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सरकार ने दी गाय, खिलाड़ियों ने लौटाई क्यों?
- Author, मनोज ढाका
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
हरियाणा में रोहतक की तीन महिला मुक्केबाजों ने हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ से पुरस्कार स्वरूप मिलीं गाय वापस कर दी हैं.
हरियाणा की भाजपा सरकार ने पिछले साल नवंबर में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में मेडल जीतने वाली महिला बॉक्सरों को इनाम में गाय दी थी. पर ये गाय इन के परिवार के लिए आफत बन गईं.
मुश्किल इतनी बढ़ गई है कि तीन महिला बॉक्सरों ने गाय राज्य सरकार को वापस कर दी हैं. ये नीतू, ज्योति और शशि हैं. चौथी खिलाड़ी इसे लौटाने की तैयारी कर रही है.
अनुपमा से फोन पर बताया कि उनकी गाय ठीक से दूध नहीं दे रही. अनुपमा के मुताबिक ने बताया कि उनके घर में गाय आने के बाद दस हज़ार का चारा खरीदा लेकिन वो अभी तक हर रोज़ महज़ तीन किलो दूध ही दे रही है. वो अपनी गाय लौटाने पर विचार कर रही हैं.
बीते साल 19 नवंबर से लेकर 26 नवंबर तक असम के गुवाहाटी में वर्ल्ड यूथ वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप हुई थी. इसमें छह बॉक्सरों ने मेडल जीते थे.
भिवानी के गांव धनाना की नीतू ने 48 किलोग्राम, साक्षी ने 54 किलोग्राम, रोहतक के रूड़की की ज्योति गुलिया ने 51 किलोग्राम और हिसार की शशि चोपड़ा ने 57 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया था.
वहीं पलवल की अनुपमा ने 81 किलोग्राम वर्ग में और कैथल की नेहा यादव ने 81 से अधिक किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था.
गाय से घरवाले हुए ज़ख्मी
गाय पाने वाली महिला बॉक्सरों का कहना है कि ये गाय दूध नहीं देती, उल्टे उनके घरवालों को ज़ख्मी कर देती हैं.
ज्योति गुलिया ने कहा कि जब सरकार ने उन्हें गाय दी तो पांच दिनों तक उनकी मां रोशनी ने गाय की सेवा की. वो कहती हैं, "दूध की बात तो दूर, गाय ने हमारे परिवार पर तीन बार हमला कर दिया."
ज्योति ने कहा, "गाय के हमले में मेरी मां रोशनी घायल हो गई, इसके बाद हमने तुरंत गाय वापस कर दी. हम भैंस के साथ ही अच्छे हैं."
चैंपियनशिप में जीतने वाली बॉक्सरों के सम्मान में राजीव गांधी खेल स्टेडियम में साईं नेशनल बॉक्सिंग अकेडमी की तरफ से 29 नवंबर को समारोह का आयोजन किया गया.
समारोह में कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने इन छह बॉक्सरों को देसी गायें देने की घोषणा की. उन्होंने कहा था, "गाय के दूध से जहां सुंदरता आती है, वहीं बुद्धि भी तीव्र हो जाती है."
लेकिन कुछ दिन बाद ही नीतू, ज्योति गुलिया और शशि चोपड़ा ने उन्हें मिली गाय लौटा दीं. इनका कहना है कि गाय के हमले से उनके घरवाले कई बार जख्मी हो गए हैं.
ज्योति गुलिया के पिता मामन सिंह ने बताया, "सरकारी लोग हमारे घर गाय लेकर आए. उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने गाय भेजी है. हम चंडीगढ़ से गाय लेकर आए हैं. हमें पता नहीं था कि गाय कहां से आई है."
"चार-पांच दिन के बाद भी गाय ने दूध नहीं दिया. ज्योति की मां को हाथ में चोट लग गई. फिर हमने उनको वापस फोन किया तो उन्होंने बताया कि गाय तो रोहतक की खुराना डेरी से आई है. डेरी वाले से बात की तो उन्होंने बताया कि वो गाय वापस ले जाएंगे."
'अच्छी नस्ल की गाय दी थीं'
खुराना डेयरी के संचालक राजीव खुराना ने बताया कि हरियाणा सरकार ने उनसे छह गाय खरीदी हैं जिनकी कीमत 40 से 50 हज़ार रुपए तक है.
उन्होने बताया, "हमने सभी को हरियाणा की अच्छी नस्ल की गाय बेची है. सभी हमारे पास अच्छे से दूध दे रही थी. बस एक गाय के मामले में बच्चा मरने के बाद दूध नहीं आ रहा."
"हमने तीन गाय वापस ली हैं और खिलाड़ियों से कहा है कि वो डेयरी में आकर गाय पसंद करें, दूध निकाल कर देख लें और उसके बाद ही यहां से गाय लेकर जाएं."
इस मामले में हरियाणा के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा, "हमने गाय इनाम के तौर पर भेजी थीं. अगर खिलाड़ियों को गाय पसंद नहीं आई तो वो हरियाणा की देसी नस्ल की गाय पूरे प्रदेश में कहीं से खरीद सकते हैं."
उनका कहना है, "बिल हमारे पास भेज दिया जाए और गाय की पेमेंट सरकार करेगी."