You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
राहुल बोले- भागवत का बयान शर्मनाक, संघ की सफाई
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के कथित तौर पर सेना से संघ की तुलना से जुड़े एक बयान पर बहस शुरू हो गई है.
कांग्रेस ने भागवत के बयान को 'हर भारतीय का अपमान' बताते हुए इसकी निंदा की है. वहीं विवाद होने के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सफाई देते हुए कहा है कि भागवत के बयान को ग़लत तरीके से पेश किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने भी भागवत के बयान का बचाव करते हुए कहा है कि 'सेना का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए'.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को ट्विटर पर लिखा कि मोहन भागवत को सेना का अपमान करने पर 'शर्म आनी चाहिए'.
राहुल गांधी ने कहा है, "संघ प्रमुख का भाषण हर भारतीय का अपमान है क्योंकि ये उनका असम्मान करता है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी. ये हमारे झंडे का अपमान है क्योंकि ये हर जवान का अपमान करता है जिन्होंने हमारे झंडे को सलाम किया था. भागवत जी को शर्म आनी चाहिए क्योंकि उन्हें हमारे शहीदों और सेना का अपमान किया है."
आख़िर क्या बोले भागवत?
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर में दिए एक भाषण में कहा, "हम मिलिट्री संगठन नहीं हैं. मगर मिलिट्री जैसा अनुशासन हमारे अंदर है. और अगर देश को ज़रूरत पड़े और देश का संविधान, कानून कहे तो सेना तैयार करने को छह-सात महीने लग जाएंगे. संघ के स्वयं-सेवकों को लेंगे तो तीन दिन में तैयार हो जाएगा. ये हमारी क्षमता है."
संघ ने दी सफाई
भागवत के बयान पर बहस शुरू होने के बाद संघ की ओर से स्पष्टीकरण जारी किया गया है.
संघ नेता डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा है, "मोहन भागवत जी के वक्तव्य को ग़लत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है. यह सेना के साथ तुलना नहीं थी बल्कि ये सामान्य समाज और स्वयंसेवकों के बीच में तुलना थी. दोनों को भारतीय सेना को ही तैयार करना होगा."
बचाव में उतरी सरकार
इसके साथ ही गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने भी ट्वीट करते हुए कहा है, "भारतीय सेना हमारा सम्मान है. आपातकालीन स्थितियों में (कांग्रेसी आपातकाल में नहीं) हर भारतीय को सैन्य बलों के साथ खड़ा रहना चाहिए. भागवत जी ने बस इतना कहा है कि किसी को भी सेना के लिए तैयार होने में छह से सात महीनों का समय लगेगा लेकिन अगर संविधान इजाज़त दे तो आरएसएस के स्वयंसेवकों में योगदान देने की क्षमता है."
रिजिजू ने अपने ट्वीट में ये भी कहा है, "भारतीय सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत किसने मांगे थे? भारतीय सेना के राजनीतिकरण की कोशिश नहीं कीजिए. कांग्रेस ने साल 2004 में धार्मिक आधार पर सैनिकों की गिनती कराने की कोशिश की थी लेकिन सेना ने अपना धरातल मजबूती से थामे रखा."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉयड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)