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दिल्ली में प्रदूषण पर केंद्र-4 सूबों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
वकील आरके कपूर की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने दिल्ली समेत चार राज्यों को नोटिस जारी किया है और उनसे राजधानी में बढ़ते हुए गंभीर प्रदूषण पर की जा रही कार्रवाई पर जवाब मांगा है.
हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दिल्ली के अलावा केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भी नोटिस भेजी गई है.
दिल्ली में पिछले हफ्ते भर से प्रदूषण की वजह से धुंध छाई है और ये कुछ इस क़दर अधिक है कि राजधानी के स्कूल कई दिन बंद रहने के बाद आज ही खुले हैं.
एक अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस यूनाइटेड ने दिल्ली आने और यहां से जाने वाली अपनी उड़ाने बंद कर दी हैं.
ब्रिटेन और अमरीका ने ख़बरों के मुताबिक़ भारत में यात्रा करने को लेकर नागरिकों को सलाह जारी की है. लेकिन इन गंभीर हालात के बीच भी हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के बीच राजनीतिक रस्साकशी जारी रही.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मुलाक़ात के लिए ख़त लिखा तो खट्टर ने जवाब में पूछा कि दिल्ली सरकार ने अपने क्षेत्र में मौजूद 40,000 किसानों को पुआल जलाने से रोकने के लिए क्या क़दम उठाए हैं.
मुलाक़ात पर उन्होंने कह दिया कि वो दिल्ली में 13 और 14 तारीख़ को मौजूद होंगे तब मिला जा सकता है.
10 नवंबर को केजरीवाल को भेजी गई चिट्ठी में लिखा गया कि केजरीवाल जब चाहें फोन करके वक्त तय कर सकते हैं.
पूरे मामले पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, 'हरियाणा में गंभीर स्थिति है. क्या कर रही है वहां की सरकार? क्या वहां की सरकार को चिंता नहीं करना चाहिए. पंजाब में इससे ज़्यादा बुरे हालात हैं क्या वहां के सरकार को चिंता नहीं करनी चाहिए. दिल्ली की सरकार जितना करने की स्थिति में है उससे ज़्यादा हम कर रहे हैं क्योंकि ये हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है और यहां के लोगों की चिंता हमें हैं.'
खेतों में कटाई के बाद खेतों में बच गई खूंटी और पुआल को जलाने को दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण की एक वजह बताया जा रहा है.
राजधानी में बड़े पैमाने पर हो रहा निर्माण कार्य और वाहन भी इसकी वजह है.
इस मामले पर दिल्ली सरकार ने पहले वाहनों के लिए ऑड और एवन स्कीम लागू करने का सुझाव दिया था. लेकिन नेशनल ग्रीन ट्रायबुनल ने इसे ये कहकर रद्द कर दिया कि इस स्कीम में महिलाओं और मोटरसाइकिल सवारों को दी जाने वाली छूट से इसका फायदा कम हो जायेगा और दिल्ली सरकार इसमें तब्दीली करे.
लेकिन बाद में इस मामले पर बुलाई गई बैठक में दिल्ली सरकार का कोई प्रतिनिधि पहुंचा ही नहीं जिसे लेकर ट्रायबुनल ने हुकुमत से सवाल उठाये हैं.
इधर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने बीबीसी संवाददाता सरोज सिंह को दिये एक इंटरव्यू में कहा कि हालात में पहले से सुधार हुआ है.
उन्होंने ये भी कहा कि केंद्र दिल्ली में प्रदुषण के मामले पर पिछले दो महीनों में कम से कम मंत्री स्तर की चार बैठकें कर चुका है और अभी भी इसकी गंभीरता से निगरानी की जा रही है.
उन्होंने कहा, 'पिछले दो माह के भीतक मंत्री और अधिकारियों के स्तर की चार बैठकें हुई हैं, साथ ही अभी भी दिल्ली और राजधानी क्षेत्र में केंद्रीय प्रदुषण बोर्ड की 42 टीमें भेजी गई हैं जो किसी भी उलंघन की सूचना देती हैं, उन्हें नोटिस जारी करती हैं और उसे रुकवाती हैं.'
दिल्ली में प्रदुषण के मामले पर पंजाब की हुकुमत ने पहले ही ये कहते हुए पलड़ा झाड़ लिया था कि इसमें राज्य स्तर पर बैठकों के साथ-साथ केंद्र का होना भी ज़रूरी है.
साथ ही अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर छापी है जिसमें कहा गया है कि नीति आयोग की टीम ने किसानों को पुआल जलाने से रोकने के लिए आर्थिक सहायता देने की बात कही थी जिसके लिए 3,000 करोड़ के पैकेज की ज़रूरत थी लेकिन फंड की कमी की वजह से प्लान लागू न हो सका.
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