प्रेस रिव्यू: सरकार और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति पर तकरार

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दिल्ली से छपने वाले लगभग सभी अख़बारों में एक ख़बर प्रमुखता से छापी गई है और वो है सरकार और न्यायपालिका के बीच सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर छिड़े विवाद की.
दैनिक जागरण ने भी इसे लीड स्टोरी बनाया है. अख़बार लिखता है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर न्यायापालिका और सरकार के बीच चल रहा परोक्ष टकराव अब खुलकर सामने आ गया है.
हाई कोर्टों में जजों के खाली पड़े पदों के लिए दोनों एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराते नज़र आए.
अख़बार लिखता है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कोलेजियम की सिफ़ारिशें लंबित रखने पर सरकार से सवाल किया.
वहीं सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पलटकर कहा कि कोलेजियम रिक्तियों के अनुपात में कम नामों की सिफ़ारिश करता है.

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तूफ़ान की चेतावनी
अमर उजाला ने पहले पन्ने पर ख़बर दी है कि पांच से सात मई के बीच देश के कई हिस्सो में आंधी-तूफ़ान फिर से तबाही मचा सकता है.
अखबार मौसम विभाग के हवाले से लिखा है, "पांच मई को दिल्ली समेत यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड में तेज़ गर्जन के साथ आंधी तूफ़ान आ सकता है."
इसी से जुड़ी एक ख़बर दैनिक भास्कर में छपी है. पहले पन्ने पर प्रमुखता से अख़बार लिखता है कि देश के उत्तरी इलाकों में बुधवार को आए तूफ़ान से ताजमहल की दो मीनारें हिल गई हैं और एक का दरवाज़ा टूट गया है.
भास्कर लिखता फ़तेहपुर सिकरी में भी तूफ़ान से नुकसान हुआ है.

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'नमाज़ से रोका'
द ट्रिब्यून में एक रिपोर्ट छपी है जिसके मुताबिक गुड़गांव में एक बार जुमे की नमाज़ बाधा डाली गई है. ऐसी एक घटना पहले भी हुई थी, जिसके बाद कुछ लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया था.
अख़बार लिखता है कि शुक्रवार को गुड़गांव में दस जगहों पर मुसलमानों को खुली जगहों पर नमाज़ पढ़ने से रोका.
द ट्रिब्यून के मुताबिक नमाज़ रुकवाने वाले संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति नाम के संगठन के सदस्य थे.

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प्रचार छोड़ यूपी लौटेंगे योगी
द स्टेट्समेन में ख़बर है कि कर्नाटक में पार्टी के चुनावी अभियान में हिस्सा ले रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, प्रचार बीच में ही छोड़कर वापस यूपी लौट रहे हैं.
अख़बार लिखता है कि वो सीधे आगरा जाएंगे जहां तूफ़ान से भारी जान-माल का नुकसान हुआ था.
राष्ट्रपति नाख़ुश?
दिल्ली से छपने वाला अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स लिखता है कि राष्ट्रपति भवन फ़िल्मों को दिए जाने वाले नेशनल अवार्ड्स से जुड़े विवाद से नाख़ुश है.
अख़बार के अनुसार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी नाराज़गी प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचा दी है.
गौरतलब है कि करीब 50 पुरस्कार विजेताओं ने गुरुवार को हुए समारोह में इसलिए हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उन्हें अवार्ड राष्ट्रपति के हाथ से नहीं मिल रहा था.












