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कौन हैं गुलअफ्शां जिनका नाम रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में लिया?
- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक बार में तीन तलाक़ बिल पेश किया और गुरुवार को दिनभर चली बहस के बाद आख़िरकार ये लोकसभा में पास हो गया.
बिल के ख़िलाफ़ विपक्षी सांसद कई संशोधन लेकर आए, लेकिन संख्याबल के आगे ये सभी संशोधन ख़ारिज हो गए. लोकसभा के बाद अब ये बिल राज्यसभा में मंज़ूरी के लिए जाएगा.
22 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक़ को असंवैधानिक बताया था.
बिल पेश करने के दौरान क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह मामला महिलाओं की गरिमा से जुड़ा हुआ है.
मसौदा पेश करने के दौरान रविशंकर प्रसाद ने एक मामले का ज़िक्र भी किया.
उन्होंने कहा, "आज सुबह मैंने पढ़ा रामपुर की एक महिला को तीन तलाक़ इसलिए दिया गया क्योंकि वो सुबह देर से उठी थी."
बीबीसी ने उस महिला से बात की और पूरा मामला जानने की कोशिश की.
कौन है वो महिला?
उत्तर प्रदेश के रामपुर की रहने वाली गुलअफ़्शा का नाम संसद में भी गूंजा. क़ानून मंत्री ने उनके मामले का हवाला देते हुए मुस्लिम महिलाओं की स्थिति को बयां करने की कोशिश की.
गुलअफ़्शां रामपुर ज़िले की तहसील सदर के नगलिया आकिल गांव में रहती हैं.
गुलअफ्शां और कासिम का घर एक-दूसरे से चंद क़दमों की दूरी पर है. दोनों एक-दूसरे को सालों से जानते थे. जान-पहचान प्यार में बदली और सात महीने पहले दोनों ने शादी कर ली.
गुलअफ्शां के पति कासिम ड्राइवर हैं.
गुलअफ्शां ने हमें बताया, "रविवार की रात को मेरे पति कासिम ने मेरे साथ बहुत मारपीट की थी. मारपीट के चलते मेरी तबियत बिगड़ गई थी और अगली सुबह इसी वजह से मैं थोड़ा देर से उठी."
देर मतलब…?
"मैं थोड़ा देर से सुबह साढ़े आठ बजे सोकर उठी. दरवाज़े के बाहर क़दम रखा और उसके बाद उन्होंने तीन बार तलाक़-तलाक़-तलाक़ कह दिया."
गुलअफ्शां आगे कहती हैं, "जब तक मैं समझ पाती वो तलाक़-तलाक़-तलाक़ कह चुके थे."
"मैंने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो मेरी एक सुनने को राज़ी नहीं थे. एक ही ज़िद्द ठान रखी थी कि अब मुझे नहीं रखना है."
गुलअफ्शां बताती हैं कि कासिम शादी से पहले भी इस तरह की उल-जुलूल हरकतें किया करते थे. फ़ोन कर देते थे कि घर के बाहर आओ वरना मैं ज़हर खा लूंगा. मैं उनकी सुनकर चली जाया करती थी.'
गुलअफ्शां ने बताया, "कासिम की हरकतों से मेरे घर वाले बहुत परेशान हो गए थे. जिसके बाद सात महीने पहले ही उन्होंने हमारा निकाह पढ़वा दिया. हमारी शादी में भी सिर्फ़ 30-35 लोग ही आए थे."
सुबह की तीन तलाक़ की घटना पर गुलअफ्शा कहती हैं कि मेरे ससुराल में तीन लोग और हैं, लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा.
गुलअफ्शां का कहना है कि वो पुलिस के पास भी गई थी और मौखिक शिकायत की थी.
हालांकि बाद में गुलअफ्शां के परिवार वाले इस मामले को लेकर पंचायत पहुंचे और उसके बाद पंचायत ने पति-पत्नी के बीच सुलह करवा दी.
गुलअफ्शां कहती हैं कि अब हमारी सुलह हो गई है, लेकिन हम शरीयत को मानते हैं तो हलाला के बाद मैं अपने पति के पास चली जाऊंगी.
पंचायत में मौजूद एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पंचायत में दोनों पक्षों को समझाया गया जिसके बाद दोनों परिवार सुलह के लिए राज़ी हो गए.
बीबीसी ने गुलअफ्शां के पति कासिम से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो सका. हालांकि कासिम के भाई मिराज ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि उनके भाई ने भाभी (गुलअफ्शां) को तलाक़ दे दिया था, लेकिन अब पंचायत के हस्तक्षेप के बाद सुलह हो गई है और हलाला के बाद गुलअफ़्शां वापस आ जाएंगी.
रविशंकर ने बिल पेश करने के दौरान क्या कुछ कहा?
- क्या सदन को खामोश रहना चाहिए? शरिया पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहते. यह बिल केवल तीन तलाक़ या तलाक़-ए-बिद्दत पर है. लोकसभा देश की सबसे बड़ी पंचायत से अपील है इस बिल को सियासत की सलाखों से न देखा जाये.
- दूसरी अपील है कि इसे दलों की दीवार से न बांधा जाये.
- तीसरी अपील है कि इस बिल को मजहब के तराजू पर न तौला जाये.
- चौथी अपील है कि इस बिल को वोट बैंक के खाते से न परखा जाये. ये बिल है हमारी बहनों, बेटियों की इज्ज़त आबरू का."