वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट सौदे से किसे और कैसा ख़तरा?

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- Author, दिनेश उप्रेती
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमरीकी ऑनलाइन ई-कॉमर्स कंपनी वॉलमार्ट ने भारतीय कंपनी फ्लिपकार्ट में 77 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया है. इसके लिए वॉलमार्ट करीब 1600 करोड़ डॉलर यानी एक लाख 7 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक चुकाएगी.
इसे वॉलमार्ट का अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है.
पांच साल पहले जब एक और अमरीकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन ने भारत में कदम रखे तो तब से ही फ्लिपकार्ट पर दबाव बनने लगा था. अमेजॉन भी फ्लिपकार्ट को ख़रीदने की इच्छुक थी, लेकिन वॉलमार्ट का दांव कामयाब रहा और वो फ्लिपकार्ट को ख़रीदने में कामयाब रही, जिसका इस्तेमाल भारत में लगभग 10 करोड़ लोग करते हैं.
अमेज़ॉन को अब ये बात खल रही होगी कि करीब एक दशक पहले क्यों उसने उन दो भारतीयों को अपने साथ नहीं जोड़ा, जो उसके यहां इंटर्नशिप करने आए थे. तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि अगले कुछ साल में ही वो इस कंपनी को ही टक्कर देते नज़र आएंगे. आईआईटी से निकले इन दो इंजीनियरों सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने भारत वापस लौटकर 2007 में फ्लिपकार्ट नामक कंपनी बना दी.

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वॉलमार्ट की कोशिशें
वॉलमार्ट कई साल से भारत में पैर पसारने की कोशिशें कर रही थी और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती के फ़ैसले के बाद उसके पास भरपूर कैश भी हो गया था.
फ्लिपकार्ट में माइक्रोसॉफ्ट, टेनसेंट और सॉफ्टबैंक की भी हिस्सेदारी है और इन्होंने अपनी हिस्सेदारी नहीं बेची है. सॉफ्टबैंक के पास सबसे अधिक 20 फ़ीसदी हिस्सा है.
भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का कारोबार तेज़ी से फैल रहा है और मार्केट रिसर्च फर्म फॉरेस्टर के मुताबिक पिछले साल ये 2100 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया था.
वित्तीय मामलों में रिसर्च करने वाली कंपनी मॉर्गन स्टैनली की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 2026 तक ऑनलाइन कारोबार 200 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगा यानी अगले आठ साल में इसमें 9 से 10 गुना तक बढ़ोतरी होगी.

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वॉलमार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डग मैकमिलन भी इन आंकड़ों से वाकिफ़ हैं. उन्होंने कहा, "भारत दुनिया में सबसे आकर्षक रीटेल बाज़ारों में से एक है, फिर चाहे बात साइज़ की हो या फिर ग्रोथ की. हमने ऐसी कंपनी में निवेश किया है जो कि ई-कॉमर्स बाज़ार में बड़ा बदलाव लाई है."
मैकमिलन के बयान से साफ़ ज़ाहिर है कि 130 करोड़ की आबादी वाले भारत पर क्यों अमेज़ॉन और वॉलमार्ट जैसे दिग्गजों की नज़र है.
लेकिन सवाल ये है कि इस सौदे का भारतीय ऑनलाइन बाज़ार पर क्या और कैसे असर पड़ सकता है.

चिंता
फ्लिपकार्ट पर अपना सामान बेचने वाले विक्रेताओं में घबराहट और चिंता होना लाज़िमी है. ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन का दावा है कि ऑनलाइन वेंडर्स की तादाद अभी 8 से 10 हज़ार है और उनके लिए ये डील परेशानी का सबब बन सकती है.
एसोसिएशन के महासचिव सुधीर मेहरा कहते हैं, "वैसे भी वॉलमार्ट का इतिहास रहा है कि वो बहुत कम कीमत पर सामान बेचकर छोटे-मोटे कारोबारियों को अपने रास्ते से हटा देती है. उसके पास पैसे की कमी नहीं है और दुनियाभर के बाज़ारों में उसकी पहुँच है. ऐसे में वो दूसरे देशों का सस्ता सामान भारत में डंप कर देगी."

हालाँकि वॉलमार्ट चार साल पहले भारती के साथ भारतीय बाज़ार में उतरी थी, लेकिन तब उसने खुद को सिर्फ कैश एंड कैरी थोक कारोबार तक ही सीमित रखा था. ऐसा उसने अपनी मर्जी से नहीं किया था बल्कि विदेशी निवेश को लेकर लगी भारत सरकार की पाबंदियां इसकी वजह थी. अभी वॉलमार्ट के भारत में 21 स्टोर हैं.
भारती के साथ नाता तोड़ने के चार साल बाद वॉलमार्ट एक बार फिर भारतीय बाज़ार में धमाकेदार तैयारी के साथ उतरने को तैयार है. इस बार फील्ड भी नया है और साझेदार भी नया. अपने देसी प्रतिद्वंद्वी अमेज़ान को भारत में चित करने के लिए वॉलमार्ट वो सारे दांव खेलेगा, जिसके लिए वो कुख्यात है. सुधीर मेहता कहते हैं, "आने वाले समय में वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट के ज़रिये डिस्काउंट स्कीम में भारी निवेश करेगा. निश्चित तौर पर इससे एंड यूजर्स यानी ग्राहकों को फ़ायदा होगा, लेकिन व्यापारी और ख़ासकर छोटा व्यापारी इससे बुरी तरह प्रभावित होने जा रहा है."
क्या होगा मेक इन इंडिया का?
ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन ने मोदी सरकार के मेक इन इंडिया के नारे को भी खोखला बताया. उन्होंने बीबीसी से कहा, "एक तरफ मोदी सरकार मेक इन इंडिया का नारा देती है, तो दूसरी तरफ़ वॉलमार्ट जैसी कंपनियों को भारत में आने दिया जा रहा है जो मनी पावर से व्यापारियों को खत्म करने के लिए कुख्यात हैं. भारतीय रिटेलर्स के लिए लेवल प्लेइंग फील्ड बराबर का नहीं रहेगा और वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे."

कम कीमत और ज़्यादा वैरायटी
वॉलमार्ट के आने से भारतीय रिटेल सेक्टर को भी एक बूस्ट मिलेगा. वॉलमार्ट ने आने के बाद ग्राहकों को कम दाम पर प्रोडक्ट मिलेंगे. साथ ही ग्राहकों के पास प्रोडक्ट्स की ज्यादा वैरायटी उपलब्ध होगी. वॉलमार्ट को टक्कर देने के लिए अमेज़ॉन भी अपनी नई रणनीति पेश करने को मजबूर होगी. कुल मिलाकर ग्राहकों को फ़ायदा मिलने वाला है.
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