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प्रेस रिव्यू: ये कोड बताएगा दवा असली है या नकली!
हिंदुस्तान के मुताबिक केंद्र सरकार देश में नकली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जल्द ही दवाओं पर एक विशेष कोड का प्रकाशन अनिवार्य कर सकती है.
इस कोड के ज़रिए उपभोक्ता जान सकेंगे कि दवा असली है या नकली. दवाओं के संबंध में फ़ैसला लेने वाली सर्वोच्च संस्था ड्रग टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड की बुधवार को होने वाली बैठक में इस बारे में फ़ैसला लिया जा सकता है.
जानकारी के मुताबिक, सरकार ने पहले चरण में देशभर की 300 दवा ब्रांड्स की पहचान की है. इन दवाओं पर अब कंपनियों से 14 अक्षरों का अल्फ़ान्यूमैरिक कोड छापने को कहा जाएगा.
इस कोड को एक तय नंबर पर मैसेज कर इस बात का पता लगाया जा सकेगा कि वह नंबर सही है या नहीं. यदि नंबर सही नहीं है तो साफ़ है कि दवा नकली है. साथ ही इससे ये भी पता चल सकेगा कि दवा किस कंपनी द्वारा तैयार की गई है.
चीन का भरोसा भारत पर
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक चीन के शीर्ष सरकारी बैंक इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना ने पहला ऐसा इन्वेस्टमेंट फ़ंड लॉन्च किया है, जो केवल भारत में निवेश करेगा.
बैंक ने कहा है कि चीन के निवेशकों के लिए भारतीय बाज़ार सबसे अच्छी संभावनाएं लेकर आने वाला है क्योंकि भारत डबल डिजिट ग्रोथ की ओर बढ़ रहा है.
यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई पहली अनौपचारिक समिट के बाद उठाया गया है.
क्रेडिट सुइस इंडिया मार्केट फ़ंड अमरीका और यूरोप के 20 से अधिक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड (ईटीएफ) में निवेश करेगा जो कि भारतीय बाज़ार पर आधारित हैं.
कर्नाटक के चुनाव सबसे महंगे
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक कर्नाटक विधानसभा चुनाव राजनीतिक पार्टियों और उनके द्वारा खर्च किए गए धन के मामले में देश में आयोजित 'अब तक का सबसे महंगा' विधानसभा चुनाव रहा.
यह सर्वेक्षण सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़ ने किया है. यह सेंटर ख़ुद को अपनी वेबसाइट पर एक गैर सरकारी संगठन और थिंक टैंक बताता है. इसके द्वारा किए गए सर्वेक्षण में कर्नाटक चुनाव को 'धन पीने वाला' बताया गया है.
सीएमएस के अनुसार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और उनके उम्मीदवारों द्वारा कर्नाटक चुनाव में 9,500-10,500 करोड़ रुपए के बीच धन खर्च किया गया. यह खर्च राज्य में आयोजित पिछले विधानसभा चुनाव के खर्च से दोगुना है.
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