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स्कूल से घर लौट बच्ची ने बताई यौन उत्पीड़न की कहानी
- Author, जाह्नवी मूले
- पदनाम, संवाददाता, बीबीसी मराठी सेवा
एक तरफ़ देश में कठुआ और उन्नाव में रेप को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं तो दूसरी तरफ़ यौन उत्पीड़न का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा.
इसी कड़ी में मुंबई से 60 किलोमीटर दूर एक विकलांग बच्ची से स्कूल के केयरटेकर द्वारा यौन उत्पीड़ान का मामला सामने आया है. यह वाक़या करजत शहर का है.
लड़की सुन नहीं सकती है और देखने में अक्षम है. पिछले महीने 30 मार्च को एक आवासीय स्कूल के केयरटेकर को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था.
इस केयरटेकर पर सात साल और 10 साल की दो लड़कियों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके बाद से स्कूल बंद है और ऐसी आशंका जताई जा रही है कि और बच्चियों को भी स्कूल में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा होगा.
हुआ क्या था?
यह आवासीय स्कूल नहीं सुन पाने वाली बच्चे और बच्चियों के लिए है. सात क्लास रूम वाला यह स्कूल एक स्थानीय सरकारी स्कूल में चलता है. इस स्कूल में 20 लड़के और 18 लड़कियां हैं और साथ ही नौ लड़कियां और आठ लड़के स्कूल के ही होस्टल में रहते हैं. छुट्टी के दिनों में ये घर चले जाते हैं.
इनमें से एक लड़की पास के ही शहर नेराल की है. जब वो घर गई तो उसने अपने माता-पिता से प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत की.
पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के दौरान पीड़ित लड़की की मां ने स्थानीय मीडिया से कहा, ''हमलोगों ने उससे सांकेतिक भाषा में पूछा तो उसने बताया कि हुआ क्या था. उसने कहा कि सर (केयरटेकर) ऐसे-ऐसे करते थे.''
उस लड़की ने बताया कि उसकी दोस्त के साथ भी उस व्यक्ति ने ऐसे ही किया था. इस मामले में दोनों बच्चियों के माता-पिता ने नेराल पुलिस में संपर्क साधा. नेराल पुलिस ने यहां से उन्हें करजत पुलिस स्टेशन भेज दिया और यहीं पर शिकायत दर्ज की गई.
सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुजाता तांवड़े ने बीबीसी मराठी से कहा कि लड़की के बयान के आधार पर स्कूल के केयरटेकर को गिरफ़्तार किया गया है. वो केयरेकर महाराष्ट्र के नांदेड़ ज़िले का है. उस पर आईपीसी के अलग-अलग सेक्शन के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है.
पुलिस ने बीबीसी से कहा, ''मेडिकल रिपोर्ट से इस बात की पुष्टि हो गई है कि लड़की के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हमने और लड़कियों की भी जांच कराई थी. दो लड़कियों के घर जाने के कारण उनकी मेडिकल जांच नहीं हो पाई थी.''
पुलिस ने लड़कियों से बयान लेने के लिए बांद्रा स्थित अली यावर जंग साइन लैंग्वेज सेंटर से मदद ली. इसमें स्कूल के संचालक को भी उपेक्षा के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि बाद में अदालत से संचालक को ज़मानत मिल गई. इस स्कूल के संचालक एक कपल है जिसने चैरिटबल स्कूल के रूप में इसे खोला था.
हालांकि पति-पत्नी दोनों ने स्कूल में बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न से इनकार किया है. बीबीसी ने दोनों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. इस घटना से लोग हैरान हैं.
पुलिस इंस्पेक्टर सुजाता तांवड़े ने कहा, ''मैं ख़ुद एक मां हूं. मैं पूरे वाक़ये की जांच कर रही हूं.''
स्थानीय लोग हैं हैरान
जब इन बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया तो करजत के लोग बुरी तरह से हैरान रह गए. पड़ोसी तो अब भी भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. स्कूल के सामने की इमारत में रहने वाली एक महिला ने कहा, ''हमें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है. जो भी इसमें दोषी हैं उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए.''
यहां की एक और स्थानीय महिला ने कहा, ''करजत को सभ्य और सुरक्षित शहर के तौर पर देखा जाता है. यहां लड़कियों को लेकर किसी किस्म का डर नहीं है. हमलोगों ने आधी रात में भी शहर में कभी ख़ुद को असुरक्षित महसूस नहीं किया. इस तरह की घटना कभी हुई नहीं.''
स्मृति (बदला हुआ नाम) अक्सर इस स्कूल में अपनी दोस्तों के साथ आती थीं. वो इन बच्चियों के साथ खेलती थीं. स्मृति का कहना है वो इसे सुनकर बिल्कुल हैरान हैं. स्मृति की मां को भी इस घटना पर भरोसा नहीं हो रहा है.