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इशरत ने बताया, बीजेपी में क्यों शामिल हुई?
- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
"मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की आभारी हूँ कि उन्होंने सदियों से शोषण का शिकार झेल रहीं मुस्लिम महिलाओं के बारे में सोचा और संसद में तीन तलाक़ का क़ानून लाये,"
यह कहना था कोलकता की रहने वाली इशरत जहाँ का जिनकी तीन साल पहले शादी हुई थी.
इशरत का कहना है कि उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के सम्मान के लिए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है.
बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में वो कहती हैं, "जो लड़ाई मुस्लिम महिलाएं एक लम्बे अरसे से लड़ रहीं थीं, उनकी भावनाओं और सामाजिक सुरक्षा को सिर्फ़ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही समझा. इसलिए मैंने सोचा कि भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाऊं और उन मुस्लिम औरतों की मदद करूं जिनकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है. न सामाजिक संगठन, न उलेमा."
वो कहती हैं कि हर किसी ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के बारे में कभी सोचा ही नहीं.
उनका आरोप है कि चाहे वो 'उलेमा काउन्सिल' हो, चाहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, या फिर मुसलमान नेता-किसी ने भी औरतों को हक़ दिलाने की कोशिश नहीं की. अलबत्ता उनकी आवाज़ को ही दबाने का काम किया.
मानसिक तनाव
इशरत जहाँ को उनके पति ने दुबई से ही टेलीफ़ोन पर एक ही बार में तीन तलाक़ दे दिए थे और उनके साथ रिश्ता ख़त्म कर लिया था.
मगर उलेमाओं और क़ाज़ियों ने कभी उन्हें गुज़ारा भत्ता दिलाने की कोई पहल नहीं की, जिनका उन्हें अफ़सोस है.
इशरत कहती है, ''मैं अलहदगी और बच्चों के साथ मानसिक तनाव से गुज़र रही थीं. कुछ एक ग़ैर सरकारी संगठनों का साथ मिला जिन्होंने थोड़ी मदद मुहैय्या कराई.''
मगर आज दोनों बेटियां अपने पिता के साथ रहती हैं. पति ने दूसरी शादी कर ली. इशरत जहाँ बेटे के साथ अकेली रह गई. बेटियों को उनके पति ज़बरदस्ती अपने साथ ले गए.
नौकरानियों जैसा व्यवहार
इशरत कहती हैं, ''उनकी सौतेली मां उनके साथ नौकरानियों जैसा व्यवहार करती हैं. इसके लिए मुझे बहुत दुख होता है.''
इशरत ने अपने इंसाफ़ की लड़ाई निचली अदालत से लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ी. बाद में उनकी जीत भी हुई.
मगर पति से गुज़ारा भत्ता लेने के लिए उन्हें अब निचली अदालत का सहारा लेना पड़ेगा.
क़ानूनी लड़ाइयों के बीच उन्हें मलाल है कि पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने न तो उनका साथ दिया न किसी भी तरह की आर्थिक सहायता की.
इसीलिए उन्हें ख़ुशी है कि केंद्र में मौजूदा भारतीय पार्टी की सरकार ने तीन तलाक़ पर तीन सालों के दंड का प्रावधान किया है वो महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा दिलाने में मदद करेगा.
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