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यूपी निकाय चुनाव में अपना गढ़ बचाने में नाकाम रहे दिग्गज
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को 16 नगर निगम, 198 नगरपालिका और 438 नगर पंचायतों के चुनाव के नतीजे आए, जिसमें 14 नगर निगम में बीजेपी और दो पर बीएसपी ने जीत हासिल की.
जहां तक बीजेपी की बात है तो उसने नगरपालिका और नगर पंचायतों में भी अपना दबदबा बनाए रखा.
चुनाव में कई दिग्गजों को उनके इलाक़े में ही मतदाताओं ने आईऩा दिखा दिया. कुछेक इलाक़े जो कुछ नेताओं या फिर किन्हीं ख़ास राजनीतिक दलों के गढ़ कहे जाते थे, वहां ऐसे लोगों की ज़ोरदार हार हुई है.
इस मामले में बड़ी जीत हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी भी अलग नहीं है.
योगी के वार्ड में हारी बीजेपी
निकाय चुनाव की जीत का सेहरा बीजेपी प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के सिर बांध रही है.
आदित्यनाथ योगी के गृहनगर गोरखपुर में पार्टी ने तीसरी बार अपना मेयर बना लेने में क़ामयाबी ज़रूर हासिल की लेकिन योगी आदित्यनाथ जिस वॉर्ड में मतदाता हैं, इस वॉर्ड संख्या 68 यानी पुराना गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार की क़रारी हार हुई है.
यहां निर्दलीय उम्मीदवार नादरा ख़ातून ने बीजेपी की माया त्रिपाठी को 462 मतों से हराया.
इसी तरह राज्य के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य अपने गृहजनपद कौशांबी में 'गढ़ को ध्वस्त' हो जाने से नहीं रोक पाए.
यहां की छह नगर पंचायतों में से बीजेपी को सिर्फ़ एक सीट पर ही क़ामयाबी मिली है. केशव प्रसाद मौर्य के अपने वॉर्ड तक में कमल नहीं खिल सका.
राष्ट्रपति कोविंद के वार्ड में नहीं खिला कमल
यही नहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति और राज्यपाल बनने से पहले बीजेपी के नेता थे. कानपुर में उनके अपने वॉर्ड नारामऊ में बीजेपी को शिकस्त मिली है.
यहां बीएसपी ने जीत दर्ज की है और बीजेपी तीसरे स्थान पर रही. राष्ट्रपति कोविंद के परिवार को एक व्यक्तिगत झटका भी लगा, जब उनके भतीजे की पत्नी दीपा को कानपुर देहात की झींझक नगर पालिका चेयरमैन पर हार का सामना करना पड़ा.
दीपा को बीजेपी ने टिकट देने से मना कर दिया था और वो निर्दलीय चुनाव मैदान में थी. इस सीट पर बीएसपी की जीत हासिल हुई है.
अमेठी में कांग्रेस का सफाया
नगर निकाय चुनाव ने यूपी में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका दिया है लेकिन इस बार उसे अपने गढ़ कहे जाने वाले अमेठी में भी काफ़ी निराश होना पड़ा है.
निकाय चुनाव के आधार पर कहें तो अमेठी से कांग्रेस का एक तरह से सफ़ाया हो गया है. अमेठी की दो नगरपालिका और दो नगर पंचायत में से पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली है.
हालांकि कांग्रेस ने नगर पंचायत चुनाव के लिए पार्टी के सिंबल पर उम्मीदवारों को नहीं उतारा था. ये ज़रूर है कि उसने अपने एक अन्य गढ़ रायबरेली में सफलता हासिल की है.
निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली जीत
वहीं समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले इटावा और उसके आस-पास के इलाकों में समाजवादी पार्टी को मुंह की खानी पड़ी है.
इटावा में तीन नगर पालिका और तीन नगर पंचायतों में सिर्फ़ दो पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली. हालांकि यहां बीजेपी और दूसरे दल भी कुछ ख़ास नहीं कर पाए और बाज़ी निर्दलीय उम्मीदवार मार ले गए.
जसवंतनगर नगरपालिका से चेयरमैन का चुनाव शिवपाल यादव के क़रीबी सुनील जॉली ने जीता. सुनील जॉली को समाजवादी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था इसलिए उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव जीता.
समाजवादी पार्टी को मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के गढ़ कहे जाने वाले कन्नौज से भी निराशा हाथ लगी है.
बीजेपी ने दो नगर निगमों के अलावा 198 में से 70 नगर पालिका चेयरमैन के पद और 438 में से 100 नगर पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है.
वहीं बहुजन समाज पार्टी ने दो नगर निगम के अलावा नगरपालिका की 29 और नगर पंचायत की 45 सीटों पर जीत दर्ज की.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को नगर निगम में मेयर की तो कोई सीट हासिल नहीं हुई लेकिन सपा ने नगरपालिका की 48 सीटें और नगर पंचायत की 83 सीटों पर कब्जा किया जबकि कांग्रेस को नगर पालिका की नौ और नगर पंचायत की 17 सीटें हासिल हुईं.
नगर पालिका की 43 सीटों और नगर पंचायत की 181 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की.
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