आधार डेटा मामले में पत्रकार पर एफ़आईआर की निंदा

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आधार कार्ड से जानकारियां लीक होने वाले अपने लेख के चलते द ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खेरा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.

यूआईडीएआई के एक अधिकारी ने भारतीय पीनल कोड की धारा 419 (ग़लत पहचान दे कर धोखा देना), 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाज़ी) और 471 (नकली दस्तावेज़ को सही बता कर इस्तेमाल करने) के तहत एफ़आईआर दर्ज करने के लिए शिकायत की थी.

इसके अलावा पत्रकार के ख़िलाफ़ आधार अधिनियम की धारा 36/37 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

बचाव में आए मीडिया संगठन

मामला दर्ज होने के बाद इस रिपोर्ट को लिखने वाली पत्रकार रचना खेरा के बचाव में कई पत्रकार संगठन सामने आए हैं. एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने एक बयान जारी कर इस एफ़आईआर की निंदा की है.

अपने बयान में संगठन ने कहा है कि ट्रिब्यून की रिपोर्ट के ख़िलाफ़ यूआईडीएआई की कार्रवाई एक तरह से धमकी देने जैसा क़दम है.

अपने बयान में संगठन ने कहा, ''यह अनुचित और अन्यायपूर्ण क़दम है, यह मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है. यूआईडीएआई को रिपोर्ट के ख़िलाफ़ केस करने की बजाय खुद पर लगे आरोपों की जांच करनी चाहिए.''

इसके साथ ही गिल्ड ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर रिपोर्टर के ख़िलाफ़ हुई एफ़आईआर को वापस ले और एक निष्पक्ष जांच करवाए.

वहीं एक अन्य मीडिया संगठन, फ़ाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफ़ेशनल ने भी ट्रिब्यून की रिपोर्टर के ख़िलाफ़ हुई एफ़आईआर की निंदा की है. फ़ाउंडेशन के निदेशक मनोज मिट्टा ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है, ''ट्रिब्यून के संवाददाता के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज करवाना एक परेशान करने वाला ट्रेंड है. आधार को लेकर पिछले एक साल में यह चौथा मामला है जब अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश की जा रही है.''

''फ़ाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल इस क़दम की निंदा करता है जिसमें सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपनी विश्वसनीयता को ताक पर रखकर आधार का बचाव कर रही है.''

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''फ़ाउंडेशन उम्मीद करता है कि न्यायपालिका जल्दी से जल्दी इसका स्वतः संज्ञान लेगी. यह बात समझ से बाहर है कि आखिर खेरा पर इस धारा के तहत आरोप कैसे लगाए जा सकते हैं जबकि उन्होंने ख़ुद आधार की विसंगतियां उजागर की हैं.''

रचना खेरा पर आधार अधिनियम 37 के तहत मामला दर्ज़ किया गया है इस पर मनोज मिट्टा ने लिखा है, ''रचना खेरा पर आधार अधिनियम की धारा 37 के तहत मामला कैसे दर्ज किया जा सकता है, जिसमें 3 साल की सजा का प्रावधान है, जबकि रचना तो वॉचडॉग जर्नलिज़्म कर रही थीं.''

'द ट्रिब्यून' के संपादक ने जताया आभार

मीडिया संगठनों द्वारा 'द ट्रिब्यून' की पत्रकार का समर्थन करने पर अख़बार के संपादक हरीश ख़रे ने आभार जताया है. उन्होंने लिखा है, ''द ट्रिब्यून इस बात पर विश्वास करता है कि हमारी ख़बरें वैध तरीके से की जाती हैं, हमारी ख़बरें जिम्मेदार पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाती हैं.''

''हमारी ख़बर आम लोगों के हितों से जुड़ी एक बेहद गंभीर समस्या पर आधारित थी, हमें इस बात का खेद है कि संबंधित अधिकारियों ने ईमानदार निष्ठा से की गई पत्रकारिता को ग़लत तरीके से लिया.''

''अपनी खोजी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने और आज़ादी की रक्षा के लिए जितने भी क़ानूनी रास्ते हमारे पास मौजूद हैं हम उन सभी का उपयोग करेंगे.''

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यूआईडीएआई ने जारी की अपनी सफ़ाई

यूआईडीएआई के क़दम को मीडिया पर हमले के रूप में बताए जाने के बाद यूआईडीएआई ने भी इस संबंध में अपनी तरफ़ से लिखित बयान जारी किया है.

यूआईडीएआई ने लिखा है कि कुछ लोगों की तरफ़ से यह बात फ़ैलाई जा रही है कि यूआईडीएआई ने एफ़आईआर दर्ज़ कर मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला किया है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है.

यूआईडीएआई के प्रेस नोट में लिखा गया है, ''हम मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, ट्रिब्यून की पत्रकार के ख़िलाफ़ हमारी तरफ़ से जो एफ़आईआर की गई है वह मीडिया पर हमला नहीं है.''

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प्राधिकरण ने आधार डेटाबेस में किसी तरह की सेंध लगाए जाने की ख़बरों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि आधार कार्ड से जुड़ा बायोमेट्रिक डेटा पूरी तरह सुरक्षित है.

यूआईडीएआई ने अपने ऊपर लगे आरोपों की सफ़ाई में लिखा है, ''राज्य सरकार और कुछ ख़ास लोगों को नागरिकों की मदद करने के लिए डेटाबेस तक पहुंच दी जाती है. यूआईडीएआई इस शिकायत निवारण सुविधा की हमेशा जांच करता रहता है और किसी भी तरह की गड़बड़ी पता चलने पर तुरंत क़दम उठाया जाता है.''

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''इस मामले में भी नागिरकों के लिए दी गई इस सुविधा का ग़लत इस्तेमाल किया गया है, इसीलिए इस मामले में जुड़े व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.''

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

वहीं दिल्ली पुलिस ने बताया है कि यूआईडीएआई की तरफ़ से 5 जनवरी को उसके साइबर सेल में शिकायत दर्ज़ करवाई गई थी. शिकायत में लिखा था कि 'द ट्रिब्यून' समाचार पत्र ने यूआईडीएआई की शिकायत निवारण सुविधा का दुरुपयोग किया है.

पुलिस ने बताया कि इसी शिकायत के आधार पर एफ़आईआर दर्ज़ की गई. शिकायत में सिर्फ़ रिपोर्टर का नाम लिखा गया था.

पुलिस ने कहा है कि उन्होंने अपनी जांच शुरू कर दी है और वे उस व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं जिसने आधार से जुड़े पासवर्ड साझा किए.

आधार अधिनियम की धारा 36/37 के तहत मामला दर्ज़ किया गया है. साथ ही आईपीसी की धारा 419/420/468/471 और आईटी एक्ट 66 के तहत भी मामला दर्ज़ किया गया है.

वैसे आधार के डेटा की सुरक्षा को लेकर समय समय पर चिंताएं ज़ाहिर की जाती रही हैं. एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने पिछले दिनों आधार कार्ड से जुड़ी अपनी चिंताओं को ज़ाहिर करते हुए एक लेख लिखा था.

उस लेख में उन्होंने बताया था कि उन्होंने अभी तक क्यों आधार कार्ड नहीं बनवाया है. आकार पटेल ने लिखा था कि आधार कार्ड की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए.

4 जनवरी को 'द ट्रिब्यून' में प्रकाशित रचना खैरा की रिपोर्ट

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चंडीगढ़ स्थित 'द ट्रिब्यून' अख़बार ने 4 जनवरी को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें दावा किया गया था कि एक 'एजेंट' की मदद से मात्र 500 रुपये खर्च कर के किसी भी व्यक्ति के बारे में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को दी गई सारी जानकारी हासिल की जा सकती है.

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