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क्या भूटान वाकई चीन के क़रीब जा रहा है?
- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हिमालय की पहाड़ियों में बसा भूटान तीन ओर से भारत से लगा है और उसके ऊपर चीन है. एशिया की दो शक्तियों भारत और चीन के बीच में बसा क़रीब आठ लाख की आबादी वाला यह राजशाही देश भारत के अधिक क़रीब रहा है.
भारत और भूटान के बीच एक बेहद ख़ास रिश्ता है जिसमें भारत भूटान के बड़े भाई की तरह नज़र आता रहा है. भूटान की अंतरराष्ट्रीय, वित्तीय और रक्षा नीति पर भारत का प्रभाव है. दोनों देशों के बीच 1949 में फ्रेंडशिप ट्रिटी हुई थी. इसके तहत भूटान को अपने विदेशी संबंधों के मामले में भारत को भी शामिल करना होता था. 2007 में इस समझौते में संशोधन हुआ था.
भारत और भूटान के बीच 605 किलोमीटर लंबी सीमा है और भारत भूटान का सबसे बड़ा व्यापार सहयोगी देश भी है. भूटान अपने 98 प्रतिशत निर्यात भारत को करता है और क़रीब 90 प्रतिशत सामान भी भारत से ही आयात करता है. भारतीय सेना भूटान की शाही सेना को प्रशिक्षण देती रही है.
लेकिन हाल के दिनों में चीन के भूटान से नज़दीकी बढ़ाने की कोशिशें करने की रिपोर्टें आई हैं. सरकार ने संसदीय समिति के सामने कहा है कि भारत चीन और भूटान के बीच रिश्तों पर नज़र बनाए हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी ने विदेश मामलों की संसदीय समिति में प्रश्न उठाया है कि यदि भूटान चीन के साथ खड़ा होता है तो भारत क्या करेगा?
क्या भूटान भारत के मुक़ाबले चीन के अधिक करीब जा सकता है?
भूटान में भारत के राजदूत रहे और अब जनता दल यूनाइटेड से जुड़े पवन वर्मा को ऐसा नहीं लगता.
पवन वर्मा कहते हैं, "ये पहली बार नहीं है कि इस तरह की रिपोर्टों आई हों. चीन चाहेगा कि भूटान से उसके कूटनीतिक संबंध बढ़ें, उसका दूतावास वहां हैं, चीन भी भारत की तरह वहां पर लोकप्रिय होना चाहेगा. क्योंकि भूटान अपनी एक अलग और महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थिति है."
वो कहते हैं, "जितना भारत के लिए भूटान के साथ अच्छे संबंध रखना ज़रूरी है उतना ही चीन के लिए भी भूटान से बेहतर संबंध रखना ज़रूरी है. लेकिन अभी तक भूटान ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध तक कायम नहीं हो पाए हैं. ऐसे में भूटान के चीन के क़रीब जाने की रिपोर्ट भरोसेमंद नहीं लगती."
भारत के लिए बेहद अहम है भूटान
भारत के लिए भूटान से संबंध बेहतर बनाए रखना क्यों ज़रूरी है इसके जवाब में वर्मा कहते हैं, "ये नक़्शे पर भूटान की स्थिति को देखकर ही समझा जा सकता है. जहां भूटान है वहां हमारे लिए और हमारी सुरक्षा के लिए और रणनीतिक बढ़त के लिए भूटान के साथ संबंध बनाए रखना बेहद अहम है. यही वजह है कि भारत के विश्व में सबसे अच्छे संबंध भूटान से ही हैं."
वर्मा कहते हैं, "भले ही भूटान की आबादी कम हो लेकिन उसका इलाक़ा बड़ा है. भारत के साथ उसकी लंबी सीमा है. इसलिए भारत के लिए भूटान का महत्व अलग है."
वर्मा कहते हैं, "भूटान एक स्वतंत्र और स्वायत्त देश है और उसे किसी भी मायने में भारत के अधीन समझना ये समझना कि वो हमेशा भारत के साथ ही जुड़ा रहेगा ये परिपक्व कूटनीतिक विचार नहीं है."
"भूटान और चीन के बीच यदि कोई बात हो भी रही है तो उससे ये अनुमान लगा लेना सही नहीं है कि भूटान अब चीन के ज़्यादा करीब पहुंच गया है."
कई देशों में भारत के राजनयिक रहे और भारतीय कूटनीति की गहरी समझ रखने वाले लखन लाल मेहरोत्रा कहते हैं कि भूटान बीच-बीच में चीन से बात करता रहा है और भारत को इसकी जानकारी रही है.
मेहरोत्रा कहते हैं, "भूटान और चीन के बीच हुईं वार्ताओं के आधार पर ही ये समझौता हुआ था कि दोनों में से कोई भी देश डोकलाम में जो वास्तुस्थिति है उसे बदलने की तब तक कोशिश नहीं करेगा जब तक कि उसका निर्णय नहीं हो जाएगा. ये नतीजा भी भूटान और चीन के बीच बातचीत से ही निकला था और भारत ने कभी भी इस पर आपत्ति नहीं जताई है."
सतर्क रहे भारत
मेहरोत्रा कहते हैं, "कभी कभी ऐसा होता है कि भूटान चीन से बात शुरू करता है और अफ़वाहें शुरू हो जाती हैं कि भूटान चीन की ओर जा रहा है. भूटान और भारत हमेशा से समीप रहे हैं और भारत का कभी ये प्रयास नहीं रहा है कि भूटान के लिए अंतरराष्ट्रीय जगत के दरवाज़े बंद हो."
मेहरोत्रा याद करते हैं, "भूटान जब संयुक्त राष्ट्र में जाना चाहता था तब भी भारत ने यही तय किया था कि भूटान को विश्व के संपर्क से अलग नहीं रखा जा सकता. वहीं चीन दुनिया की एक बड़ी ताक़त है ऐसे में ये सोचना कि भूटान का चीन से कोई संबंध ही नहीं होगा, ये नामुमकिन है. भूटान चीन से रिश्ते बनाने में भी हमेशा भारत को साथ लेकर चला है और भूटान के इस रूख में परिवर्तन नहीं दिखता है."
मेहरोत्रा ये भी कहते हैं कि यदि भूटान भारत से छिपाकर चीन से बातचीत कर रहा है और उसका भारत को कोई अंदाज़ भी नहीं है तो भारत को सतर्क होना पड़ेगा और आगे क्या करना है इस बारे में भी सोचना पड़ेगा.
ताक़त बढ़ा रहा है चीन
मेहरोत्रा कहते हैं कि हिंद महासागर क्षेत्र में जहां-जहां भारत के मैत्री संबंध हैं वहां-वहां चीन की नज़र है. महरोत्रा कहते हैं, "जहां जहां भारत के संबंध हैं वहां वहां पहुंचने की चीन भरसक कोशिश कर रहा है. वो भारत के चारों ओर ऐसी दीवार खड़ी करना चाहता है जिससे भारत के प्रभाव क्षेत्र को सीमित किया जा सके. इस क्षेत्र में चीन की अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें भी स्पष्ट हैं."
मेहरोत्रा कहते हैं, "चीन ने सबसे पहले म्यांमार को अपने क़रीब लाने की कोशिश की. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक, राजनयिक और सैन्य संबंध बने. खासतौर पर नौसेना के क्षेत्र में चीन ने अपना दबदबा बनाने की कोशिश की. लेकिन बाद में जब म्यांमार को चीन के इरादे स्पष्ट हुए तो उसने फिर भारत से नज़दीकी बना ली."
मेहरोत्रा कहते हैं कि चीन एक महाशक्ति के सभी लक्षण दिखा रहा है. उसके पास आज एक ताक़तवर नौसेना है. वो दूसरे देशों से संबंधों को प्रभावित करने के लिए अपनी आर्थिक शक्ति का भी इस्तेमाल कर रहा है.
वो कहते हैं, कि चीन अपनी सैनिक शक्ति को बढ़ाकर उसका प्रदर्शन कर रहा है और देशों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.
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