राहुल का जेडीएस पर वार कांग्रेस के लिए होगा पलटवार?

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से जनता दल (एस) को बीजेपी की 'बी' टीम बताया है, इससे ना सिर्फ बीजेपी बल्कि खुद कांग्रेस के लोग भी हैरान हैं.

राहुल गांधी ने कहा है कि जनता दल(एस) में 'एस' का मतलब सेक्युलर नहीं बल्कि संघ परिवार है. राहुल गांधी की इस बात पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं.

लेकिन तमाम सवालों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता दल (एस) इस काबिल है कि वह कांग्रेस को कर्नाटक की सत्ता से दूर कर पाएगा?

इसका जवाब सीधे तौर पर तो 'ना' है लेकिन एक दूसरे नजरिए से देखें तो इसका जवाब 'हां' में भी हो सकता है. अगर जेडीएस एक निश्चित संख्या में सीटें जीतने में कामयाब रहती है तो वह कांग्रेस के लिए परेशानियां खड़ी कर सकती है.

जेडीएस में कितना दम?

कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में सत्ता पर काबिज़ होने के लिए 113 का जादुई आंकड़ा छूना बेहद जरूरी है. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी के अलावा खुद उनकी पार्टी के लोग भी यह बात मानते हैं कि उनकी पार्टी अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकती.

इसका एक कारण यह भी है कि जेडीएस मूलरूप से उच्चजाति समूह वोक्कालिगा की पार्टी के रूप में पहचानी जाती है. इस समूह से ही जेडीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी भी आते हैं.

कर्नाटक के दक्षिणी ज़िलों, विशेष रूप से पुराने मैसूर क्षेत्र में वोक्कालिगा समूह का प्रभुत्व माना जाता है. साल 2013 के विधानसभा चुनावों में पुराने मैसूर क्षेत्र और शिवमोगा ज़िले में इस पार्टी ने 40 में से 33 सीटें जीती थीं.

इन ज़िलों में जेडीएस की जीत का प्रमुख कारण मज़बूत उम्मीदवार का होना था.

मैसूर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर मुज़्ज़फर असदी कहते हैं, ''90 के दशक के अंतिम सालों में जेडीएस का एक सामाजिक आधार था जिसे एमओवीडी कहा जाता था. इसका मतलब था मुस्लिम, ओबीसी, वोक्कालिगा और दलित. लेकिन पिछले कुछ सालों में एमओवीडी बिखरकर महज वी रह गया है जिसका मतलब है वोक्कालिगा.''

बीजेपी का साथ

आखिर जेडीएस अपने दम पर कर्नाटक में सरकार क्यों नहीं बना सकती इसके पीछे प्रोफेसर असदी जो कारण बताते हैं वह यह है कि बाकी कर्नाटक में इस पार्टी का कोई आधार नहीं है.

तो आखिर जेडीएस को सत्ता पर काबिज होने के लिए क्या करना होगा?

साल 2004 में जनता दल (एस) ने सभी को हैरान करते हुए 58 सीटें जीती थीं, तब कांग्रेस के खाते में 85 सीटें आयी थीं. कांग्रेस ने जेडीएस का साथ मिलकर कर्नाटक की पहली गठबंधन सरकार बनाई थी.

साल 2006 में कुमारास्वामी इस गठबंधन सरकार को गिराकर जेडीएस-बीजेपी गठबंधन करने में कामयाब रहे और राज्य के मुख्यमंत्री बने, जिसमें उनका सहयोग बीजेपी के बीएस योदयुरप्पा ने दिया.

कुमारास्वामी ने मुख्यमंत्री का पद योद्युरप्पा को देने से इनकार कर दिया, इससे बीजेपी को अपने लिए सहानुभूति बटोरने का अवसर मिल गया, जिसकी मदद से बाद में बीजेपी कर्नाटक में सरकार बनाने में कामयाब रही और इस तरह दक्षिण के राज्य में पहली बार बीजेपी सत्ता पर आई.

प्रोफेसर असदी बताते हैं, ''जेडीएस दरअसर किंगमेकर की भूमिका में आना चाहती है. कांग्रेस को होने वाले एक-एक वोट का नुकसान जेडीएस को फायदे के रूप में मिलेगा.''

आसान शब्दों में कहें तो जेडीएस को अपनी सीटों के आंकड़े को 40 से बढ़ाकर 60 से ऊपर करना होगा, इसका मतलब है कि उसे कम से कम मुसलमान वोटबैंक को तो अपनी तरफ करना ही होगा.

कांग्रेस के लोग भी राहुल के बयान से नाराज़

राहुल गांधी के बयान को राजनीतिक गलियारों में मुस्लिम वोटों को जेडीएस की तरफ खिसकने से बचाने की एक कोशिश की तरह देखा जा रहा है.

लेकिन खुद कांग्रेस के लोग राहुल गांधी के बयान से खुश नज़र नहीं आ रहे.

अपना नाम प्रकाशित ना करने की शर्त पर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''जेडीएस पर इस तरह का हमला करने की कोई जरूरत नहीं थी. यह सच में दुर्भाग्यपूर्ण है. अगर हम जेडीएस को उसके हाल पर ही छोड़ दें तो वह 25 से 28 सीटों से ज्यादा जीतने में कामयाब नहीं होगी. यह हमारा अनुमान है, लेकिन अब वे वोक्कालिगा वोट को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रहे हैं.''

आधिकारिक तौर पर हालांकि कांग्रेस का कहना है कि जेडीएस एक कमजोर पार्टी है.

कांग्रेस के प्रवक्ता श्रीकांत मूर्ति कहते हैं, ''जेडीएस अपने अब तक के इतिहास में सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच गई है, यह पार्टी अब एक पारिवारिक संपत्ति से ज्यादा कुछ नहीं है.''

देवेगौड़ा ने राहुल गांधी के बयान को गैर ज़िम्मेदाराना बताया है. उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि वे कागज पर देखकर अपना भाषण न दिया करें.

80 के दशक के मध्य में देवेगौड़ा ने सिद्दारमैया के साथ मिलकर वोक्कालिगा-कुरुबा नाम से सामाजिक आधार बनाया था. इसमें सिद्दारमैया कुरुबा समुदाय से आते थे जो ओबीसी है.

आगामी चुनावों के लिए जेडीएस ने बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन किया है.

देवेगौड़ा ने साफ किया है कि उनकी पार्टी ना तो कांग्रेस ना ही बीजेपी के साथ किसी तरह का गठबंधन करेगी, इसके बदले वे विपक्ष में बैठना ज्यादा बेहतर समझेंगे.

अपनी पहचान जाहिर ना करने की शर्त पर कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने कहा, ''हम अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हैं, लेकिन अगर आने वाले 6 हफ्तों में हालात कुछ बदलते हैं और तब हमें सरकार बनाने के लिए जेडीएस के सहयोग की जरूरत पड़ती है तो वह बड़ी ही अजीब की परिस्थिति हो जाएगी. अगर ऐसा होता है तो एक बात तो तय है कि सिद्दारमैया मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे.''

हालांकि चुनाव प्रचार के बीच में कुमारास्वामी ने बीबीसी से कहा, ''इस बार त्रिशंकु सरकार बनने का सवाल ही नहीं उठता. मैं इस बार अपने दम पर सरकार बनाने जा रहा हूं.''

राहुल गांधी के इस बयान का कर्नाटक की राजनीति में आने वाले वक्त में क्या असर दिखाई देता है यह तो 15 मई को चुनाव के नतीजों के साथ ही साफ हो पाएगा.

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