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जेटली के बजट 2018 पर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी सरकार का आख़ीरी पूर्ण बजट पेश किया.
उम्मीद की जा रही थी कि यह बजट लोक-लुभावन होगा. लेकिन उनका झुकाव किसानों और ग्रामीण इलाक़ों को राहत देने की तरफ़ अधिक था और इस में कोई दो राय नहीं कि बदहाल कृषि क्षेत्र को समर्थन देना फिलहाल आर्थिक और नैतिक ज़रूरत थी.
लेकिन वेतनभोगी मध्यवर्ग को बजट से जिस तरह की उम्मीदें थी वो पूरी नहीं हुईं. इस वर्ग को निराश करते हुए इनकम टैक्स के स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
विशेषज्ञ बता रहे हैं कि बजट 2018-19 से लोगों पर क्या होगा असर
मुद्रा ऋण योजना
वित्त वर्ष 2018-19 में इस योजना के तहत अतिरिक्त 3 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
चार्टर्ड एकाउंटेंट और पर्सनल फ़ाइनेंस में विशेषज्ञता रखने वाले डी के मिश्रा का कहना है कि एमएसएमई कारोबार के लिए यह एक अच्छा प्रोत्साहन है.
फ्लैगशिप हेल्थकेयर प्रोटेक्शन कार्यक्रम के तहत 10 करोड़ परिवार को 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर मिलेगा.
डी के मिश्रा कहते हैं, "यह स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष रूप से गरीब तबके के लिए एक बड़ा गेम चेंजर होगा. गरीबों और अब तक यह एक विकास बजट है, एक लोकलुभावन बजट जिसमें समाज के अधिकांश वर्गों को कवर किया गया है.
स्वास्थ्य बीमा
बैंक बाज़ार के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं, "हर साल पांच लाख रुपये प्रति परिवार एक बड़ी रकम है और 50 करोड़ लोगों तक इसे पहुंचाने का लक्ष्य भी बड़ा है. इससे मेडिकल बीमा के लिए जबरदस्त जागरूकता पैदा होगी जैसे कि जन धन योजना के अंतर्गत हर भारतीय का बैंक खाता बनाया गया था."
वो कहते हैं, "इससे हर भारतीय स्वास्थ्य बीमा के लिए प्रेरित होगा."
डी के मिश्रा कहते हैं, "वेतनभोगियों और मध्यम वर्ग के लिए बजट निराशाजनक था. किसानों और गरीबों को बड़ी इसमें राहत मिली. लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट गेन पर टैक्स से निवेश पर इससे असर पड़ेगा. इंफ्रा और रक्षा में भी बड़ा आवंटन किया गया है."
"शिक्षा और हेल्थ पर एक फ़ीसदी सेस लगाने से टैक्स देने वालों पर अतिरिक्त भार पड़ जाएगा. चिकित्सा उपचार के लिए वरिष्ठ नागरिकों को फौरी राहत के अलावा डायरेक्ट टैक्स पर कोई खास घोषणा नहीं की गई है."
कॉरपोरेट टैक्स
डी के मिश्रा ने बताया कि कॉरपोरेट टैक्स का दायरा व्यापक कर दिया गया है. इसके तहत जो कंपनियां पहले 25 करोड़ के टर्नओवर करती थीं अब इसमें 250 करोड़ तक के टर्नओवर पर भी 25 फ़ीसदी ही टैक्स लगेगा.
आयकर
टैक्समैन के डायरेक्टर राकेश भार्गव कहते हैं, "पर्सनल टैक्स पर वित्त मंत्री के प्रस्ताव उम्मीदों के विपरीत हैं. टैक्स देने वाले लोगों के लिए कुछ भी असाधारण प्रस्तावित नहीं किया गया है."
"आयकर की टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. छूट की सीमा को बढ़ाये जाने की उम्मीद की जा रही थी. साथ ही वेतनभोगियों को भी राहत के आसार थे. इसके अलावा, शिक्षा सेस की दर को तीन फ़ीसदी से बढ़ाकर चार फ़ीसदी कर दिया गया. इससे टैक्स का बोझ बढ़ेगा."
केपीएमजी इंडिया के पार्टनर और प्रमुख निलय वर्मा का कहना है, "केंद्रीय बजट 2018-19 एकीकृत समाज सुधार पर केंद्रित है. कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, महिलाओं पर प्रस्ताव लागू होंगे तो इससे आय और लिंग भेद में मदद मिलेगा."
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