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बिहारः परीक्षा में इतनी ताकत क्यों झोंकती है नीतीश सरकार?
- Author, अभिमन्यु कुमार साहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार में मैट्रिक यानी दसवीं की परीक्षा बुधवार से शुरू होगी. आठ दिनों तक चलने वाली ये परीक्षा राज्य सरकार के लिए नाक का सवाल बन चुकी है.
कुछ साल पहले परीक्षा में धड़ल्ले से हो रहे कदाचार की तस्वीर ने बिहार सरकार की देश-दुनिया में ख़ूब फ़जीहत करवाई. रही-सही कसर परीक्षा के फ़र्जी टॉपरों ने पूरी कर दी.
भ्रष्टाचार और बाहुबल के दम पर बोर्ड परीक्षाओं में फ़र्जी टॉपर बनाने और परीक्षा के पहले प्रश्नपत्र लीक ने राष्ट्रीय मीडिया में ख़ूब सुर्खियां बटोरी.
इस बार भी सरकार की छवि ख़राब न हो, इसके लिए मैट्रिक परीक्षा में सरकार ने पूरी सख़्ती बरतने का फ़ैसला किया है.
सरकारी फ़रमान
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मैट्रिक के परीक्षार्थियों के जूता-मोज़ा पहनकर परीक्षा भवन आने पर रोक लगा दी है.
सरकारी फ़रमान के मुताबिक़ परीक्षार्थी चप्पल पहनकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश कर पाएंगे. इस परीक्षा में राज्यभर के 17.70 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे.
राज्य सरकार इस परीक्षा को सबसे 'बड़ा इवेंट' के रूप में देखती है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सरकार सभी 38 ज़िलों के ज़िला और पुलिस प्रशासन की पूरी ताक़त इसके सफल आयोजन में झोंकती है.
साल 2016 में हुए 'इंटर टॉपर स्कैम' में फंसे बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह की ग़िरफ़्तारी के बाद नीतीश कुमार ने बोर्ड की कमान अपने विश्वासी प्रशासकों में से एक आनंद किशोर को सौंपी थी.
फुलप्रूफ़ व्यवस्था
परिणाम ये हुआ कि परीक्षा बोर्ड की साख फिर से बनाने की कोशिश शुरू हुई.
मौजूदा अध्यक्ष आनंद किशोर की अगुवाई में हुई पहली परीक्षा में पिछले साल काफ़ी सख़्ती बरती गई, जिसका असर परीक्षा परिणामों पर देखने को मिला.
पिछली बार मैट्रिक परीक्षा में 65 फ़ीसदी छात्र फ़ेल हुए थे. परीक्षा केंद्रों में कदाचार न हो सके, इसके लिए राज्य पुलिस के अलावा विशेष पुलिस बल की मदद ली गई थी.
प्रश्नपत्र लीक के लिए फुलप्रूफ व्यवस्था भी की गई थी. बावजूद इसके सोशल मीडिया और व्हॉट्सऐप पर प्रश्नपत्र लीक होने की ख़बरें ख़ूब मिली थी.
इस बार ऐसे हालात न पैदा हो, इसके लिए बोर्ड ने एक बार फिर कमर कस ली है. परीक्षा केंद्रों में स्मार्ट फ़ोन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है.
केंद्राधीक्षक, निरीक्षकों और यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों को बिना कैमरे वाले साधारण फ़ोन इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं.
परीक्षा बोर्ड ने सभी केंद्राधीक्षकों को फीचर फ़ोन ख़रीदने के लिए 1200 रुपए देने का फ़ैसला किया है.
कैमरे के साये में...
परीक्षार्थियों पर नज़र रखने के लिए परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पूरी परीक्षा की वीडियोग्राफी की जाएगी.
कई तरह की सख़्ती बरतने के बावजूद इस साल 12वीं की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक के मामले सामने आए.
स्थानीय पत्रकार रिंकू झा के मुताबिक़ इस साल इंटर परीक्षा के दौरान कई ज़िलों से बायोलॉजी और फिजिक्स के प्रश्नपत्र लीक हुए थे.
उन्होंने बताया कि व्हॉट्सऐप पर प्रश्नपत्र वायरल न हो, इसके लिए परीक्षा बोर्ड ने इस तरह के मैसेज को फॉरवर्ड करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद इस तरह के मामले कम आएं.
प्रश्न पत्र लीक का मामला
बिहार में परीक्षाओं के दौरान अक्सर विवाद होते हैं. हाल ही में आईटीआई की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक हुए थे.
पिछले साल बिहार कर्मचारी चयन आयोग पर बड़े स्तर पर प्रश्न पत्र लीक का मामला सामने आया था, जिसमें आयोग के अध्यक्ष को गिरफ़्तार किया गया था.
राज्य में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाली बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा परिषद भी कई बार सवालों के घेरे में रही है.
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