अपने हिंसक इतिहास को इस तरह याद करते हैं देश

    • Author, फ़िओना मैकडोनल्ड
    • पदनाम, बीबीसी कल्चर

'मुझे किसी भी क़ीमत पर युद्ध और राजनीति को पढ़ना और समझना होगा, ताकि मेरे बच्चों को गणित और दर्शनशास्त्र पढ़ने की आज़ादी मिल सके'

अमरीका के दूसरे राष्ट्रपति जॉन एडम्स का ये मशहूर बयान हमारी ज़िंदगी में जंगों की अहमियत को साफ़ बताता है.

एडम्स के बरक्स, अमरीका के ही पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने युद्ध के बारे में कहा था-

'शांति को बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीक़ा है, युद्ध के लिए हमेशा तैयार रहना'

यानी अमरीका के ही पहले दो राष्ट्रपतियों ने जंग को अलग-अलग नज़रिए से देखा. एक के लिए युद्ध मजबूरी है, आने वाली नस्लों की बेहतरी के लिए. वहीं, दूसरे के लिए जंग के लिए तैयार रहना, अमन की गारंटी देता है.

देखा जाए तो दुनिया आज जिस रूप में दिखती है. जितने मुल्क़ों में बंटी है. जितनी सरहदें इस पर खिंची हैं, इनका वजूद भी बहुत सी लड़ाइयों और जंगों के बाद हुआ है.

आज भी दुनिया के ताक़तवर मुल्क़ दूसरे देशों को अपनी एटमी ताक़त, हथियारों की ताक़त के बूते धमकाते रहते हैं.

इंसान जब जंगलों में रहता था तो अपने ही जंगल में रहने वाले दूसरे जानवरों और अपनी तरह के दूसरे लोगों से उसकी लड़ाई होती थी.

जो बाज़ी मार ले जाता था उसका दबदबा हो जाता था.

इसी तरह जब क़बीले बने तो उनमें भी वर्चस्व की लड़ाइयां होने लगीं. और, जब अलग अलग देश बने तो उनमें भी आपस में लड़ाइयां होती रहीं.

बीसवीं सदी में तो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बहुत सी जंगे हुईं. इसी दौरान दो विश्व युद्ध भी हुए, जिसमें कई देश अलग-अलग खेमों में बंटकर लड़े. करोड़ों लोगों की जान चली गई.

हर देश अपने युद्धों की मेडल की तरह नुमाइश करता है. उसकी याद के तौर पर कोई स्मारक या फिर म्यूज़ियम बना लिया जाता है.

हिंसक इतिहास की दास्तां

दुनिया के लगभग हरेक देश में वॉर म्यूजियम हैं. इन्हीं की कुछ तस्वीरें अपने कैमरे में क़ैद की हैं ब्रिटेन के फ़ोटोग्राफ़र जैसन लार्किन ने. उन्होंने हाल ही में इन तस्वीरों की नुमाइश लंदन में की है.

इन तस्वीरों के ज़रिए जैसन ने ये बताने की कोशिश की है कि जंग करने वाले देश कैसे अपने हिंसक इतिहास को याद करते हैं और नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं.

जैसन लार्किन इस साल के अंत तक इन तस्वीरों को एक किताब की शक्ल में लाने की तैयारी कर रहे हैं. लार्किन ने इन तस्वीरों को 2008 से 2016 के बीच अलग-अलग देशों के अपने दौरे में खींचा था.

उन्होंने मिस्र, इज़रायल, ब्रिटेन, अमरीका और वियतनाम जैसे देशों में जाकर वहां के युद्ध स्मारकों की तस्वीरें ली. सभी जगह उन्हें एक बात सामान्य लगी, वो ये कि हरेक देश लड़ाई और लड़ाई में हुई जीत को अपनी शान समझता है.

हालांकि, इस बात को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सबका अपना अलग तरीक़ा है.

लार्किन जब इज़रायल में थे तो उन्होंने पाया कि इज़रायल की तरक़्क़ी और इतिहास दोनों में काफ़ी विरोधाभास है.

जिस तरह इज़रायल ने अपने यहां म्यूज़ियम तैयार किए हैं उससे वो देश अपनी नई पीढ़ी को संदेश देना चाहता है कि विरोधी ताक़तों से लोहा लेते हुए उनके देश ने तरक़्क़ी की है. जबकि सच्चाई क्या है ये सारी दुनिया जानती है.

इसी तरह क्यूबा में जितने लोगों ने वहां की क्रांति में योगदान देते हुए अपनी जान गंवाई, उन सभी से जुड़ी चीज़ें हवाना के युद्ध स्मारक में मौजूद हैं. उनकी याद में वहां शहीद स्मारक बना दिए गए हैं. ये शहीद उनके लोक नायक हैं.

वियतनाम के इतिहास में वहां हुईं कई लड़ाइयां काले धब्बों की तरह हैं. वियतनाम की लड़ाई की तस्वीरों ने सारी दुनिया में कोहराम मचा दिया था. ये तस्वीरें चीख़-चीख़ कर इस देश की तबाही का दर्द बयान कर रही थीं. लेकिन, इन दर्दनाक लम्हों को इस देश ने अपने यहां म्यूज़ियम की शक्ल में ज़िंदा रखा है.

युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और टैंकों के अलावा कलाकृतियों के माध्यम से युद्ध का पूरा मंज़र बयान किया गया है. वियतनाम में ऐसे बहुत से म्यूज़ियम हैं. इन सभी में जंग में वियतनाम के रोल को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है.

ब्रिटेन का इम्पीरियल वॉर म्यूज़ियम भी कुछ इसी तरह का है. हालांकि, इस म्यूज़ियम में इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान की हालिया लड़ाइयों की कोई झलक नहीं है.

म्यूज़ियम में मनोरंजन का इंतज़ाम

वैसे तो ज़्यादातर वॉर म्यूज़ियम सिर्फ़ देखने भर के होते हैं. लेकिन, ब्रिटेन के वॉर म्यूज़ियम में मनोरंजन का इंतज़ाम भी है. यहां प्रदर्शनी के लिए जो वॉर मशीनरी लगाई गई है वो काफ़ी बड़ी है.

यहां आने वालों के लिए एयर शो आयोजित किए जाते हैं. इनमें भाग लेने वालों को मज़ा भी आता है. ऐसे एयर शो के ज़रिए लोगों को देश के वीरों की वीरता से रूबरू कराया जाता है.

जैसन लार्किन के मुताबिक़ कई बार इस तरह की जानकारियां लोगों को भटकाने वाली होती हैं. मिसाल के लिए जब आप म्यूज़ियम में जाते हैं तो वहां रखे हरेक हथियार की ताक़त के बारे में बताया जाता है. टैंक और तोपों की तकनीक के बार में बताने के साथ बहुत तरह के बमों के बारे में जानकारी दी जाती है.

सिर्फ बम की ताकत नहीं ये भी बताएं

लार्किन मानते हैं कि इस जानकारी को थोड़ा घुमा-फिराकर भी आने वाली पीढ़ी के सामने पेश किया जाना चाहिए. किसी बम की ताक़त का बख़ान करने के साथ ही ये भी बताना चाहिए कि इस बम से एक साथ कितने लोग मारे जाते हैं, या कितने स्कूल तबाह हो जाते हैं.

लार्किन ये तो मानते हैं कि दुनिया का वजूद बहुत सी जंगों के बाद ही हुआ है. और जब तक दुनिया है ये जंगें चलती रहेंगी. कभी हथियारों से तो कभी तकनीक की मदद से. जैसे-जैसे दुनिया तरक़्क़ी करती जाएगी युद्धों का रंग-रूप भी बदलता जाएगा. लेकिन लड़ाई चाहे जैसी हो, उसका अंत सिर्फ़ तबाही होता है.

लिहाज़ा जंगों को गुरूर और ताक़त की नुमाइश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. बल्कि, जंग से हुई तबाही और नुक़सान को याद किया जाना चाहिए. ताकि, आने वाली पीढ़ियां उससे सबक़ लें और युद्ध से बचने की कोशिश करें.

लार्किन कहते हैं कि वो वॉर म्यूज़ियम बनाने के ख़िलाफ़ नहीं हैं. लेकिन, इन म्यूज़ियमों के ज़रिए नई पीढ़ी को जो संदेश दिया जा रहा है वो सही नहीं है. जंगी जीत की इमारत बेगुनाहों के ख़ून और तबाही के मलबे पर खड़ी होती है. लिहाज़ा लड़ाइयों का ये सच नौजवान पीढ़ी को बताया जाना ज़रूरी है.

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