You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
इवांका ट्रंप के कारण हैदराबाद में भिखारियों पर शामत!
- Author, टी एस सुधीर
- पदनाम, हैदराबाद से बीबीसी हिंदी के लिए
हैदराबाद को भिखारी-मुक्त बनाने में जुटा पुलिस-प्रशासन अब नागरिकों को भी इस काम में शामिल करने की योजना बना रहा है.
एक दिसंबर के बाद शहर के किसी भिखारी के बारे में जानकारी देने पर 500 रुपए का इनाम दिया जा सकता है.
आनंद आश्रम में भेजे जा रहे हैं भिखारी
आनंद आश्रम के अध्यक्ष एम संपत ने बीबीसी से बातचीत में कहा, ''हम एक दिसंबर को हैदराबाद को भिखारी-मुक्त घोषित कर देंगे. जेल विभाग ने जिस 500 रुपए के इनाम का एलान किया है, वो लोगों को लुभाने के लिए है.''
उन्होने कहा, ''इसका मक़सद तेलंगाना भीख रोकथाम अधिनियम को लागू कराने में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना है. जेल विभाग हैदराबाद को भिखारी मुक्त करने में जुटी नोडल एजेंसियों में से एक है.''
चंचलगुड़ा जेल में बना आनंद आश्रम वह जगह है जहां भिखारियों को पुनर्वास के लिए भेजा जा रहा है.
दो महीने तक भीख मांगने पर रोक
भिखारियों के ख़िलाफ़ यह कार्रवाई पिछले हफ़्ते शुरू हुई, जब पुलिस कमिश्नर एम महेंद्र रेड्डी ने हैदराबाद में भीख मांगने पर दो महीने की रोक लगा दी. आठ नवंबर की सुबह 6 बजे से शुरू हुई यह पाबंदी, सात जनवरी 2018 तक लागू रहेगी.
आलोचकों का कहना है कि यह क़दम अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका की यात्रा के मद्देनज़र उठाया गया है. इवांका ट्रंप 28 से 29 नवंबर के बीच होने वाले अंतरराष्ट्रीय उद्यमी सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रही हैं.
हालांकि प्रशासन इससे इनकार करता है. इससे पहले मार्च 2000 में भी बिल क्लिंटन के आने से पहले भिखारियों को सड़क से हटा दिया गया था.
पकड़े गए भिखारियों के आधार बनाए जा रहे हैं
भिखारियों की धरपकड़ के लिए पूजा-स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और ट्रैफ़िक सिग्नलों पर कार्रवाई की जा रही है.
अब तक 366 भिखारियों को पकड़कर आनंद आश्रम भेजा जा चुका है.
अधिकारियों के मुताबिक़ पकड़े गए भिखारियों में से 128 ने वहीं रहने का फ़ैसला किया, जबकि 238 दोबारा भीख नहीं मांगने का वादा करके घर चले गए. जेल विभाग की योजना भिखारियों को ट्रेनिंग देकर पेट्रोल पंप पर काम पर लगाने की है.
तेलंगाना जेल के महानिदेशक वीके सिंह ने बताया, ''ज़्यादातर लोग यहां लाए जाने पर भिखारी होने से ही इनकार कर देते हैं. हमने स्वस्थ लोगों को जाने दिया लेकिन उनसे एक अंडरटेकिंग ले ली कि वे आगे भीख नहीं मांगेगे. हम इन लोगों का बायोमीट्रिक डेटा भी रेकॉर्ड कर रहे हैं जिससे आधार बनवाकर इनकी पहचान आसान की जा सके.''
बुज़ुर्ग, बेघर भिखारी बड़ी समस्या
अधिकारियों के सामने बड़ी समस्या उन बुज़ुर्गों की है जिन्हें उनके घर से निकाल दिया गया है. ऐसे लोगों को रहने की जगह और खाने के साथ-साथ दिमाग़ी काउंसलिंग की भी ज़रूरत है.
इस कार्रवाई से बचने के लिए शहर में मौजूद 5000 भिखारियों में से बहुत सारे विजयवाड़ा और नागपुर भाग गए हैं. अधिकारियों के मुताबिक़ उनकी पूरी कोशिश है कि दो महीने की पाबंदी ख़त्म होने के बाद ये वापस न आ जाएं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)