ये बीबीसी पॉप-अप क्या है?

पॉप अप, गुजरात विधान सभा चुनाव, कांग्रेस, बीजेपी, नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी
    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अहमदाबाद

कुछ दिनों पहले जब मुझसे कहा गया कि बीबीसी हिंदी और बीबीसी गुजराती का पॉप-अप प्रेज़ेंट करना है तो दो सेकेंड के लिए मैं थोड़ा सकपका सा गया.

बीबीसी पॉप अप यानी लोगों के पास जाना और उनसे पूछना कि वो कौन से मुद्दे हैं जिन पर मीडिया या हम बात नहीं कर पाते.

ये मुद्दे कुछ भी हो सकते हैं- आप की कॉलोनी के, आपके मोहल्ले के, आपके समाज के.

ये किसी की आपबीती हो सकती है, किसी व्यक्ति की प्रेरणादायक कहानी हो सकती है या महिलाओं से जुड़ा कोई मुद्दा हो सकता है.

इसे फ़िल्म करने का तरीका थोड़ा जैज़ी, इंटरैक्टिव, युवाओं को पसंद आने वाले किसी ढिंचैक वीडियो जैसा होता है.

पॉप अप के प्रोड्यूसर विकास पांडे, बीबीसी गुजराती की हमारी सहयोगी अर्चना पुष्पेंद्र और हमारे साथ कर रहे थे 22 साल के सागर पटेल ने दिन-रात मेहनत कर इस कार्यक्रम की ज़मीन तैयार की.

पॉप अप, गुजरात विधान सभा चुनाव, कांग्रेस, बीजेपी, नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी

कैमरे की ज़िम्मेदारी काशिफ़ सिद्दीकी ने संभाली और बीबीसी हिंदी के हमारे सहयोगी कुलदीप मिश्रा ने इस पर नज़र रखी कि कार्यक्रम में सब-कुछ ठीक से चले.

हमारा सबसे पहला पड़ाव था गुजरात विश्वविद्यालय का पत्रकारिता विभाग. यहां से निकले छात्र पत्रकारिता के अलावा फ़िल्म, थिएटर में भी गए हैं.

छात्रों से बातें की, तब पुराने दिन याद आ गए जब हम अपनी सिमटी हुई दुनिया में सालों बिताने के बाद पंख फैलाने की तैयारी कर रहे थे.

कैम्पस में सबसे ज़्यादा डर था वहां के लंगूरों से. एक दिन पहले मैं जगह देखने पहुंचा था तो लंगूरों ने दांत दिखाकर जैसे धमकी दी थी कि दोबारा शक्ल मत दिखाना.

किस्मत अच्छी थी और वो दोबारा नज़र नहीं आए.

वीडियो कैप्शन, रिपोर्टिंग का नया अंदाज़ - पॉप-अप!

बीबीसी पॉप-अप ऑटो ड्राइवर नरेंद्र ने अर्चना और मुझे अहमदाबाद दिखाने की ज़िम्मेदारी संभाली थी.

सिदी सईद मस्जिद से लेकर लकी टी स्टॉल, पुराने अहमदाबाद, वो हमें अहमदाबाद की गलियों, सड़कों में लेकर गए.

मणिनगर में लोगों से बात करने के बाद वहां के मैदान में कई सालों बाद क्रिकेट खेलने का मौक़ा भी मिला. लगा हर बाल पर छक्का लगेगा लेकिन पता चला कि हैंड-आई कोऑर्डिनेशन का क्या हाल है. उसके बाद घंटों कंधों में दर्द रहा वो अलग.

पुराने अहमदाबाद में घूमना, लोगों से बात करना, ऐसा है जैसे आप पुराने लखनऊ के चौक, अमीनाबाद इलाक़े या फिर पुरानी दिल्ली में घूम रहे हों.

वस्त्रापुर से लेकर जुहापुरा, अहमदाबाद के अलग-अलग रूप मैंने देखे. आने वाले दिनों में हम लोगों के आइडियाज़ सुनेंगे और पूरे गुजरात में लोगों से बात करेंगे.

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हम लोगों तक ख़ुद पहुँचने की कोशिश तो कर ही रहे हैं लेकिन लोग सोशल मीडिया के माध्यम से हमसे संपर्क कर सकते हैं और अपने आइडिया दे सकते हैं.

और अगर आपका आइडिया अच्छा लगा तो आप हमारी कहानी का हिस्सा भी बन सकते हैं.

हम बीबीसी हिंदी और बीबीसी गुजराती के फ़ेसबुक पेज के अलावा ट्विटर पर @BBCHindi और @BBCNewsGujarati पर भी जुड़े रहेंगे.

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