You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
माया कोडनानी के ख़िलाफ़ वो 'सबूत' जो अदालत में टिक नहीं पाया
- Author, प्रशांत दयाल
- पदनाम, अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी के लिए
27 फ़रवरी 2002 में गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच को आग लगा दी गई थी, क्योंकि कथित तौर पर उसमें अयोध्या में राम मंदिर की मांग कर रहे कारसेवक यात्रा कर रहे थे.
साबरमती एक्सप्रैस का एस 6 कोच जल कर खाक हो गया था और उसके साथ ही 57 कारसेवक भी.
इस घटना के दूसरे दिन यानी 28 फ़रवरी के दिन अहमदाबाद में दंगे होने शुरू हो गए थे, जिसमें तीन जगहों में नरसंहार हुआ था. इनमें नरोदा पाटिया/नरोदा गांव और गुलबर्ग सोसाइटी का इलाका प्रमुख था.
इन दंगों के बाद पुलिस ने अपनी पुरानी आदत के अनुसार रास्ते पर जो भी मिला उन्हें पकड़कर जेल में बंद कर दिया. जिसमें से कुछ तो वाक़ई दोषी थे लेकिन कुछ निर्दोष भी थे.
आईपीएस राहुल शर्मा बने शासन का सिरदर्द
गुजरात में हो रहे इन दंगों को रोकने और भड़काने के लिए अलग-अलग लोगों के अपने-अपने हित थे. इस बीच भावनगर के डीएसपी राहुल शर्मा ने दंगाइयों को देखते ही मारने का आदेश दे दिया था.
आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा का ये आदेश तत्कालीन गृहराज्य मंत्री गोरधन ज़ड़फिया को पसंद नहीं आया और उन्होंने उनका तबादला अहमदाबाद कर दिया.
लेकिन अहमदाबाद पहुंचे शर्मा एक बार फिर शासन के लिए सिरदर्द बन गए. दंगों में जिन लोगों ने अपनों को खोया और अपनी फ़रियाद भी दर्ज़ नहीं करवा पाए, राहुल शर्मा उन्हें खोज-खोजकर उनकी शिकायत दर्ज करने लगे.
इसी वजह से अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर प्रशांत चंद्र पांडे ने उन्हें कंट्रोल रूम से हटाकर क्राइम ब्रांच की मदद के लिए भेज दिया. वहां राहुल शर्मा को कुछ भी नहीं करना था लेकिन उन्होंने वहां भी अपने लिए काम ढूंढ़ ही लिया.
फ़ोन कॉल डिटेल खंगाली
2002 में गुजरात में मोबाइल फ़ोन की सुविधा देने वाली दो ही कंपनियां था, राहुल शर्मा ने इन दोनों मोबाइल कंपनियों से कहा कि 28 फरवरी के दिन गुजरात में हर मोबाइल धारक के कॉल डिटेल उन्हें पहुंचाई जाए.
मोबाइल कंपनी से मिलने वाली कॉल डिटेल की जानकारी इन दंगों के आरोपियों के ख़िलाफ़ एक बड़ा सबूत बन सकता था.
मोबाइल कॉल्स की जानकारियां जुटाना और उनके ज़रिए इस मामले को सुलझाना कितना अहम साबित होगा यह बात गुजरात सरकार के वकीलों को भी पता चल चुकी थी.
इसकी वजह से गोधरा कांड की सुनवाई कर रहे जस्टिस नानावटी के सामने राहुल शर्मा ने जो बयान दिया, उसमें उन्होंने इन कॉल रिकॉर्ड की सीडी भी जमा करवाई.
इसके बचाव में गुजरात सरकार ने कहा था कि ऐसी कोई सीडी हो ही नहीं सकती.
एसआईटी ने कॉल डिटेल को माना सबूत
एक तरफ जहां नानावटी बेंच में गुजरात सरकार राहुल शर्मा की तरफ़ से जमा की गई सीडी का विरोध कर रही थी, वहीं दंगो की जांच के लिए बनाए गए विशेष जांच दल ने राहुल शर्मा की इस सीडी को बतौर सबूत मान लिया.
एसआईटी ने इन कॉल डिटेल्स के आधार पर उन लोगों को पकड़कर पूछताछ करनी शुरू की जिन्हें भी तक पकड़ा नहीं गया था या जिनके नाम अभी तक सामने नहीं आए थे.
इन्हीं फोन कॉल्स के आधार पर एसआईटी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहराज्य मंत्री गोरधन जड़फिया को भी अपना बयान देने के लिए बुलाया था.
इसके अलावा इन्हीं फोन कॉल्स के आधार पर यह पता लगाया गया कि दंगों के वक्त आईपीएस अधिकारी एम के टंडन और पीबी गोंदिया कहां थे?
क्या मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख पाए राहुल शर्मा?
एसआईटी का हिस्सा रह चुके गुजरात के आईपीएस हिमांशु शुक्ला ने बीबीसी से बात करते हुए बताया कि राहुल शर्मा की इस सीडी को हमने बतौर सबूत माना था.
इन्हीं कॉल डिटेल्स के आधार पर यह बात भी सामने आई कि 50 से ज़्यादा लोग घटनास्थल पर मौजूद थे और उस वक्त किसके साथ संपर्क में थे.
ट्रायल कोर्ट ने भी सीडी के इन तथ्यों को मान्य रखा था. इन्ही सबूतों के आधार पर यह भी माना गया था कि मायाबेन कोडनानी वहां मौजूद थीं.
पीड़ित पक्ष की तरफ़ से लड़ रहे वकील शमशाद पठान ने बीबीसी से कहा कि राहुल शर्मा ने फोन कॉल्स की तमाम जानकारियां तो कोर्ट के सामने रखीं लेकिन वे उन्हें मजबूती से से कोर्ट को यह समझाने में असफल रहे कि ये कॉल डिटेल्स कितनी महत्वपूर्ण हैं.
इन सभी कॉल डिटेल्स को इकट्ठा करने वाले पूर्व आईपीएस राहुल शर्मा ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, ''सिर्फ़ कॉल डिटेल्स सामने रखने से बात ख़त्म नहीं होती, एसआईटी के सामने कॉल डिटेल्स रखने के बाद, यह साबित करना कि फ़ोन धारक आरोपी उस समय घटनास्थल पर ही मौजूद था इसके लिए उस फोन के मालिक का नाम, वहां टावर की मौजूदगी भी साबित करने की ज़रूरत थी.''
''उस दिशा में कुछ नहीं हो पाया. जिसकी वजह से फोन कॉल्स सबूत के तौर पर कोर्ट में नहीं टिक पाए.''
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)