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10 साल की भांजी से रेप के मामले में मामाओं को उम्रक़ैद
- Author, अरविंद छाबड़ा
- पदनाम, बीबीसी पंजाबी सेवा
चंडीगढ़ में 10 साल की लड़की से रेप के मामले में लड़की के दोनों मामाओं को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है.
सहायक ज़िला और सत्र न्यायालय ने मंगलवार को दोनों मामाओं को दोषी ठहराया था.
इस बच्ची ने अगस्त में एक बच्चे को जन्म दिया था. जुलाई में लड़की ने पेट दर्द की शिकायत की थी जिसके बाद उसके गर्भवती होने के बारे में पता चला था.
इस मामले में सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई थी और फ़ैसला मंगलवार को सुनाया गया था. गुरुवार को अदालत ने सज़ा की अवधि पर फ़ैसला दिया है.
छोटे मामा पर मुकदमा जहां 18 दिनों तक चला वहीं, बड़े मामा के मामले में पूरा एक महीना लग गया था.
गर्भवती होने से सामने आया मामला
यह मामला तब सुर्खियों में छा गया था जब एक 10 साल की लड़की के गर्भवती होने का पता चला था.
लड़की के परिवार ने अदालत से गर्भपात की मांग की थी. तब लड़की के बयान के आधार पर पुलिस ने मामा को गिरफ्तार कर लिया था.
वहीं, परिवार लड़की का गर्भपात करना चाहता था. इसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ में ज़िला न्यायालय में याचिका दायर की थी.
लेकिन, लड़की को गर्भपात से खतरा बताते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी. कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी आधार पर याचिका को ख़ारिज कर दिया था.
मामले की सुनवाई के दौरान ही पीड़िता ने अगस्त में एक बच्चे को जन्म दिया था.
जब नहीं मिला मामा का डीएनए
इस मामले में बड़ा मोड़ तब आया था जब लड़की के मामा का डीएनए बच्चे के डीएनए से नहीं मिला.
इसके बाद पुलिस ने अदालत की अनुमति लेकर लड़की का बयान फिर से रिकॉर्ड किया था. इस बार लड़की ने अपने छोटे मामा का नाम भी लिया.
अब छोटे मामा को भी गिरफ्तार किया गया और उनके डीएनए सैंपल लिए गए. छोटे मामा के सैंपल बच्चे के डीएनए से मिल गए थे. इससे यह साबित हो गया कि वही उस बच्चे के पिता हैं.
कब-कब, क्या हुआ
जुलाई 14: लड़की के 30 हफ्तों से गर्भवती होने का पता चला. मामा को गिरफ्तार किया गया.
जुलाई 15: चंडीगढ़ कोर्ट ने चिकित्सकीय आधार पर गर्भपात की याचिका खारिज कर दी थी.
जुलाई 28: सुप्रीम कोर्ट ने भी गर्भपात से लड़की को खतरा बताते हुए याचिका खारिज की.
अगस्त 17: पीड़िता ने चंडीगढ़ अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया.
सितंबर 11: बच्ची से नहीं मिला मामा का डीएनए
सितंबर 18: पुलिस ने नए सैंपल लेने की मांग की.
अक्टूबर 9: छोटे मामा से बच्ची के डीएनए मैच हो गए.
31 अक्तूबरः अदालत ने दोनों मामाओं को दोषी क़रार दिया.
02 नवंबरः अदालत ने दोनों मामाओं को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई