You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
BBC SPECIAL: राष्ट्र रक्षा महायज्ञ की पूजन विधि एवं महात्म्य
- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
देश को आंतरिक और बाहरी ताकतों से बचाने के लिए बीजेपी के पूर्वी दिल्ली से सांसद महेश गिरी राष्ट्र रक्षा महायज्ञ का आयोजन कर रहे हैं.
ये महायज्ञ 18 से 25 मार्च तक होगा. यज्ञ में इस्तेमाल के लिए जल, मिट्टी, घी सभी का इंतज़ाम देश की जनता से ही करने की योजना है.
राष्ट्र रक्षा महायज्ञ की विधि
सबसे पहले महायज्ञ में कुंड की स्थापना के लिए जल और मिट्टी की जरूरत पड़ेगी.
इसके लिए खुद गृह मंत्री ने सबसे पहला इंतज़ाम किया है. बुधवार को डोकलाम, सियाचिन, पुंछ और वाघा बॉर्डर पर देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रथ रवाना किए हैं.
बीजेपी सांसद महेश गिरी ने इसकी जानकारी देते हुए बीबीसी को बताया कि राजनाथ सिंह ने जो रथ रवाना किए हैं वो सांकेतिक थे. दरअसल, उनके कार्यकर्ता खुद इन सीमाओं पर जाकर वहां की मिट्टी और जल लेकर दिल्ली लौटेंगे.
महेश गिरी के मुताबिक, "सियाचिन और डोकलाम से जल-मिट्टी लाना आम आदमी के बस की बात नहीं इसलिए मैंने आईटीबीपी के डीजी से खुद संपर्क किया है ताकि इस यज्ञ में उन्हें भी हिस्सेदारी मिल सके."
देश के सीमा से एकत्र की गई मिट्टी से राष्ट्र रक्षा महायज्ञ की शुरुआत की जाएगी, महायज्ञ का पूरा इंतज़ाम श्री योगिनी पीठम की ओर से हो रहा है.
चारों धाम से मिट्टी लाने की विधि
सीमा से सटे इलाक़ों के अलावा देश के चारों धाम--बद्रीनाथ, द्वारकाधीश, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम--से भी मिट्टी लायी जाएगी. चार मार्च तक जल, मिट्टी लाने की विधि पूरी कर ली जाएगी.
कुंड के इंतज़ाम के बाद बारी होगी, आहुति के लिए घी जुटाने की, इसके लिए शुरू होगा 'घी रथ यात्रा' अभियान.
इसके लिए देश के अलग-अलग शहरों में रथ चलाए जाएंगे. श्री योगिनी पीठम के कार्यकर्ता हर घर से रथ में एक चम्मच घी डलवाएंगे. फिर इस घी का इस्तेमाल यज्ञ में किया जाएगा.
आप चाहें तो पेटीएम के जरिए भी 11 रुपये दान करके अपने नाम का 'घी दान' कर सकते हैं. यज्ञ की शुरुआत में आपके नाम की आहुति डाल दी जाएगी.
'नेहरू युग में हुआ ऐसा यज्ञ'
महायज्ञ में मां पराम्बा भगवती बगलामुखी की अराधना की जाएगी, महेश गिरी के मुताबिक, भगवती बगलामुखी राज व्यवस्था की देवी है.
वेद पुराण में भी उनका जिक्र है, महेश गिरी के मुताबिक, "भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा सब, मां बगलामुखी के उपासक थे. ग्वालियर के पास दतिया में उनका पीठ भी है."
देश के इतिहास में इससे पहले कभी इस तरह का यज्ञ हुआ है, इस सवाल के जवाब में महेश गिरी कहते हैं, "बगलामुखी दतिया पीठ में भारत-चीन युद्ध के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी यही यज्ञ करवाया था. उस समय 51 कुण्ड में हवन हुआ था."
हालाँकि नेहरू के दौर में ऐसा किसी यज्ञ होने की कोई प्रामाणिक जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है.
लालकिला में होगा महायज्ञ
भारत को उस युद्ध में चीन से पराजय का सामना करना पड़ा था. तो फिर उसी यज्ञ को दोबारा करने से राष्ट्र रक्षा कैसे होगी?
इस सवाल के जवाब में महेश गिरी कहते हैं, "नेहरू के यज्ञ की समाप्ति के तुरंत बाद ही चीन की सेना सीमा छोड़ वापस लौट गई थी. चीन चाहता तो सेना को देश के और अंदर भेज सकता था."
महायज्ञ दिल्ली के लाल किला मैदान में होगा. 1,111 ब्राह्मण इसमें हिस्सा लेंगे. इसकी शुरुआत पंडित ब्रह्म ऋषि चन्द्र मणि मिश्रा करेंगे, जो खुद भगवती बगलामुखी के उपासक हैं.
यज्ञ में तकरीबन 2.25 करोड़ मंत्र का उच्चारण किया जाएगा.
यज्ञ का मकसद क्या?
देश में न तो गृह युद्ध का माहौल है और न ही चुनाव का. देश में आम चुनाव 2019 में होना है. तो फिर इस यज्ञ का मक़सद क्या है?
महेश गिरी के मुताबिक इस महायज्ञ में आठ संकल्प लिए जाएंगे, जिसके बाद अपने आप ही देश सुरक्षित हो जाएगा. ये संकल्प हैं--
- महिला के सम्मान का
- संविधान की रक्षा का
- हर नागरिक के वोट करने का
- पर्यावरण बचाने का
- स्वच्छ भारत रखने का
- भ्रष्टाचार से मुक्ति का
- और आख़िर में आतंकवाद, संप्रदायवाद और जातिवाद से मुक्ति का संकल्प.
ये संकल्प मिस्ड कॉल के ज़रिए भी लिए जा सकेंगे. राष्ट्र रक्षा के इस महायज्ञ में आहुति देने के लिए देश के प्रधानमंत्री से लेकर जनता तक सभी को निमंत्रण है.