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जब जस्टिन ट्रूडो ने रिंग में विरोधी पर बरसाए थे घूंसे
- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी टीवी एडिटर (भारतीय भाषाएं)
1972 की बात है जब अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने कनाडा की यात्रा के दौरान जस्टिन ट्रूडो के बारे में एक भविष्यवाणी की थी.
उस समय जस्टिन ट्रूडो चार महीने के थे और उनके पिता कनाडा के प्रधानमंत्री थे. निक्सन की बात सही साबित हुई जब 2015 में जस्टिन वाकई कनाडा के प्रधानमंत्री बने.
इन दिनों भारत आए ट्रूडो अपनी दिलचस्प शख्सियत के लिए लगातार सुर्खियों में रहते हैं.
भांगड़ा प्रेमी ट्रूडो
ट्रूडो कई दफ़ा भारतीयों का दिल चुके हैं- कभी अपने भारतीय पहनावे से तो कभी भारतीय डांस से. एक पुराने यूट्यूब वीडियो में उन्हें भारतीय लिबास में भांगड़ा की धुनों पर थिरकते देखा जा सकता है. ये वीडियो काफ़ी वायरल भी हुआ था.
वो कई बार कनाडा में मंदिर और गुरुद्वारे भी जा चुके हैं और लंगर में रोटियां बेलती उनकी फ़ोटो भी वायरल हुई थीं. दीवाली पर वो भारतीयों को ट्विटर पर दीवाली मुबारक लिखते हैं तो बैसाखी पर पंजाबी में वीडियो पोस्ट करते हैं- वसाखी दियां लख-लख वधाइयाँ.
कैबिनेट में सिख मंत्री
अमरीका के एक कार्यक्रम में ट्रूडो ने एक बार मज़ाक-मज़ाक में कहा था, "मेरे कैबिनेट में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल से ज़्यादा सिख मंत्री हैं."
उनकी कैबिनेट में चार मंत्री सिख हैं जिसमें रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन शामिल हैं. उन पर पंजाब में कट्टरपंथी विचारधारा वाले लोगों के साथ हमदर्दी रखने का आरोप लगता रहा है, हालांकि वह इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं.
बॉक्सर और जॉगर
ट्रूडो राजनीति में ही नहीं असल ज़िंदगी में भी बॉक्सिंग के ख़ूब दांव-पेंच जानते हैं और जवानी के दिनों से ही बॉक्सिंग करते आए हैं. 2012 में बॉक्सिंग के एक मुक़ाबले में अपने राजनीतिक प्रतिदंद्वी को हराना ट्रूडो के राजनीतिक करियर में नया मोड़ लेकर आया था.
2016 में ओटावा में मेक्सिको के राष्ट्रपति के साथ जॉगिंग करते ट्रूडो की तस्वीर भी काफ़ी वायरल हुई थी. इतना ही नहीं कनाडा में एक कार्टून बुक के कवर पर प्रकाशकों ने ट्रूडो को ही लिया था.
बीयर और जुराबें
ट्रूडो उन चंद राष्ट्राध्यक्षों में से एक होंगे जिनके नाम पर बीयर का ब्रांड हैं. रूस के खिलाफ़ यूक्रेन को समर्थन देने वाले ट्रूडो के सम्मान में यूक्रेन में बीयर ब्रांड है.
अपनी रंगीन जुराबों के लिए भी ट्रूडो ख़ूब जाने जाते हैं. जी-20 सम्मेलन में तो जितनी तरजीह ट्रूडो को मिली उतनी ही उनकी रंग-बिरंगी जुराबों को. यहाँ तक कि उनके मोज़ों पर एक फ़ेसबुक फ़ैन पेज भी है.
ऑफ़िस में बेबी ट्रूडो
जस्टिन ट्रूडो इंटरनेट के दुलारे माने जाते हैं. मिसाल के तौर पर जब बतौर प्रधानमंत्री वो अपने बेटे को काम पर अपने साथ प्रधानमंत्री कार्यालय लाए और उसके साथ लुका-छिपी खेल रहे थे, तो ये तस्वीरें काफ़ी मशहूर हुईं.
अप्रवासियों को कनाडा में शरण देने की अपनी नीति को लेकर भी ट्रूडो की काफ़ी प्रशंसा हुई. कनाडा में आए एक सीरियाई शरणार्थी दंपति ने तो अपने बच्चे का नाम ही जस्टिन ट्रूडो के नाम पर रख दिया था.
ट्रंप को जवाब
राष्ट्रपति ट्रंप हाथ मिलाने के अपने कड़क अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में ट्रूडो ही थे जो ट्रंप के कड़क हैंडशेक का जवाब दे पाए.
हालांकि ट्रूडो के आलोचक भी कई हैं. कई लोग उन्हें ग़ैर-अनुभवी और थोड़ा घमंडी भी कहते हैं.
फ़ेमिनिज़्म या नारीवाद के मुद्दों पर अतिवाद का रवैया अपनाने का आरोप भी उन पर लगता रहा है. मसलन उन्होंने एक महिला को टोककर कहा था कि अंग्रेज़ी शब्द मैनकाइंड नहीं पीपलकाइंड बोलना चाहिए.
भारत की बात करें तो ये ट्रूडो का पहला आधिकारिक दौरा है. हालांकि बचपन में वो भारत आ चुके हैं.
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