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क्या इस क़ानून के बाद कोई सेक्स वर्कर से शादी करेगा?
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
" मुझे और पुष्पा को एक महिला ने 80 हज़ार रुपए में महाराष्ट्र के भिवंडी में बेच दिया था. हमने बहुत गुहार लगाई. लेकिन किसी को हम पर दया नहीं आई. पुष्पा तो विकलांग थी. तस्कों ने पुष्पा को भी नहीं छोड़ा. रोज पुरुषों का मन बहलाने के लिए कहा जाता था. 'न' कहने की गुंजाइश नहीं थी, क्योंकि ऐसा करने पर वो हमारी आंखों में मिर्च डाल देते थे."
ये कहानी रमा की है. 12 साल की उम्र में रमा की शादी हो गई थी. ससुराल में, बेटा न पैदा करने की वजह से उसका बहुत शोषण हुआ.
तंग आ कर रमा मायके आ गई. लेकिन वहां उसकी दोस्त की दोस्त ने उसके साथ धोखा किया और रमा मानव तस्करों के हाथ लग गई.
बहुत मुश्किल से रमा साल भर बाद उनके चंगुल से भाग निकली. लेकिन आज तक उसकी तस्करी करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
मानव तस्करी की नई परिभाषा
भविष्य में किसी और रमा या पुष्पा के साथ ऐसा न हो इसलिए महिला एंव बाल कल्याण मंत्रालय ने मानव तस्करी के ख़िलाफ़ नया विधेयक बनाया है.
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) बिल, 2018 को मंजूरी भी दे ही है.
इस बिल में तस्करी के सभी पहलूओं को नए सिरे से पहली बार परिभाषित किया गया है.
नई परिभाषा के मुताबिक तस्करी के गंभीर रूपों में जबरन मज़दूरी, भीख मांगना, समय से पहले जवान करने के लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन या हॉर्मोन देना, विवाह या विवाह के लिए छल या विवाह के बाद महिलाओं तथा बच्चों की तस्करी शामिल है.
बच्चों की तस्करी और बाल मज़दूरी पर सालों से काम करने वाले कैलाश सत्यार्थी के मुताबिक वक्त के साथ नए क़ानून की ज़रूरत सबसे ज़्यादा महसूस की जा रही थी.
उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में मानव तस्करी संगठित अपराध के तौर पर किया जाने लगा था. इसलिए और ज़्यादा ख़तरनाक हो गया था.
नए क़ानून में क्या नया है?
नए बिल में कई नए प्रावधान किए गए हैं :
- पीड़ितों, शिकायतकर्ताओं और गवाहों की पहचान को गोपनीय रखना
- 30 दिन के अंदर पीड़ित को अंतरिम राहत और चार्जशीट दायर करने के बाद 60 दिन के अंदर पूरी राहत देना
- एक साल के अंदर अदालत में सुनवाई पूरी करना
- पकड़े जाने पर कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र क़ैद की सजा और एक लाख रुपए का जुर्माना
- पहली बार मानव तस्करी में शामिल होने पर सम्पत्ति ज़ब्त करने का अधिकार
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी ( एनआईए) को तस्करी विरोधी ब्यूरो बनाना
- इतना ही नहीं पीड़ितों के लिए पहली बार पुनर्वास कोष भी बनाया गया है, जो पीड़ितों के शारीरिक, मनोवैज्ञानिक समर्थन और सुरक्षित निवास के लिए होगा.
लेकिन मानव तस्करी के शिकार लोगों की लड़ाई लड़ने वाली वकील अनुजा कपूर को फिर भी ये क़ानून अब भी ठीक नहीं लग रहा. वो इस क़ानून को सही तरीके से लागू होते देखना चाहतीं हैं.
अनुजा कपूर का कहना है, "ऐसा क़ानून केवल कागज़ का टुकड़ा भर है जब तक समाज का बड़ा वर्ग तस्करी से प्रभावित लड़के-लड़कियों के पुनर्वास के लिए खुद आगे नहीं आते."
उनके मुताबिक पुनर्वास का मतलब ये है कि तस्करी कर लाई गई लड़की की शादी हम अपने बेटे से कराने की हिम्मत रखे. पुनर्वास का मतलब है तस्करी के बाद, यौन कर्मी की तरह काम करने वाले लड़के और लड़की को अपने घर पर नौकरी देने की हिम्मत रखें, अपने बच्चों से उनकी शादी करने की हिम्मत दिखाएं.
अनुजा का मानना है कि इस देश में सनी लियोनी को स्वीकार कर लेने का मतलब ये नहीं है कि भारतीय किसी भी गरीब मानव तस्करी से छुड़ाई गई लड़की को भी स्वीकार कर लेंगे?
मानव तस्करी - कितना बड़ा अपराध
केन्द्र सरकार के मुताबिक, मानवाधिकारों के उलंघन के मामले में मानव तस्करी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा अपराध है.
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2016 में मानव तस्करी के कुल 8132 आंकड़े सामने आए थे जबकि 2015 में इनकी संख्या 6,877 थी.
राज्यों की बात करें तो 2016 में मानव तस्करी के सबसे ज़्यादा मामले पश्चिम बंगाल से सामने आए. दूसरे नम्बर पर राजस्थान और तीसरे नंबर पर गुजरात था.
मानव तस्करी रोकने के लिए इससे पहले देश में ऐसा कोई क़ानून नहीं था.
भारत सरकार का दावा है कि इस कानून को बनाने के लिए राज्य सरकार, स्वयं सेवी संगठनों और क्षेत्र के जानकारों से मदद ली गई है.
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