड़ रुपये को वापस नहीं किया गया और 2017 में आईसीआईसीआई बैंक ने वीडियोकॉन के ख़ाते को एनपीए घोषित कर दिया.
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी ख़बर में दावा किया है कि जब उन्होंने अपनी रिपोर्ट पर आईसीआईसीआई बैंक का पक्ष जानने के लिए ईमेल किया तो इसके अगले दिन बैंक ने अपना बयान जारी किया.
इस बयान में बैंक ने कहा "बैंक का बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि किसी तरह का क्विड प्रो, नेपोटिज़्म और कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट का मामला होने का सवाल ही नहीं उठता और बैंक बोर्ड को अपनी प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर पर पूरा भरोसा है."
सीबीआई के हाथ में पहुंचा केस
ब्लूमबर्ग क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अप्रैल महीने में सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में लिया और दीपक कोचर, वीडियोकॉन ग्रुप समेत कुछ अज्ञात लोगों के बीच हुए लेनदेन की शुरुआती जांच शुरू की.
आयकर विभाग ने भी दीपक कोचर को नोटिस जारी करते हुए उनकी व्यक्तिगत आर्थिक आंकड़े, पिछले कुछ सालों के आईटीआर और उनकी फर्म के साथ व्यापारिक लेनदेन का ब्योरा मांगा.
इसके बाद इमिग्रेशन विभाग ने दीपक कोचर को एयरपोर्ट से हिरासत में लिया जब वह देश छोड़कर जाने की तैयारी कर रहे थे.
इसके बाद सीबीआई की एक टीम चंदा कोचर के पति दीपक कोचर से कई दिन तक लगातार पूछताछ करती रही.
हालांकि, इस समय तक चंदा कोचर सीबीआई की जांच के दायरे में नहीं आई.
हालांकि, दीपक कोचर और वेणुगोपाल धूत के खिलाफ़ जांच पूरी होने तक उनके देश छोड़कर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
इसके बाद 25 मई को बाजार नियामक संस्था सेबी ने आईसीआईसीआई बैंक और एमडी चंदा कोचर को वीडियोकॉन लोन मामले में नोटिस जारी किया.
बैंक ने किया जांच करने का ऐलान
इसके बाद मई महीने की 30 तारीख़ को आईसीआईसीआई बैंक ने ऐलान किया कि वह वीडियोकॉन लोन केस में चंदा कोचर की कथित भूमिका की जांच करेगी.
इस ऐलान में बैंक ने ये भी कहा कि ये जांच एक अज्ञात व्हिसिल ब्लोअर द्वारा चंदा कोचर के ख़िलाफ़ लगाए आरोपों के आधार पर की जा रही है.
18 जून को आए ऐलान के बाद आईसीआईसीआई बैंक ने चंदा कोचर जांच पूरी होने तक छुट्टी पर चली गई हैं.
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