ऐसा कैसे हुआ कि 'गुनहगार' एंडरसन अमरीका पहुंच गए

    • Author, रेहान फ़ज़ल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

6 दिसंबर, 1984 को जब तड़के पाँच बजे मुंबई के सांताक्रूज़ हवाई अड्डे पर एक गल्फ़ स्ट्रीम ट्विन जेट विमान ने लैंड किया तो किसी का उस पर कोई ख़ास ध्यान नहीं गया.

विमान की विंड स्क्रीन के ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में तीन शब्द लिखे हुए थे- यूसीसी यानी यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन.

ये वही अमरीकी कंपनी थी जिसके भोपाल संयंत्र में तीन दिन पहले दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना घटी थी जिसमें तीन हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे.

24 घंटे की फ़्लाइट के बाद विमान से उतरते हुए यूनियन कार्बाइड के अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन काफ़ी थके-थके से दिखाई दे रहे थे.

उनको उस समय नज़ला हो रहा था. उन्होंने बंबई के उस समय के बेहतरीन होटल ताजमहल होटल में चेक इन किया था, जहाँ पहले से ही उनके लिए एक स्वीट रिज़र्व्ड था.

एंडरसन की यूनियन कार्बाइड गेस्ट हाउ में गिरफ़्तारी

अगले दिन सुबह ही एंडरसन और उनके दो साथी इंडियन एयरलाइंस की एक नियमित फ़्लाइट से भोपाल रवाना हो गए थे.

जब उनका विमान भोपाल हवाई अड्डे पर लैंड कर रहा था तो उन्होंने खिड़की के शीशे से देखा कि पुलिसकर्मियों का एक बड़ा झुंड विमानतल पर खड़ा है.

जैसी ही विमान रुका केबिन एडरेस सिस्टम पर घोषणा हुई, 'मिस्टर एंडरसन, मिस्टर महिंद्रा एंड मिस्टर गोखले आर इनवाइटेड टू लीव द एयरक्राफ़्ट फ़र्स्ट.'

भोपाल के पुलिस प्रमुख स्वराज पुरी ने विमान की सीढ़ियों के सामने गर्मजोशी से हाथ मिला कर आगंतुकों का स्वागत किया.

विमान से दस फ़िट की दूरी पर ही एक सफ़ेद एंबेसडर कार खड़ी थी. एंडरसन कार की पिछली सीट पर बैठे और सेकंडों में कार हवा से बातें करने लगी.

कार हवाई अड्डे के सर्विस गेट से बाहर निकली ताकि आगंतुक हॉल में इंतज़ार कर रहे पत्रकारों को एंडरसन के भोपाल पहुंचने की भनक ही न लगे.

उनके पीछे एक और कार चल रही थी जिसमें पुलिस प्रमुख और ज़िला कलेक्टर सवार थे.

कार शामला हिल्स की तरफ़ मुड़ कर यूनियन कार्बाइड के शानदार गेस्ट हाउस़ के गेट में दाख़िल हो गई.

जैसे ही कार रुकी वहाँ पहले से ही मौजूद पुलिस अफ़सर ने आगे बढ़ कर एंडरसन को सैल्यूट किया और बोला, 'मुझे बहुत दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आप तीनों को गिरफ़्तार किया जाता है.'

फ़ोन करने की इजाज़त नहीं

एंडरसन यह सुनकर अवाक रह गए. पुलिस अफ़सर ने आगे कहा, 'हमने ये क़दम आपकी सुरक्षा के लिए ही उठाया है. आप अपने कमरे के अंदर जो करना चाहें, कर सकते हैं. लेकिन आपको बाहर जाने, फ़ोन करने और लोगों से मिलने की इजाज़त नहीं होगी.'

अभी ये बात हो ही रही थी कि ज़िला कलक्टर और पुलिस प्रमुख भी वहाँ पहुंच गए. उनके साथ काला गाउन पहने एक मैजिस्ट्रेट भी आया था.

उसने वॉरेन एंडरसन की सूचित किया था कि उनके ऊपर धारा 92, 120 बी, 278, 304, 426 और 429 के अंतर्गत ग़ैरइरादतन हत्याओं का मामला दर्ज़ किया गया है.

वॉरेन एंडरसन की गिरफ्तारी की ख़बर से दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक सनसनी फैल गई.

ये शायद पहली बार था कि किसी तीसरी दुनिया के देश ने पश्चिम के सबसे ताक़तवर सीईओ को गिरफ़्तार करने की जुर्रत की थी.

अर्जुन सिंह के लिखित आदेश

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह अपनी आत्मकथा, 'द ग्रेन ऑफ़ सैंड इन द हावरग्लास ऑफ़ टाइम' में लिखते हैं- जैसे ही मुझे पता चला कि एंडरसन भोपाल आने वाले हैं, मैंने तय किया कि मैं उन्हें गिरफ़्तार कराऊंगा. लेकिन जब मैंने इसका ज़िक्र मुख्य सचिव बह्म स्वरूप से किया तो उन्होंने सलाह दी कि मैं एंडरसन को भोपाल पहुंचने ही न दूँ.

लेकिन तब तक इसके लिए बहुत देर हो चुकी थी. अर्जुन सिंह ये भी लिखते हैं कि उन्होंने भोपाल के ज़िला कलेक्टर मोती सिंह और पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी को बुला कर एंडरसन, केशब महेंद्रा और विजय गोखले की गिरफ़्तारी के लिखित आदेश दिए थे.

उन्होंने भोपाल हवाई अड्डे के इंचार्ज एके खुराना को भी ये संदेश भिजवाया था कि वो एंडरसन के विमान को तब तक हवाई अड्डे पर न उतरने दें, जब तक ज़िला कलेक्टर और एसपी एंडरसन को गिरफ़्तार करने के लिए हवाई अड्डे नहीं पहुंच जाते.

राज़्य सरकार के विमान से एंडरसन दिल्ली पहुंचे

लेकिन अगले दिन ही भोपाल के एसपी स्वराज पुरी ने आकर वॉरेन एंडरसन को बताया कि उन्हें तुरंत छोड़ा जा रहा है, लेकिन उनके भारतीय साथियों को बाद में रिहा किया जाएगा.

पुरी ने कहा, 'मध्य प्रदेश सरकार का एक जहाज़ आपको दिल्ली ले जाने के लिए तैयार खड़ा है. वहाँ से आप अपने विमान से वापस अमरीका जा सकते हैं.'

आख़िर 24 घंटों में ऐसा क्या हुआ कि मध्य प्रदेश सरकार को एंडरसन की गिरफ़्तारी के बाद अपना फ़ैसला बदलना पड़ा.

अर्जुन सिंह अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, 'मेरे पास ब्रह्म स्वरूप का वायरलेस आया कि गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ उच्चाधिकारी ने मुझे बारबार फ़ोन कर कहा है कि मैं सुनिश्चित करूँ कि एंडरसन को ज़मानत मिल जाए. इसके बाद हमें निर्देश मिले कि हम उन्हें सरकारी विमान से दिल्ली भेजें.'

आर डी प्रधान का खंडन

अर्जुन सिंह आगे लिखते हैं, 'बाद में मुझे पता चला कि गृह सचिव आरडी प्रधान ने तत्कालीन गृह मंत्री पीवी नरसिम्हा राव के कहने पर ब्रह्म स्वरूप को वॉरेन एंडरसन की रिहाई के बारे में फ़ोन किया था.'

लेकिन बाद में आर डी प्रधान ने इसका ज़ोरदार खंडन करते हुए कहा था कि ऐसा करने का सवाल ही नहीं उठता क्योंकि दिसंबर, 1984 में तो वो महाराष्ट्र के मुख्य सचिव थे और जनवरी 1985 में उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव का कार्यभार संभाला था.

बाद में भोपाल के तत्कालीन ज़िला कलेक्टर मोती सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा कि एंडरसन ने अपने कमरे में रखे फ़ोन का इस्तेमाल कर अमरीका सरकार में अपने मित्रों से संपर्क किया और उनसे भारत सरकार पर उनकी रिहाई के लिए दबाव बनाने के लिए कहा.

बाद में पता चला कि अर्जुन सिंह ने एंडरसन को गिरफ़्तार करने से पहले राजीव गाँधी की सलाह नहीं ली थी.

लेकिन गिरफ़्तारी के बाद राजीव गाँधी के क़रीबी अरुण नेहरू ने अर्जुन सिंह को फ़ोन कर कहा था कि अमरीकी राष्ट्पति रोनल्ड रीगन ने राजीव गाँधी को फ़ोन कर एंडरसन को तुरंत रिहा करने का अनुरोध किया है.

एंडरसन का विमान अब भारत में नहीं

जिस सरकारी विमान से 7 दिसंबर, 1984 को एंडरसन को दिल्ली ले जाया गया था, उसकी लॉग बुक में लिखा था, 'इस उड़ान की अनुमति मुख्यमंत्री ने दी है.'

बाद में उस विमान के पायलट कैप्टेन सैयद हाफ़िज़ अली ने एंडरसन के भारत से जाने की जाँच के लिए बनाए गए न्यायमूर्ति एससी कोचर आयोग को बताया था कि उनको वीआईपी यात्री को दिल्ली ले जाने के आदेश राज्य के उड्डयन निदेशक कैप्टेन आर सी सोंधी से मिले थे.

दिल्ली पहुंचने पर ही उन्हें पता चला था कि उनके विमान से दिल्ली आने वाले और कोई नहीं वॉरेन एंडरसन ही थे. अब उस विमान की लॉग बुक भारत में उपलब्ध नहीं है क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने 1998 में वो विमान पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के बेटे की कंपनी स्पान एयर प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी थी.

बाद में उस कंपनी ने उसे एक दूसरी विदेशी कंपनी को बेच दिया था.

छोड़ने के लिए अमरीका का दबाव

'द प्रिंट' के वर्तमान संपादक प्रणव ढ़ाल सामंता ने काफ़ी शोध के बाद इंडियन एक्सप्रेस में लिखा था, 'अर्जुन सिंह राजीव गाँधी के आदेश का पालन कर रहे थे, जबकि राजीव पर अमरीका के उच्चतम स्तर के पद पर बैठे लोग दबाव डाल रहे थे.

एक बजे के आसपास अर्जुन सिंह ने ब्रह्म स्वरूप को ताज़ा स्थिति जानने के लिए फ़ोन किया. स्वरूप ने बाद में अपने दोस्तों को बताया कि अर्जुन सिंह आदेश का पालन किए जाने पर ज़ोर दे रहे क्योंकि उन्हें राजीव गाँधी को रिपोर्ट भेजनी थी कि काम पूरा हो गया है.'

एंडरसन कभी वापस भारत नहीं लौटे

मीडिया को तुरंत ये पता नहीं चल पाया था कि एंडरसन भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं. छह बजे के आसपास बीबीसी ने पहली बार ये ख़बर ब्रेक की थी.

प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि विमान पर चढ़ने से पहले एंडरसन को कुछ काग़ज़ों पर दस्तख़त करने के लिए कहा गया था. जब उन्होंने उसे पढ़ा तो उन्हें पता चला कि उनके स्थानीय दफ़्तर ने उनकी ज़मानत के लिए 25,000 रुपए दिए थे.

दिल्ली में अमरीका जाने के लिए जब वो अपने विमान पर चढ़ने वाले थे तो एक पत्रकार ने उनसे पूछा था, 'क्या आप क़ानून का सामना करने के लिए भविष्य में भारत आने के लिए तैयार होंगे?'

यह सुन कर एंडरसन का मुंह पीला पड़ गया, लेकिन उन्होंने अपने आप को संयत करते हुए जवाब दिया था, 'जब भी क़ानून को ज़रूरत होगी, मैं ज़रूर भारत वापस आऊंगा.'

वॉरेन एंडरसन ने अपना ये वादा कभी पूरा नहीं किया.

वर्ष 1987 में उनके ख़िलाफ़ एक नया गिरफ़्तारी वॉरंट जारी किया गया, लेकिन अमरीका ने भारत में उनके प्रत्यर्पण के लिए सहयोग नहीं किया.

29 सितंबर, 2014 को वीरो बीच, फ़्लोरिडा में 93 वर्ष की आयु में वॉरेन एंडरसन का निधन हो गया.

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