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ग्राउंड रिपोर्ट: आगरा में आंधी-तूफ़ान ने ली एक पूरे परिवार की जान
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, आगरा
बुधवार की देर शाम आये भयंकर तूफ़ान ने आगरा के कई इलाकों का नक्शा ही बदल कर रख दिया.
तकरीबन 132 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से जब रेत भरी आंधी इस इलाके में दाखिल हुई तो लोगों ने कुदरत के इस कहर के सामने अपने आप को बेबस पाया.
आगरा से लगभग 40 किलोमीटर दूर खैरागढ़ तहसील के डुंगरवाला गाँव में मातम पसरा हुआ है. यहाँ एक ही परिवार के तीन लोग एक बूढ़ी महिला और उनकी दो नातियों की घर के मलबे में दबकर मौत हो गई है.
ये वही इलाक़ा है जहां बुधवार को तूफ़ान से मची तबाही में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.
डुंगरवाला गांव के इस परिवार में उन तीनों सदस्यों के अलावा और कोई नहीं हैं. इस कारण इनका दाह संस्कार भी गांव वालों ने ही किया.
कभी बच्चों की किलकारियों से गूंजता परिवार आज एक मलबे के ढेर में तब्दील हो गया है.
यहीं से कुछ दूरी पर बढेरा गाँव भी हैं जहाँ तूफ़ान की वजह से काफ़ी तबाही हुई. गाँव की लगभग हर कच्ची छत ढह चुकी है. पिछले दो दिनों से बिजली नहीं होने के कारण गावं में पानी की किल्लत भी शुरू हो गई है.
तेज़ आंधी से बिजली के खंभे, पेड़ और मोबाइल के टावर बड़ी तादाद में गिर गए हैं.
सिर पर गिरी आफ़त
यहां मेरी मुलाक़ात धम्बी सिंह से हुई, जो तूफ़ान के दौरान खुद बुरी तरह घायल हुए थे. उनके पिता की भी मलबे में दबकर मौत हो गई है.
बीबीसी से बात करते हुए धम्बी सिंह कहते हैं, "पहले हम सब बाहर ही बैठे थे. जब तेज़ हवा चलने लगी तो हम घर के अन्दर आकर बैठ गए. फिर हवा और तेज़ होती चली गई.''
वे आगे बताते हैं, ''मेरे बगल में ही मेरे पिताजी और भतीजा भी बैठे हुए थे. फिर अचानक पूरी छत हमलोगों पर गिर गई. और इसी मलबे में दबकर पिताजी की मौत हो गई. मुझे और मेरे भतीजे को सिर पर गंभीर चोट आई है. कल पिताजी का हमने दाह संस्कार किया."
इसी गाँव के सुरेंद्र सिंह ने तूफ़ान में अपना बेटा और भतीजा खोया है, जबकि उनके बेटे के सिर पर भी गंभीर चोटें आई हैं.
उनका घर भी अब मलबे में तब्दील हो चुका है. घायल पत्नी और बेटे के इलाज के लिए वो आगरा शहर के अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं.
आगरा के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अखिलेश भदोरिया जान-माल के नुकसान का जायजा लेने खैरागढ़ पहुंचे. उनका कहना था कि ग्रामीणों को तूफ़ान की चेतावनी पहले ही दे दी गई थी. चूंकि ग्रामीण इलाकों में घर कंक्रीट के नहीं बने होते हैं इसलिए जान-माल का ज़्यादा नुकसान हुआ है.
तूफ़ान की घड़ी लोगों पर काफ़ी भारी गुजरी. यहां जमा युवकों के समूह ने बताया कि किस तरह वो एक एक घर से मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाल रहे थे.
तेज़ हवाओं की वज़ह से लोग मलबे के नीचे दो घंटों तक दबे रहे. तब जाकर कहीं कुछ लोगों को बचाया जा सका, लेकिन फिर भी कई लोग मारे गए.
यहां के एसपी का कहना है कि सिर्फ़ खैरागढ़ तहसील में ही दो दर्जन के करीब लोग तूफ़ान में मारे गए. सौ से अधिक लोगों को चोटें आई और बड़ी तादात में मवेशी भी मारे गए हैं.
तूफ़ान आने का सिलसिला अभी थमा नहीं है. मौसम विभाग ने एक बार फिर इस इलाके के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले 72 घंटों में वैसा या फिर इससे भी ज़्यादा तीव्रता वाला तूफ़ान इस इलाके में आ सकता है.
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