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एयर इंडिया: याद आएगा वो गुजरा ज़माना
- Author, त्रुषार बारोट
- पदनाम, डिजिटल लॉन्च एडिटर, बीबीसी (भारतीय भाषाएं)
मैं चार साल का था और पहली बार प्लेन में बैठा था. मैं अपनी मां के साथ बॉम्बे से लंदन फ्लाइट में यात्रा कर रहा था. हम भारत से ब्रिटेन बसने जा रहे थे.
मेरे पिता हीथ्रो हवाई अड्डे पर अंकल, आंटियों और रिश्तेदारों के साथ हमारा इंतज़ार कर रहे थे. मैं बहुत ही शर्मीला बच्चा था, जो पूरी फ्लाइट के दौरान अपनी मां से लिपटकर बैठा रहा. मैंने प्लेन में कुछ नहीं खाया.
मैं उस वक्त अधिकतर बॉर्नवीटा हॉट चॉकलेट पिया करता था. इसलिए फ्लाइट में खाने के लिए दी जा रही चीज़ों में मेरी दिलचस्पी नहीं थी. तभी फ्लाइट की एक एयर होस्टेस को मुझ पर दया आ गई. वो क्रू में किसी से बोरबॉन चॉकलेट क्रीम बिस्किट का पैकेट लेकर आई और मुझे दिया. मैंने बिना हिचक के सारे बिस्किट खा लिए. ये एयर इंडिया में उड़ान भरने की मेरी पहली यादें थीं.
इसके 35 से ज्यादा साल बाद खबरें आईं कि भारत सरकार राष्ट्रीय एयरलाइन को चार कंपनियों में बेचने की योजना बना रही है. इस खबर के आने के साथ ही एयर इंडिया से जुड़ी मेरी, मेरे परिवार और दोस्तों की कई यादें लौट आईं हैं. इनमें कुछ अच्छी हैं और तो कुछ बुरी.
दिल्ली से लंदन की यात्रा
ब्रिटेन और अमरीका में रहने वाले मेरे जानकार प्रवासी भारतीयों के समुदाय में एयर इंडिया अक्सर उपहास और शर्मिंदगी का विषय होता है.
बीते सालों में इससे जुड़ी कई कहानियां सुनी. इनमें ओवरबुक उड़ानें, यात्रियों को फंसा छोड़ दिया जाना, चेक-इन डेस्क पर गुस्से से चिल्लाते लोग, करी के दाग वाली और टूटी हुई सीटें, गंदे टॉयलेट और गुस्सैल एयर होस्टेस.
मैंने फ्लाइट में चूहे देखे जाने की कहानियां तक सुनी हैं, हालांकि मुझे कोई ऐसा शख्स नहीं मिला जिसने खुद ये देखा हो.
मैंने सोशल मीडिया पर दोस्तों से पूछा कि वो एयर इंडिया के बारे में क्या सोचते हैं और प्रतिक्रियाएं निश्चित रूप से भिन्न थीं. मेरी एक महिला मित्र, एयर इंडिया की फ्लाइट में अकेले यात्रा कर रही थीं. जब उसने अल्कोहल ड्रिंक के लिए पूछा तो उसे घूर कर देखा गया.
एक अन्य दोस्त दिल्ली से लंदन की यात्रा कर रहा था. उसे शिकायत थी कि जो फिल्म फ्लाइट में दिखाई जा रही है वो फ्रेंच भाषा में है. विमान के कर्मचारियों ने कहा कि वो अभी इसे बदल देंगे, लेकिन नहीं बदला गया. जब दोबारा शिकायत की गई तो उन्हें जवाब मिला, "सर वैसे भी फिल्म खत्म ही होने वाली है."
मेरा एक बीमार दोस्त किसी दूसरी एयरलाइन में यात्रा कर रहा था. उसने बताया कि उसकी हालत देख फर्स्ट क्लास सीट पर बैठे एक एयर इंडिया पायलट ने अपनी सीट उसे दे दी. वो खुद उसकी सीट पर जा बैठे.
इकॉनॉमी क्लास
मेरे एक दोस्त के फ्लाइट में खाना खाने से मना करने पर एक एयर होस्टेस ने गाजर का हलवा उन्हें पेश किया, जिसे दोस्त ने बड़ी कृतज्ञता से स्वीकार किया.
एयर होस्टेस का गुस्सैल होना आम बात थी. एक बार फ्लाइट में एक दोस्त ने शिकायत की कि उनके सामने बैठे शख्स ने टेक-ऑफ के दौरान सीट पीछे कर ली. इसके बाद एयर होस्टेस ने बटन दबाकर उस यात्री की सीट को सामान्य कर दिया और चेतावनी दी, "अब ऐसा मत करना, नहीं तो मैं तुम्हें प्लेन से बाहर फेंक दूंगी." इसके बाद पूरी फ्लाइट में उस यात्री ने अच्छे से व्यव्हार किया.
मेरे एक विदेशी दोस्त जिऑफ की जब फ्लाइट कैंसल हो गई तो उसे अगले दिन आने के लिए कहा गया. वो अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहा थे. उन्होंने बताया, "मैंने बड़े आराम से और दृढ़ता से चेक-इन पर मौजूद उस शख्स से कहा वो हमारे लिए फ्लाइट का इंतज़ाम करें. हमें बिज़नेस क्लास का टिकट मिला. इससे एक परेशानी हुई कि मेरे दोनों बच्चे उस साल इकॉनॉमी क्लास में दोबारा नहीं जाना चाहते थे."
एयर इंडिया में मेरी पहली फ्लाइट के 35 से ज्यादा साल के बाद, मैंने पिछले ही हफ्ते एयर इंडिया से फिर यात्रा की. मेरी ये फ्लाइट लंदन से दिल्ली तक की थी. 787 ड्रीमलाइनर में मेरे राइट साइड वाली दोनों सीटें पूरे समय खाली रहीं. मैंने पैर फैलाए और इकोनॉमी क्लास में अपने निजी इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट सिस्टम पर फिल्म देखने की तैयारी करने लगा.
चार साल की उम्र वाली वो यादें वापस लौट आईं और अपने आसपास की आधुनिकता को देखकर मैं बस मुस्कुराया.
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