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कैराना सांसद हुकुम सिंह का निधन, पीएम ने जताया शोक
उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हुकुम सिंह का शनिवार को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी मृत्यु पर शोक जताया है. हुकुम सिंह मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद लोकसभा चुनाव भारी मतों से जीते थे.
प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा है कि उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेता और सांसद हुकुम सिंह ने राज्य के लोगों और किसानों की बेहतरी के लिए काम किया.
सांसद हुकुम सिंह का निधन नोएडा के जेपी अस्पताल में हुआ. वे काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे.
हुकुम सिंह चर्चा में तब आए थे जब साल 2013 में मुज़फ्फरनगर दंगे के बीच उन्होंने कथित तौर पर 'नफ़रत भरे बयान' दिए. हालांकि शामली में और उत्तर प्रदेश की विधानसभा में उन्हें एक 'सुलझा हुआ' और 'गंभीर' वक्ता माना जाता था.
बीबीसी से बातचीत में हुकुम सिंह ने कहा था, "मैं अब भी कह रहा हूँ कि कैराना से हो रहे पलायन का मामला सांप्रदायिक नहीं है. यह क़ानून व्यवस्था का मुद्दा है. लोग इसे सांप्रदायिक मुद्दा इसलिए बनाना चाहते हैं ताकि उन गुंडों को संरक्षण मिल सके."
कौन थे हुकुम सिंह?
कई बार विधायक रहने और संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद भी हुकुम सिंह केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी जगह नहीं बना पाए थे.
साल 2009 में लोकसभा चुनाव हारने वाले हुकुम सिंह मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद लोकसभा चुनाव भारी मतों से जीते थे.
हुकुम सिंह ने कानून की पढ़ाई करने के बाद उत्तर प्रदेश की न्यायिक सेवा की परीक्षा भी पास की थी.
लेकिन इसके बाद उन्होंने जज बनने की जगह सेना में जाना बेहतर समझा और 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध में हिस्सा भी लिया.
फ़ौज से रिटायर होने के बाद हुकुम सिंह वकील बन गए और 1974 में राजनीति में सक्रिय हो गए.
हुकुम सिंह ने राजनीतिक सफ़र कांग्रेस के साथ शुरू किया था. कांग्रेस के टिकट पर ही वो दो बार विधायक चुने गए थे.
फिर उन्होंने जनता पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ा और विधायक चुने गए. वो 1995 में भाजपा में शामिल हो गए और चार बार विधायक रहे.
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