ड्रोन: आसमान में आंख, कितनी ख़तरनाक?

    • Author, मानसी दाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा का कहना है कि अगले एक-दो महीने में मानवरहित विमानों या ड्रोन के संबंध में नियम-क़ायदे तैयार कर लिए जाएंगे. उनका कहना है कि "उचित प्रतिबंधों के साथ ये 'बेस्ट इन क्लास' होंगे".

दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जयंत सिन्हा ने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने ड्रोन खरीदने, चलाने और इसे बेचने या नष्ट करने के संबंध में मसौदा दस्तावेज पिछले महीने जारी किया था और इस पर लोगों से राय मांगी गई थी.

उन्होंने कहा कि जो सुझाव मिलेंगे, उन्हें शामिल करने के बाद ड्रोन विनियम अगले 30 से 60 दिनों में तैयार हो जाने चाहिए.

मौजूदा वक्त में हवाई जहाज़ खरीदने या इस्तेमाल करने से जुड़े नियमों में ड्रोन शामिल नहीं हैं. अक्तूबर 2014 में डीजीसीए ने आम नागरिकों के ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगा दिया था.

ख़तरनाक हथियार बन सकता है ड्रोन

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में शोध कर रहे अजिन अब्राहम कहते हैं, "भारत ही नहीं कई अन्य देशों में आम नागरिकों को एक निश्चित ऊंचाई और कुछ ख़ास तरह के ड्रोन उड़ाने की ही इजाज़त दी जाती है. लेकिन भारत में इसे लेकर अब तक कोई नियम ही नहीं हैं, लेकिन अब इसमें लाइसेंस जारी करने की बात हो रही है."

"ड्रोन के साथ क्षमताओं की सीमाएं लगभग हैं ही नहीं. कुछ ड्रोन में आसमान से एक किलोमीटर तक के इलाके की वीडियो फ़िल्म बनाई जा सकती है या फिर लाइव स्ट्रीम भी किया जा सकता है. यहां तक कि मेमरी में भी वीडियो सेव किया जा सकता है जो इसे काफी खतरनाक भी बना सकता है."

वो कहते हैं, "साल 2015 में इंटरनेट पर एक वीडियो देखा गया था कि कैसे एक ड्रोन से गोलियां चलाई जा रही हैं. मुझे नहीं पता कि ये वीडियो सच है या नहीं या फिर मैं इसकी पुष्टि भी नहीं करता. लेकिन ऐसा हो सकता है और ऐसी आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता. ये बेहद ख़तरनाक है."

अजिन कहते हैं कि फिलहाल तो हमारी चिंता सुरक्षा को लेकर है लेकिन अगर हम ड्रोन के संबंध में अभी क़ानून नहीं लाएंगे तो भविष्य में चीज़ें काबू करने में दिक्कतें हो सकती हैं.

लकीर कहां पर खींचें?

साइबर सुरक्षा मामलों के जानकार विजय मुखी कहते हैं, "आज की तारीख में एक आम आदमी एक ड्रोन खरीद सकता है और इसके कई व्यवसायिक और निजी इस्तेमाल हो सकते हैं."

"सुरक्षा के लिहाज़ से देखें तो ड्रोन का इस्तेमाल दोधारी तलवार की तरह है- कई आधुनिक देशों में पुलिस ड्रोन का इस्तेमाल करती हैं. ड्रोन को 'आई इन द स्काई' कहते हैं. इसके ज़रिए आपको पता चलता है कि एक जगह पर कितने लोग हैं."

वो कहते हैं, "सुरक्षा की देखें तो इसका इस्तेमाल सही है. लेकिन जब इसका निजी इस्तेमाल होगा तो ये भी देखें कि अगर कोई बैंक चोरी में इसका इस्तेमाल करता है जो इसकी गुंजाइश रहती है वो इसके ज़रिए पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और अपने निकल भागने के रास्ते का पता लगा सकता है "

"आज इसके बारे में कोई कानून नहीं हैं. कहीं इसका इस्तेमाल चिट्ठियां पहुंचाने के लिए किया जा सकता है तो कहीं बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने के लिए किया जा सकता है. ये सब इसके नए इस्तेमाल हैं और इसके लिए सरकार के सामने ये चुनौती है कि वो इसमें लकीर कहां पर खींचें."

वो कहते हैं कि इसके नियमन में दिक्कतें तो हैं, "भारत के आई एक्ट में भी किसी काम पर रोक नहीं है लेकिन करने पर सज़ा का प्रावधान है. ड्रोन का नियमन भी कुछ इसी तर्ज पर होना चाहिए."

अजिन अब्राहम कहते हैं, "ड्रोन पर शोध करने वालों के लिए ये नियम बड़ी समस्या बन सकते हैं. फिलहाल हम ड्रोन विदेश ने नहीं खरीद सकते लेकिन लोग अलग-अलग पुर्जे खरीदकर अपना शोध करते हैं."

प्रस्तावित मसौदे में क्या है?

मंत्रालय ने इसी साल नबंवर में ड्रोन नियमन से संबंधित मसौदे का प्रस्ताव पेश किया था. इस प्रस्तावित मसौदे के अनुसार ड्रोन को चार श्रेणियों में रखा गया है- 250 ग्राम से कम नैनो, 250 ग्राम से ले कर 2 किलो तक माइक्रो, दो किलो से अधिक मिनी और मॉडल एयरक्राफ्ट जो दो किलो से अधिक होता है.

  • ड्रोन उड़ाने वाले को इसके लिए डीजीसीए एक यूनिक आइडेन्टिफिकेशन नंबर लेना होगा. ज़मीन से 50 फीट की ऊंचाई तक उड़ाए जाने वाले नैनो ड्रोन के लिए ये नंबर लेना ज़रूरी नहीं है.
  • विमान के उड़ान क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की इजाज़त लेनी पड़ेगी. इसके लिए नज़दीकी पुलिस स्टेशन से भी जुड़े रहना होगा.
  • राष्ट्रपति भवन के 30 किलोमीटर, अंतरराष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर और हवाई अड्डे के 5 किलोमीटर के दायरे में ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकेगा. साथ ही संवेदनशील इलाके जैसे कि परमाणु स्टेशन, सैन्य अड्डों के आसपास और रणनीतिक तौर पर अहम इलाकों के आस-पास भी ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकेगा.
  • किसी ड्रोन से एयर ट्रैफिक में कोई रेडियो फ्रीक्वेंसी बाधित नहीं होनी चाहिए.
  • इसे उड़ाने वाले व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और उसे प्रशिक्षिण प्राप्त होना चाहिए.
  • डीजीसीए की इजाज़त के बिना ड्रोन को किसी को बेचा या नष्ट नहीं किया जा सकेगा.
  • ड्रोन को सुरक्षित रखना इसके मालिक की ज़िम्मेदारी होगी. इसके खोने या चोरी हो जाने की सूरत में पुलिस और डीजीसीए को तुरंत सूचित करना होगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)