मोदी सरकार लोकतंत्र और संविधान के लिए ख़तरा: जिग्नेश मेवाणी

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नौजवान दलित नेता और गुजरात के वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने दिल्ली में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र पर जमकर हमला बोला. मेवाणी की रैली के दौरान सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी थी.
दिल्ली पुलिस ने मेवाणी को रैली की इजाज़त नहीं दी थी, लेकिन आख़िर वक़्त में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी.
मेवाणी ने कहा कि संसदीय मार्ग पर उनकी युवा हुंकार रैली को अनुमति नहीं देना ही मोदी का गुजरात मॉडल है. मेवाणी ने कहा कि मोदी सरकार देश के लोकतंत्र और संविधान के लिए ख़तरा है.
मेवाणी ने कहा, ''मोदी गुजरात में आते हैं तो मुझे हिरासत में ले लिया जाता है. दिल्ली में मैं रैली करने आता हूं तो अनुमति नहीं मिलती है. देश की 125 करोड़ जनता देख रही है कि लोगों को बोलने नहीं दिया जा रहा है.''
पिछले हफ़्ते ही 37 साल के मेवाणी के ख़िलाफ़ पुणे के पास जातीय संघर्ष भड़काने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज़ की गई थी.
देखिए, मेवाणी ने रैली में क्या-क्या कहा
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मेवाणी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, ''मैं लोगों को जोड़ने की राजनीति में भरोसा करता हूं. मैं प्रेम की राजनीति में भरोसा करता हूं न कि लव-जिहाद की अफ़वाह में. अल्पेश ठाकोर, हार्दिक पटेल और मुझे गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान निशाना बनाया गया.''
मेवाणी ने दलित नेता चंद्रशेखर आज़ाद को रिहा करने की मांग की. 30 साल के आज़ाद को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में ठाकुरों और दलितों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद पिछले साल जून महीने में हिमाचल प्रदेश से गिरफ़्तार किया गया था. रैली में चंद्रशेखर आज़ाद के समर्थक भी पहुंचे थे.
इस रैली में जेएनयू के छात्र नेता रहे कन्हैया कुमार, शेहला राशिद और उमर ख़ालिद भी मौजूद थे. इसके साथ ही असम के किसान नेता अखिल गोगोई और सुप्रीम कोर्ट के वक़ील प्रशांत भूषण भी मौजूद थे.












