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यूपी-राजस्थान में चली मौत की आँधी, 100 से ज़्यादा जानें गईं
उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बुधवार शाम आई आंधी में मरने वालों की तादाद सौ से ज़्यादा हो गई है.
वहीं उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने की वजह से कई जगह भू स्खलन की भी ख़बरें हैं जिसकी वजह से सड़क यातायात प्रभावित हुआ है. पिछले हफ्ते केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले थे और तीर्थ यात्रियों का उत्तरखंड जाना शुरू हो गया था.
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के सूचना कार्यालय के मुताबिक सबसे ज़्यादा 43 लोगों की मौत आगरा में हुई है और प्रदेश में कुल 70 लोगों की मौत हुई है जबकि 83 लोग घायल हुए हैं.
आगरा के अलावा उत्तर प्रदेश के बिजनौर, बरेली, सहारनपुर, पीलीभीत, फ़िरोज़ाबाद, रायबरेली और उन्नाव आदि ज़िले भी तेज़ आंधी से बुरी तरह प्रभावित रहे.
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को ज़रूरतमंदों तक हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं.
सबसे ज़्यादा नुक़सान आगरा में हुआ. यहाँ 80 से ज़्यादा पशु भी मारे गए हैं.
आगरा के स्थानीय पत्रकार विवेक कुमार जैन के मुताबिक सैकड़ों पेड़ अपनी जगह से उखड़ गए, कई घर टूट गए ,बिजली के खंबे और तारों के टूटने से बिजली की आपूर्ति ध्वस्त हो गई. जगह-जगह होर्डिंग, घरों के छप्पर ,शेड उड़ गए. इस तूफान के साथ साथ भारी बारिश भी हुई जगह-जगह ओले भी पड़े.
इस बार का तूफान फतेहाबाद से खैरागढ़ जाने वाले मार्ग की ओर ज्यादा केंद्रित रहा और लगभग 50 किलोमीटर क्षेत्र में सबसे ज़्यादा जान माल की हानि हुई. खैरागढ़ में सबसे अधिक मौतें हुई. आगरा ज़िला मुख्यालय से क़रीब 40 किलोमीटर दूर मौजूद कोराबर गांव में एक ही परिवार के चार बच्चे सोते हुए दीवार के नीचे दब गये जिससे उनकी मौत हो गई. इनमें सबसे बड़े बच्चे की उम्र 11 साल थी.
राजस्थान
वहीं राजस्थान में अब तक मिली जानकारी के अनुसार 32 लोगों की मौत हुई है और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं.वहीं जयपुर से स्थानीय पत्रकार नारायण बारेठ के मुताबिक राजस्थान में बुधवार रात आई तेज़ आंधी से बिजली के खंभे और पेड़ बड़ी तादाद में उखड़ गए हैं. कुछ घरों में आग लगने की भी ख़बर है.
राजस्थान में तूफ़ान से सबसे ज़्यादा प्रभावित भरतपुर प्रमंडल के आयुक्त सुबीर कुमार ने पत्रकारों को बताया कि मारे गए लोगों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 50-50 हज़ार रुपए मुआवज़े के रूप में दिए गए हैं.
राजस्थान के मत्स्य क्षेत्र में धूल भरी आंधीं से भारी नुक़सान हुआ है.
भरतपुर ज़िले में 17, धौलपुर में 9 और अलवर में 9 लोगों की मौत हुई है.
राहत एवं बचाव सचिव हेमंत कुमार गेरा के मुताबिक आंधी का प्रभाव इन्हीं तीन ज़िलों में सबसे ज़्यादा रहा है.
गेरा के मुताबिक सौ से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं जिनमें सबसे ज़्यादा 50 लोग धौलपुर में घायल हुए हैं.
प्रशासन राहत और बचाव कार्य चला रहा है और नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है.
राजस्थान में सरकार मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपए दे रही है जबकि गंभीर रूप से घायलों के परिवारों को 2 लाख रुपए और मामूली रूप से घायलों को 60 हज़ार रुपए की मदद दी जा रही है.
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस प्राकृतिक आपदा पर दुख ज़ाहिर किया है और अधिकारियों को लोगों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं.
वहीं कांग्रेस के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस आपदा के बाद अपने जन्मदिन का कार्यक्रम रद्द कर दिया है.
दिल्ली स्थित भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बात करते हुए कहा कि उत्तर भारत में कई स्थानों पर आंधी तूफ़ान और तेज़ बारिश की वजह पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) है. उनका कहना था कि राजस्थान में सूखा मौसम था इसलिए वहाँ रेत भरी आंधी आई. मगर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में नमी और उमस थी जिस वजह से तूफ़ान के साथ-साथ तेज़ बारिश हुई है.
मौसम विभाग के महानिदेशक का कहना है कि इस महीने में इस तरह का तूफ़ान आना अस्वाभाविक नहीं है.
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