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'मोहम्मद अली जिन्ना ने लड़ा था लोकमान्य तिलक का राष्ट्रद्रोह का केस'
- मोहम्मद अली जिन्ना मुसलमानों के लिए अलग देश चाहते थे, इस्लामिक नहीं
- जिन्ना चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते कनाडा और अमरीका जैसे हों
- जिन्ना ने हिंदू-मुस्लिम मित्रता के लिए काफ़ी काम किया
- जिन्ना ने लड़ा था लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का केस
- जिन्ना जेल नहीं गए, लेकिन आंबेडकर भी एक भी दिन जेल नहीं गए
- श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने भी की थी बंगाल विभाजन की मांग
भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर मचा विवाद बेवजह है और ऐसा माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए.
बुधवार दोपहर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटवाने की मांग को लेकर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता कैंपस में पहुँचे थे, जिसके बाद वहाँ बवाल मच गया. बाद में पुलिस को हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें कई छात्र घायल हो गए थे.
हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं की मांग थी कि यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन हॉल से जिन्ना की तस्वीर हटाई जाए, जो करीब 80 साल से यहां लगी है.
बीबीसी हिंदी ने फ़ेसबुक लाइव में सुधींद्र कुलकर्णी से बातचीत की और जाना कि जिन्ना को लेकर बवाल की वजह क्या हो सकती है और जो वजहें बताई जा रही हैं उनमें कितना दम है.
सुधींद्र कुलकर्णी ने मोहम्मद अली जिन्ना पर काफी काम किया है. उन्होंने '100 ईयर्स ऑफ़ लखनऊ पैक्ट' नामक किताब भी लिखी है.
सुधींद्र कुलकर्णी ने क्या-क्या कहा?
सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि यूनिवर्सिटी से जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग बेवजह है. जिन्ना की तस्वीर होने का मतलब ये नहीं है कि वहाँ के छात्रों के लिए वो एक आदर्श हैं. ये तस्वीर 1938 में वहाँ लगाई गई थी. वहाँ महात्मा गांधी की भी तस्वीर है, सीवी रमन की तस्वीर भी वहाँ है. फिर अचानक ये मुद्दा वहाँ कहाँ से आ गया.
ये सही है कि आज़ादी की लड़ाई में जिन्ना एक भी दिन जेल नहीं गए, लेकिन ऐसे तो बीआर आंबेडकर भी एक भी दिन जेल नहीं गए, लेकिन क्या उनका योगदान कम है.
1908 में जब लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर देशद्रोह का आरोप लगाकर उन्हें बर्मा में छह साल की काला पानी की सज़ा हुई तो तिलक का मुकदमा मोहम्मद अली जिन्ना ने ही लड़ा था.
1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच एक समझौता हुआ जिसमें ये तय हुआ कि हिंदुओं और मुसलमानों को भारत की आज़ादी के लिए साथ-साथ लड़ना चाहिए.
मैं तो ये कहूंगा कि देश के बंटवारे के लिए जिन्ना तो दोषी थे ही, लेकिन वो अकेले दोषी नहीं थे. लॉर्ड माउंटबेटेन भी दोषी थे, तो जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल भी दोषी थे.
यहाँ मैं ये भी बताना चाहूंगा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी भी चाहते थे कि बंगाल एक न रहे और इसका विभाजन हो.
पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुलझाने का सबसे गंभीर प्रयास अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हुआ थे. नरेंद्र मोदी ने भी पाकिस्तान के साथ मित्रता और सामान्य बनाने के लिए मैं उनकी तारीफ़ करता हूँ. जब मोदी पाकिस्तान गए थे तो वहाँ के लोगों ने भी उनकी सराहना की थी.
दरअसल, भाजपा के दो अलग-अलग चेहरे हैं. एक वाजपेयी का चेहरा और एक वो जो आजकल चल रहा है. संघ में आज भी पाकिस्तान और मुसलमानों को लेकर द्वेष की भावना है.
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