पांच दिनों के लिए ऑड ईवन से क्या बदलेगा?

    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बार फिर ऑड ईवन लागू करने का फ़ैसला किया है. यह फ़ैसला 13-17 नवंबर तक लागू रहेगा.

इन पांच दिनों में तारीख के हिसाब से आप अपनी ऑड और ईवन नंबर की गाड़ी से बाहर निकाल पाएंगे.

यानी 13, 15 और 17 नवंबर को वो कारें ही सड़कों पर दिखेंगी जिनके आखिर में 1,3,5,7 नंबर होगा. 14 और 16 नवंबर को वो गाड़ियां सड़कों पर निकलेंगी जिनके अंत में 0,2,4,6 और 8 होगा.

ऑड ईवन फ़ार्मूले को लागू करने की घोषणा दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने की. उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर इस बारे में जानकारी दी:

  • इसे तीसरी बार लागू करने पर प्रदूषण स्तर में 20 फ़ीसदी की कमी आएगी.
  • इस बार भी महिला ड्राइवरों को छूट दी गई है.
  • दोपहिया और सीएनजी वाहनों को ऑड ईवन से बाहर रखा गया है.
  • टैक्सी और ऑटो ऑड ईवन के दायरे में आएंगे.
  • यह नियम सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक लागू रहेगा.

साल 2016 में जनवरी और अप्रैल में दिल्ली सरकार ने इसी फ़ार्मूले को लागू किया था. लेकिन क्या इससे प्रदूषण की समस्या कम हो जाएगी?

पर्यावरण से जुड़ी संस्था सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरमेंट की अनुमिता राय चौधरी का मानना है कि दिल्ली सरकार का ये फ़ैसला सराहनीय कदम है.

अनुमिता के मुताबिक इस साल 17 अक्टूबर से केन्द्र और राज्य सरकार ने मिल कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रदूषण कम करने को लेकर कई कदम उठाए हैं. ऑड इवन लागू करना उनमें से एक है. अनुमिता मानती हैं कि अकेले ऑड ईवन दिल्ली की प्रदूषण की समस्या का इलाज नहीं है.

बदरपुर पॉवर प्लांट को बंद करने, निर्माण कार्य पर रोक, दिल्ली में मेट्रो पार्किंग की फीस में बढ़ोत्तरी और डीज़ल जेनरेटर सेट पर पांबदी जैसे फ़ैसलों के साथ अगर ऑड ईवन भी लागू किया जा रहा है तो परिणाम ज़्यादा बेहतर होंगे.

हालांकि कारों पर ऑड ईवन फ़ार्मूले का मतलब ये बिलकुल नहीं कि 17 नवंबर के बाद दिल्ली की हवा एकदम ताज़ी हो जाएगी.

इस फ़ार्मूले को लागू करने से दिल्ली में फिलहाल जो प्रदूषण की वजह से 'हेल्थ इमरजेंसी' वाली स्थिति है वो और ख़राब होने के बजाय थोड़ी बेहतर हो जाएगी.

दिल्ली में पिछले साल जनवरी में जब ऑड ईवन फ़ार्मूला कारों पर लागू हुआ था तब भी यही देखने को मिला था.

सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरमेंट के पिछले साल के आंकड़ों की माने तो जनवरी 2016 में प्रदूषण की समस्या पर क़ाबू पा लिया गया था.

अप्रैल 2016 में जब ऑड ईवन लागू हुआ था, तब स्थिति ज़्यादा बेहतर थी. सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरमेंट की अप्रैल 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक ऑड ईवन लागू होने के पहले सात दिन के अंदर प्रदूषण के स्तर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी.

लेकिन ऑड ईवन फ़ॉर्मूले के खत्म होने के एक दो दिन पहले एक बार फिर प्रदूषण के स्तर में तेज़ी आ गई थी.

अनुमिता राय चौधरी के मुताबिक अप्रैल महीने की रिपोर्ट के बाद ऑड ईवन फ़ॉर्मूले की पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया.

इसमें पाया गया कि अप्रैल में ऑड ईवन लागू होने के आख़िरी दिनों में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना दोबारा शुरू हो गया था और इस वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया था.

इस बार प्रदूषण को क़ाबू में करने के लिए दिल्ली सरकार ने कई क़दम अक्टूबर और नवंबर में उठा लिया है.

इसलिए पांच दिन का वक्त काफ़ी होगा ऑड ईवन को लागू करने के लिए. इस बार दिसंबर और जनवरी पिछले साल के मुक़ाबले बेहतर होंगे.

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