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बीबीसी विशेष: 'काश, यह आधार इतना ज़रूरी नहीं होता'
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए
बीबीसी हिंदी सेवा आधार कार्ड पर विशेष सिरीज़ की शुरुआत कर रही है. उसी से जुड़ी सिरीज़ की यह पहली रिपोर्ट झारखंड से है.
सिल्ली डीह के जगदीश हजाम को उनके पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) डीलर ने राशन देने से मना कर दिया है क्योंकि उनका आधार कार्ड उस बायोमिट्रिक मशीन में अपलोड नहीं है, जिसमें अंगूठा लगाकर वह अपना महीने का राशन ले लेते. राशन ना मिलने के चलते उनके घर में खाना बनाने में दिक्कतें हो रही हैं.
सिल्ली डीह रांची ज़िले के सिल्ली प्रखंड का एक गांव है. जगदीश हजाम ने बीबीसी को बताया कि उनका राशन महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित राशन वितरण केंद्र से आता था. उन्हें पहले कभी राशन लेने मे दिक्कत नहीं हुई थी.
जगदीश हजाम ने कहा, "मेरी मां दुर्गा देवी के नाम से लाल कार्ड है. हम लोग उसी से राशन लेते थे. अब पिछले दो महीने में कम से कम पांच बार राशन लेने गए लेकिन डीलर ने राशन देने से मना कर दिया क्योंकि मेरे आधार कार्ड का नंबर उनकी मशीन में नहीं दिख रहा है. काश, यह आधार इतना ज़रूरी नहीं होता."
सरकारी आदेश
दरअसल, झारखंड सरकार ने अप्रैल से राशन लेने के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया था. इस कारण कई तरह की समस्याएं पैदा हुईं और पिछले दिनों सिमडेगा ज़िले में संतोषी कुमारी की मौत के बाद विभागीय मंत्री सरयू राय ने सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया.
सरयू राय ने तब कहा कि राशन वितरण के लिए आधार कार्ड का होना अनिवार्य नहीं है. इसके बावजूद झारखंड के सभी ज़िलों में इस पर तत्काल अमल नहीं हुआ है. इस कारण हज़ारों लोग परेशान हैं.
बुधनी गोप की सुनिए
अपनी ज़िंदगी के सातवें दशक में बुधनी गोप भी परेशानी झेल रही हैं. वह चाकुलिया प्रखंड के लोधाशोली पंचायत के पातरटोला गांव में रहती हैं. उन्हें जून के बाद से राशन नहीं मिला है. इस कारण वह वृद्धावस्था पेंशन से मिले 600 रुपये से घर का राशन ख़रीद रही हैं.
उनके पास पीला (अंत्योदय) कार्ड था. वे राशन के लिए वृद्धावस्था पेंशन और अपनी पुत्रवधू की मज़दूरी से कमाए रुपयों पर आश्रित हो चुकी हैं.
बुधनी गोप अपनी पंचायत के उन सैकड़ों लोगों में शामिल हैं, जिन्हें आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण राशन नहीं मिल रहा है.
झारखंड के खाद्य व आपूर्ति मंत्री ने इस पंचायत में डीलर की मनमानी से संबंधित एक रिपोर्ट पूर्वी सिंहभूम ज़िले के उपायुक्त (डीसी) अमित कुमार को भेजी थी. इसमें वहां के लोगों को राशन नहीं मिलने की बात का ब्यौरा था.
इसके बाद पूर्वी सिंहभूम के डीसी अमित कुमार ने बताया कि उन्होंने लोधाशोली के डीलर का लाइसेंस निलंबित कर उनके ख़िलाफ़ पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश दिया है. इसके साथ ही उस पंचायत के लोगों को निकटतम राशन डीलर से अटैच करा रहे हैं ताकि तत्काल उन्हें राशन वितरण कराया जा सके.
भूख से मौत
झारखंड में एक महीने के दौरान हुई तीन मौतों को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के अलग-अलग दावे हैं.
जलडेगा (लिमडेगा) की संतोषी कुमारी, झरिया (धनबाद) के बैजनाथ रविदास और मोहनपुर (देवघर) के रूपलाल मरांडी की असामयिक मौत के बाद इनके परिजनों ने दावा किया कि घर में अनाज न होने के कारण खाना नहीं बन पा रहा था. इस कारण इनकी मौत हुई. जबकि मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनके अफ़सर इससे इनकार करते हैं.
मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों संपन्न एक सार्वजनिक समारोह में दावा किया कि इनकी मौत का कारण भूख नहीं है.
इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने पूरे राज्य में इसके ख़िलाफ़ धरना दिया. पार्टी नेत्री और गोड्डा ज़िले की अध्यक्ष दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार अपनी नाकामी छिपा रही है. सच तो यह है कि इन लोगों की मौत भूख से हुई है और सरकार इन्हें राशन देने मे नाकाम साबित हो रही है.
आधार है कारण
देवघर में सक्रिय संस्था प्रवाह की प्रोग्राम मैनेजर बबिता सिन्हा कहती हैं कि मोहनपुर के जिस रूपलाल मरांडी की मौत भूख से होने की बात से प्रशासन इनकार कर रहा है उनके घर में कई दिनों से खाना नहीं बना था. वह लोग घर में बची मूढ़ी खाकर गुज़ारा कर रहे थे. उनके डीलर ने उन्हें राशन देना मना कर दिया था क्योंकि उनका आधार कार्ड पीओएस मशीन में अपडेट नहीं था.
इसी तरह झरिया के बैजनाथ रविदास और जलडेगा की संतोषी कुमारी की मौत के बाद यह बात सार्वजनिक हुई कि इनके परिवारों को राशन नहीं मिल पा रहा था.
संतोषी की मां कोयली देवी कहती हैं कि आधार कार्ड के कारण डीलर उन्हें राशन नहीं दे रहा था.
वहीं, बैजनाथ रविदास के पुत्र रवि कुमार ने बताया कि उनके चाचा की मौत के बाद डीलर राशन नहीं दे रहा था. तब उनके पिताजी ने नया राशन कार्ड बनवाने के लिए अप्लाई किया लेकिन इसके बनने से पहले ही उनकी मौत हो गयी.
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