You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
मेहरम बिना हज जाने में किस राज्य की मुस्लिम महिलाएं सबसे आगे?
- Author, श्रीकांत बंगाले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मुस्लिम महिलाएं अब बिना किसी साथी के हज यात्रा कर सकती हैं. केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने 45 साल से अधिक की महिलाओं को इसकी अनुमति दे दी है.
फ़ैसले के बाद देश के 29 राज्यों में से 1308 से मुस्लिम महिलाओं ने इसके लिए आवेदन किए हैं.
इस साल 1308 महिलाएं बिना मेहरम यानी बिना किसी पुरुष साथी के हज के लिए जायेंगी. इनमें से 16 महिलाएं महाराष्ट्र से हैं.
बीबीसी ने नागपुर से हज पर बिना किसी पुरुष साथी के जा रही चार महिलाओं से बातें की.
क्या कहता है शरीयत?
शरीयत के अनुसार एक महिला 78 किलोमीटर से अधिक की यात्रा अकेले नहीं कर सकती. अगर उसे इससे अधिक यात्रा करनी है तो उसके साथ पुरुष साथी का होना ज़रूरी है. मेहरम का मतलब है पिता, भाई, बेटा... (जिसके साथ वो शादी नहीं कर सकती हैं).
अमानुल्लाह समिति की सिफारिश
केंद्र सरकार ने हज यात्रा के बारे में नई पॉलिसी बनाने के लिए एक समिति गठित की है. पूर्व सिविल अधिकारी अफ़ज़ल अमानुल्लाह इस छह सदस्यीय समिति के अध्यक्ष हैं. अमानुल्लाह हज समिति ने 2018 से 2022 के लिए एक मसौदा (ड्राफ़्ट) तैयार किया है. इसमें कुछ सुझाव दिए गए हैं.
45 वर्ष की आयु से अधिक महिला को पुरुष साथी के बिना हज यात्रा करने की अनुमति दी जानी चाहिए. यह अमानुल्लाह समिति का एक सुझाव था जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में इस फ़ैसले की घोषणा की. इसलिए अब वयस्क मुस्लिम महिलाएं चार के समूह बना कर बिना किसी पुरुष साथी के हज के लिए जा सकती हैं.
इस समिति ने हज सब्सिडी को रोकने की सिफ़ारिश भी की थी. मोदी सरकार ने इस सिफ़ारिश को भी स्वीकार कर लिया.
"सरकार का बढ़िया फ़ैसला"
नई नीति के मुताबिक चार महिलाओं का एक समूह हज के लिए जा सकता है और न्याजबी यूसुफ़ इसी समूह की सदस्य हैं.
वो नागपुर के सिरसी गांव की रहने वाली हैं. 68 वर्षीय न्याजबी पहली बार हज पर जा रही हैं.
वो कहती हैं, "मुझे हज में जाने का मौका मिला, बहुत खुशी हो रही है. वहां जाने की मेरी ख़्वाहिश थी जो अब पूरी होने जा रही है."
उन्होंने कहा, "हम बिना किसी पुरुष के चार महिलाएं साथ जा रही हैं. लेकिन हमें कोई डर नहीं लग रहा."
न्याजबी के बेटे आरिफ़ अगवन ने बताया, "मेरी अम्मा हमेशा हज पर जाना चाहती थीं. 1995 में मेरे अब्बा का निधन हो गया था. इसलिए वो नहीं जा सकीं, लेकिन अब वो जा सकती हैं. सरकार ने एक बढ़िया फ़ैसला लिया है."
सबसे अधिक केरल से आवेदन
भारत से करीब 1.70 लाख हाजी हर साल हज यात्रा पर जाते हैं. सऊदी अरब ने पांच हज़ार और यात्रियों की अनुमति दे दी है. इसलिए इस साल यह संख्या 1.75 लाख हो गयी है.
महाराष्ट्र से 43,804 आवेदन आए हैं. जिनमें से 16 महिलाएं बगैर किसी पुरुष साथी के जा रही हैं.
बिना पुरुष साथी के हज पर जाने के लिए सबसे बड़ी संख्या में केरल से 1,124 आवेदन आये हैं. उत्तर प्रदेश से ऐसे आवेदनों की संख्या 32, कर्नाटक से 28, तमिलनाडु से 24 तो राजस्थान से 12 है.
सबसे कम संख्या में ऐसे आवेदन मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से आए हैं. जहां से इनकी संख्या केवल चार है.
केंद्रशासित प्रदेश पुद्दुचेरी से आठ महिलाओं ने हज पर बिना मेहरम जाने का आवेदन किया है.
मुस्लिम संगठनों का विरोध
हैदराबाद से एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह फ़ैसला सऊदी हज प्रशासन का है और मोदी सरकार इसका श्रेय लेने का प्रयास कर रही है. लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम संगठन अमानुल्लाह समिति की सिफ़ारिशों का विरोध कर रहे हैं.
रज़ा अकादमी के सचिव हजरत रज़ा नूरी ने कहा, "सरकार ने महिला हाजी को बिना मेहरम जाने की इजाज़त दी है. लेकिन उन्हें ऐसा फ़ैसला नहीं देना चाहिए था क्योंकि यह परंपरा के ख़िलाफ़ है."
वो कहते हैं, "पहले तीन तलाक़ या तलाक़-ए-बिद्दत और अब हज यात्रा. केंद्र सरकार शरीयत में दख़ल कर रही है. हम इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं और मुस्लिम समुदाय में इसको लेकर जागरूकता फैला रहे हैं."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)